Maharashtra Politics : महाराष्ट्र के कोल्हापुर में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उद्धव ठाकरे और कांग्रेस पार्टी पर जमकर निशाना साधा। अमित शाह ने तल्ख लहजे में कहा कि उद्धव ठाकरे आज उस कांग्रेस की गोद में बैठे हैं, जो घुसपैठियों को अपना वोट बैंक मानती है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि यह देश ‘धर्मशाला’ नहीं है और यहाँ वही रह सकता है जिसका जन्म इस देश में हुआ है। शिवसेना के संदर्भ में उन्होंने साफ किया कि अब कोई ‘शिंदे गुट’ नहीं है, बल्कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ही एकमात्र असली शिवसेना है। शाह ने कहा कि एकनाथ शिंदे ही वास्तविक उत्तराधिकारी हैं और पार्टी की बागडोर उन्हीं के हाथों में सुरक्षित है।
प्रधानमंत्री मोदी के 12 वर्षों का स्वर्णिम काल
गृह मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि पीएम मोदी ने देश के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले चुने हुए प्रधानमंत्री का कीर्तिमान स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि जब भी आजाद भारत का स्वर्णिम इतिहास लिखा जाएगा, तो मोदी के इन 12 वर्षों को भारतीय संस्कृति के पुनरुद्धार, राष्ट्र के अभूतपूर्व विकास, एक सुरक्षित भारत के निर्माण और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते सम्मान के रूप में दर्ज किया जाएगा। शाह ने उल्लेख किया कि सोमनाथ से लेकर गंगासागर तक एनडीए सरकार ने देश के विकास के नए आयाम स्थापित किए हैं और जनता का विश्वास लगातार बढ़ रहा है।
सीमा सुरक्षा और घुसपैठ पर कड़ा रुख
अमित शाह ने घुसपैठ की समस्या को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि भाजपा की प्राथमिकता देश की सीमाओं को सुरक्षित करना है। उन्होंने पश्चिम बंगाल की जनता का आभार जताते हुए कहा कि वहां के लोगों ने भाजपा को जो आशीर्वाद दिया है, उसके बाद अब घुसपैठ को रोकना और देश भर से हर घुसपैठिए को चुन-चुनकर बाहर निकालना हमारा संकल्प है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि भाजपा सरकार राष्ट्र की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं करेगी और घुसपैठियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की जाएगी।
उद्धव ठाकरे का पलटवार, शिवाजी महाराज की मूर्ति पर छिड़ा संग्राम
दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे ने भी अमित शाह के हमलों का जवाब देते हुए राज्य सरकार और भाजपा पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कोल्हापुर में छत्रपति शिवाजी महाराज की मूर्ति स्थापना के संघर्ष को याद करते हुए कहा कि महाराष्ट्र जैसे राज्य में शिवाजी महाराज की प्रतिमा लगाने के लिए हमें शासन-प्रशासन से लड़ना पड़ा, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने इसे स्थानीय लोक अधिकार समिति की सफलता बताते हुए कहा कि जो लोग ‘गद्दार’ हैं, वे आने वाली राजनीतिक सुनामी में बह जाएंगे। ठाकरे ने मराठी अस्मिता का मुद्दा उठाते हुए कहा कि हम अपने मराठी भाई-बहनों के लिए विकास के रास्ते खोल रहे हैं और जहां भी अन्याय दिखे, वहां आवाज उठाना हमारा धर्म है।
महाराष्ट्र की राजनीति में बढ़ता तनाव और चुनावी माहौल
अमित शाह के बयानों और उद्धव ठाकरे के पलटवार ने महाराष्ट्र की राजनीति में चुनावी पारा काफी बढ़ा दिया है। एक तरफ जहाँ भाजपा और शिंदे सेना का गठबंधन ‘हिंदुत्व’ और ‘सुरक्षित राष्ट्र’ के मुद्दों को मुख्यधारा में ला रहा है, वहीं उद्धव ठाकरे मराठी अस्मिता और शिवाजी महाराज के अपमान को लेकर भावनात्मक जुड़ाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं। इन बयानों से साफ है कि आने वाले समय में महाराष्ट्र की सियासत और भी अधिक तीखी होने वाली है, जहाँ विकास और अस्मिता के मुद्दों के बीच मतदाताओं को अपनी पसंद तय करनी है।
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