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Hantavirus Cruise Ship : क्रूज शिप पर हंटावायरस का खौफ, 3 की मौत के बाद बढ़ा संक्रमण का खतरा

Hantavirus Cruise Ship

Hantavirus Cruise Ship :  हाल ही में अटलांटिक महासागर की लहरों के बीच एक लक्जरी क्रूज पर हंटावायरस (Hantavirus) के फैलने की खबर ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। इस वायरस के संक्रमण के कारण क्रूज पर सवार तीन यात्रियों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से बीमार बताए जा रहे हैं। इस घटना के बाद से ही अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं। सबसे बड़ी आशंका अब इस बात को लेकर जताई जा रही है कि क्या यह वायरस इंसानों से इंसानों में फैल सकता है? विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी इस आउटब्रेक पर बारीकी से नजर रख रहा है, क्योंकि यदि यह वायरस ‘ह्यूमन टू ह्यूमन ट्रांसमिशन’ करने में सक्षम हो गया, तो यह वैश्विक स्तर पर एक नई स्वास्थ्य चुनौती बन सकता है।

कैसे फैलता है हंटावायरस और क्रूज पर कैसे पहुंची यह बीमारी?

हंटावायरस कोई नया वायरस नहीं है, लेकिन इसका इस तरह से आउटब्रेक होना डराने वाला है। यह एक गंभीर वायरल बीमारी है जो मुख्य रूप से संक्रमित चूहों (Rodents) के जरिए फैलती है। जब कोई व्यक्ति संक्रमित चूहों के पेशाब, लार या मल के संपर्क में आता है, तो वह इसकी चपेट में आ सकता है। क्रूज शिप के मामले में प्रारंभिक अनुमान यह है कि जहाज पर मौजूद यात्री किसी संक्रमित चूहे या उसकी गंदगी के संपर्क में आ गए थे, जिससे उनमें यह संक्रमण फैला। हालांकि, अभी तक इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में गया है, लेकिन तीन मौतों और बढ़ते मरीजों की संख्या ने वैज्ञानिकों को ‘इंसान से इंसान’ में संक्रमण की संभावनाओं पर शोध करने के लिए मजबूर कर दिया है।

क्या कहता है विश्व स्वास्थ्य संगठन और विशेषज्ञों का मत?

हंटावायरस के इंसानों में फैलने की आशंका पर महामारी विशेषज्ञ डॉ. जुगल किशोर का कहना है कि वर्तमान में इस वायरस के ‘ह्यूमन टू ह्यूमन ट्रांसमिशन’ का कोई पुख्ता और आधिकारिक मामला सामने नहीं आया है। ऐतिहासिक रूप से हंटावायरस केवल जानवरों से इंसानों में ही आता रहा है। डब्लूएचओ (WHO) के दिशा-निर्देश भी यही कहते हैं कि सामान्यतः इसका एक से दूसरे इंसान में ट्रांसमिशन नहीं होता है। हालांकि, डॉ. किशोर एक महत्वपूर्ण चेतावनी भी देते हैं; उनके अनुसार यदि वायरस के ‘स्ट्रेन’ में कोई बड़ा म्यूटेशन (बदलाव) होता है या इसका कोई ‘एंडिस स्ट्रेन’ (Andes strain) सर्कुलेशन में आता है, तो इंसानों में संक्रमण का खतरा वास्तविक हो सकता है। फिलहाल क्रूज पर मिले स्ट्रेन की सटीक प्रकृति का पता लगाया जा रहा है।

घबराने की जरूरत नहीं, लेकिन सतर्कता है अनिवार्य

राहत की बात यह है कि अभी इस वायरस के मामले किसी विशेष देश की मुख्य भूमि पर नहीं मिले हैं। यह आउटब्रेक केवल एक क्रूज शिप तक ही सीमित है, जिसे अब आइसोलेशन में रखा गया है। डॉ. किशोर सलाह देते हैं कि आम जनता को फिलहाल घबराने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन वायरस के प्रति जागरूक और अलर्ट रहना बेहद जरूरी है। इतिहास गवाह है कि किसी भी वायरस को तब तक नियंत्रित किया जा सकता है जब तक लोग उसके लक्षणों के प्रति सजग रहें। विशेषकर वे लोग जो बंदरगाहों, जहाजों या ऐसी जगहों पर काम करते हैं जहाँ चूहों की मौजूदगी अधिक होती है, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

हंटावायरस के प्रमुख लक्षण और बचाव के प्रभावी तरीके

इस वायरस की पहचान शुरुआती दौर में करना बहुत जरूरी है। इसके प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, मांसपेशियों में असहनीय दर्द, थकान, कमजोरी और सांस लेने में गंभीर समस्या शामिल है। कुछ मरीजों में सिरदर्द और पेट संबंधी समस्याएं भी देखी गई हैं। इससे बचाव का सबसे बड़ा तरीका स्वच्छता है। चूहों के संपर्क से पूरी तरह बचें और अपने आसपास, विशेषकर भोजन रखने वाली जगहों पर साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। यदि किसी व्यक्ति को उपरोक्त लक्षण महसूस होते हैं, तो उसे तुरंत डॉक्टरी सलाह लेनी चाहिए। जागरूकता और स्वच्छता ही इस वायरस के प्रसार को रोकने के सबसे सशक्त हथियार हैं।

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