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India Fertility Rate : एलोन मस्क ने जताई चिंता, भारत की प्रजनन दर रिप्लेसमेंट लेवल से नीचे पहुंची

India Fertility Rate

India Fertility Rate : स्पेसएक्स और एक्स (ट्विटर) के प्रमुख एलोन मस्क ने भारत की तेजी से गिरती प्रजनन दर (फर्टिलिटी रेट) पर गहरी चिंता व्यक्त की है। मस्क ने शनिवार (6 जून) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए वैश्विक ध्यान इस ओर आकर्षित किया। उन्होंने लिखा कि भारत की जन्म दर अब आधिकारिक रूप से रिप्लेसमेंट लेवल (प्रतिस्थापन स्तर) से नीचे गिर चुकी है। मस्क ने विशेष रूप से रेखांकित किया कि देश के सबसे शिक्षित और संभ्रांत तबके में तो यह गिरावट कई साल पहले ही दर्ज की जा चुकी थी, जो अब पूरे देश में फैल चुकी है।

मीडिया रिपोर्ट्स में चौंकाने वाले आंकड़े

एलोन मस्क की यह टिप्पणी मीडिया आउटलेट ‘एएफ पोस्ट’ द्वारा जारी किए गए हालिया आंकड़ों पर आई है, जिसने ‘द इकोनॉमिस्ट’ के एक लेख का हवाला दिया था। इन आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक दशक में भारत की कुल प्रजनन दर (टीएफआर) प्रति महिला 2.3 जन्म से घटकर महज 1.9 रह गई है। भारतीय जनसांख्यिकी के इतिहास में यह पहला मौका है जब राष्ट्रीय स्तर पर प्रजनन दर प्रतिस्थापन सीमा से नीचे दर्ज की गई है, जो देश के भविष्य के कार्यबल और विकास के लिए एक बड़ा संकेत है।

देश के सिर्फ छह राज्यों में जन्म दर सामान्य

रिपोर्ट के विस्तृत विश्लेषण से पता चलता है कि भारत में प्रजनन दर की यह गिरावट बेहद तीव्र और व्यापक है। वर्तमान में देश के केवल छह राज्य—बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और झारखंड—ही ऐसे हैं जहां प्रजनन दर 2.1 बच्चों के रिप्लेसमेंट लेवल से ऊपर बनी हुई है। दूसरी तरफ, देश की राजधानी दिल्ली में यह आंकड़ा सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। दिल्ली में कुल प्रजनन दर मात्र 1.2 दर्ज की गई है, जो यूरोपीय देश फिनलैंड से भी कम है।

क्या होता है प्रतिस्थापन स्तर

जनसंख्या विज्ञान में 2.1 की प्रजनन दर को ‘प्रतिस्थापन स्तर’ (रिप्लेसमेंट रेट) माना जाता है। यह वह आवश्यक स्तर है जो किसी भी देश की आबादी को बिना किसी प्रवासन (माइग्रेशन) के एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में स्थिर बनाए रखने के लिए जरूरी होता है। जनसांख्यिकी विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रजनन दर लंबे समय तक 2.1 से नीचे रहती है, तो शुरुआत में जनसंख्या वृद्धि की रफ्तार धीमी होती है और आगे चलकर आबादी घटने लगती है। इससे देश में बुजुर्गों की संख्या बढ़ती है और कामकाजी युवाओं की कमी हो जाती है।

उत्तर और दक्षिण भारत के बीच गहरी खाई

आंकड़े भारत के विभिन्न क्षेत्रों के बीच एक बड़े जनसांख्यिकीय अंतर को भी दर्शाते हैं। पिछले दशक में बिहार में जन्म दर में सबसे धीमी गिरावट देखी गई और वह रिप्लेसमेंट लेवल से ऊपर बना हुआ है। इसके विपरीत, दक्षिण भारत के राज्यों और दिल्ली जैसे अत्यधिक शहरीकृत, आर्थिक रूप से विकसित क्षेत्रों में प्रजनन दर सबसे तेजी से नीचे गिरी है। इससे उत्तर और दक्षिण भारत के बीच एक नई सामाजिक-आर्थिक और जनसांख्यिकीय खाई पैदा हो रही है।

संयुक्त राष्ट्र संघ की रिपोर्ट ने भी की इस गंभीर गिरावट की पुष्टि

भारत की घटती प्रजनन दर की इस प्रवृत्ति की पुष्टि संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) की 2025 की विश्व जनसंख्या रिपोर्ट में भी की गई है। संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी ने माना है कि भारत की कुल प्रजनन दर अब 1.9 है। हालांकि, यूएनएफपीए का कहना है कि जन्म दर घटने के बावजूद भारत 1.46 अरब से अधिक की आबादी के साथ दुनिया का सबसे बड़ा मानव संसाधन है, लेकिन यहां स्वास्थ्य और शिक्षा में सुधार के बाद भी मातृ मृत्यु दर, बाल विवाह और लिंगभेद जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं।

फिलहाल बढ़ती रहेगी भारत की आबादी

भले ही प्रजनन दर में ऐतिहासिक गिरावट आई हो, लेकिन भारत वर्तमान में दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बना हुआ है। साल 2023 में चीन को पीछे छोड़ने के बाद, पूर्व के दशकों में रही उच्च जन्म दर के असर (पॉपुलेशन मोमेंटम) के कारण भारत की आबादी में अभी हर साल लाखों लोग जुड़ रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि आने वाले दशकों में यह वृद्धि बेहद धीमी हो जाएगी और संभवतः इस सदी के अंत तक भारत की कुल आबादी घटने की ओर अग्रसर हो जाएगी।

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