Headline
Houthi Attack: सऊदी अरब में हूती हमलों से बढ़ा खतरा, 9 देशों में STEP अलर्ट; अमेरिका की एडवाइजरी
Varanasi News: यूपी ATS के साथ मुठभेड़ में 30 लाख का इनामी नक्सली कमांडर बृजेश गंझू ढेर
Kiren Rijiju Reaction : हामिद अंसारी के बयान पर भड़के किरेन रिजिजू, अलगाववादियों को लेकर पूछा बड़ा सवाल
Asian Games 2026
Asian Games 2026: भारत ने खोला मेडल खाता, महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल टीम ने जीता सिल्वर
Sleep Deprivation
Sleep Deprivation: 6–8 घंटे से कम सोने पर शरीर और दिमाग में क्या होता है? जानिए डॉक्टर की सलाह
Ancestors in Dream
Ancestors in Dream : सपने में पूर्वजों का दिखना शुभ या अशुभ, जानिए स्वप्न शास्त्र के संकेत और मतलब
DUSU Result 2026 : DUSU चुनाव में ABVP का परचम, किरेन रिजिजू ने विजेताओं को दी बधाई
Amit Shah Health
Amit Shah Health : अमित शाह की बिगड़ी तबीयत, हुबली कार्यक्रम से रहे दूर, प्रह्लाद जोशी ने दिया अपडेट
NGT Conference
NGT Conference : भारत के कार्बन उत्सर्जन पर PM मोदी का बड़ा बयान, विकसित देशों का आंकड़ा चौंकाएगा

PoK Election : PoK चुनाव में बवाल के बीच PML-N सबसे आगे, 10 साल बाद नवाज शरीफ की वापसी करीब

PoK Election

PoK Election : पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में विधानसभा चुनाव के पहले दो चरणों की मतगणना के बाद पाकिस्तान की सत्तारूढ़ पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) ने शानदार प्रदर्शन किया है। शुरुआती नतीजों के अनुसार पार्टी ने अधिकांश सीटों पर बढ़त हासिल कर ली है, जिससे क्षेत्र में करीब एक दशक बाद उसकी सत्ता में वापसी लगभग तय मानी जा रही है। चुनाव सुरक्षा व्यवस्था और भारी मानसूनी बारिश के बीच तीन चरणों में कराए जा रहे हैं।

दो चरणों में अच्छा रहा मतदान प्रतिशत

चुनाव आयोग के अनुसार पहले दो चरणों में कई संवेदनशील इलाकों में शांतिपूर्ण मतदान कराया गया। मुजफ्फराबाद सहित विभिन्न क्षेत्रों में मतदाताओं ने उत्साह के साथ अपने मताधिकार का प्रयोग किया। कई स्थानों पर मतदान प्रतिशत 50 से 56 फीसदी से अधिक दर्ज किया गया। अब शेष 11 विधानसभा सीटों पर मतदान 10 अगस्त को होना प्रस्तावित है, जिसके बाद अंतिम तस्वीर सामने आएगी।

10 साल बाद सत्ता में वापसी की ओर PML-N

क्षेत्रीय चुनाव आयोग के प्रवक्ता राजा शकील ने बताया कि पहले दो चरणों में घोषित 34 सीटों में से PML-N ने 24 सीटों पर जीत दर्ज की है। इस प्रदर्शन के बाद पार्टी की सरकार बनने की संभावना काफी मजबूत हो गई है। पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने विजयी उम्मीदवारों को बधाई देते हुए इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता के भरोसे का परिणाम बताया।

बहिष्कार की अपील का नहीं पड़ा असर

चुनाव से पहले प्रतिबंधित संगठन जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने लोगों से मतदान का बहिष्कार करने की अपील की थी। इसके बावजूद बड़ी संख्या में मतदाता मतदान केंद्रों तक पहुंचे और वोट डाले। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोगों ने विरोध और तनावपूर्ण माहौल के बावजूद लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपनी भागीदारी सुनिश्चित की।

आरक्षित सीटों को लेकर जारी है विवाद

चुनाव के दौरान सबसे बड़ा विवाद कश्मीर से विस्थापित लोगों के लिए आरक्षित 12 विधानसभा सीटों को लेकर सामने आया। JAAC का कहना है कि PoK से बाहर रहने वाले लोगों को इन सीटों के माध्यम से अनुचित राजनीतिक प्रभाव मिलता है, इसलिए इन्हें समाप्त किया जाना चाहिए। दूसरी ओर प्रशासन और सरकार का कहना है कि ये सीटें संवैधानिक व्यवस्था का हिस्सा हैं और इन्हें केवल संविधान में संशोधन के बाद ही बदला जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बढ़ा विवाद

जून में सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया था कि आरक्षित सीटों को संवैधानिक संरक्षण प्राप्त है। अदालत ने कहा कि बिना संवैधानिक संशोधन के इन्हें समाप्त नहीं किया जा सकता। सरकार का दावा है कि JAAC की अधिकांश मांगों को स्वीकार कर लिया गया है और केवल आरक्षित सीटों का मुद्दा नई विधानसभा के स्तर पर ही तय किया जा सकता है।

चुनाव प्रचार के दौरान रहा तनावपूर्ण माहौल

चुनाव प्रचार अभियान कई सप्ताह तक विरोध-प्रदर्शनों और राजनीतिक तनाव के बीच चला। JAAC के समर्थकों और पुलिस के बीच कई स्थानों पर झड़पें भी हुईं। मतदान से पहले सुरक्षा एजेंसियों ने संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बल तैनात किया ताकि चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया जा सके। सरकार ने कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए हाल ही में JAAC पर प्रतिबंध लगाया था।

सरकार ने लगाए चुनाव बाधित करने के आरोप

प्रशासन का आरोप है कि JAAC के कुछ समर्थकों ने चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की। अधिकारियों ने यह भी दावा किया कि कुछ प्रदर्शनकारियों के बीच पाकिस्तान तहरीक-ए-तालिबान (TTP) से जुड़े तत्वों की घुसपैठ की आशंका है। हालांकि JAAC ने इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। संगठन की स्थापना 2023 में हुई थी और वह क्षेत्र के लोगों के लिए अधिक राजनीतिक अधिकारों की मांग करता रहा है।

जनता की भागीदारी ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया को दिया संदेश

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि विरोध, हिंसा और बहिष्कार की अपील के बावजूद बड़ी संख्या में लोगों का मतदान करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता के विश्वास को दर्शाता है। अब सभी की निगाहें 10 अगस्त को होने वाले तीसरे चरण के मतदान और अंतिम चुनाव परिणामों पर टिकी हैं, जिनसे पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की नई सरकार की तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी।

Read more : Parliament Special Session : संसद विशेष सत्र की अटकलों पर रिजिजू का जवाब, सरकार ने प्रस्ताव से किया इनकार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top
फेस्टिव सीजन में छाना है तो शहनाज गिल का ये सूट लुक जरूर देखें रसीली नाशपाती के ये फायदे नहीं जानते होंगे आप, डाइट में करें शामिल कॉफी पीने का सही तरीका क्या है? जानिए दिन में कितने कप हैं सुरक्षित दूध से घर पर तैयार करें अलग-अलग तरह के चीज़, अपनाएं ये आसान तरीके क्या आप सही, तरीके से करते हैं चेहरे पर ब्लीच? जानिए आसान टिप्स