Brain Stroke Symptoms: आज के दौर में ब्रेन स्ट्रोक एक वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल बन चुका है। यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब मस्तिष्क के किसी हिस्से में रक्त का प्रवाह बाधित हो जाता है या मस्तिष्क की कोई रक्त वाहिका फट जाती है। रक्त की कमी के कारण मस्तिष्क की कोशिकाओं को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिससे वे चंद मिनटों में मृत होने लगती हैं। पहले यह बीमारी केवल बुजुर्गों तक सीमित मानी जाती थी, लेकिन अब खराब जीवनशैली, अत्यधिक तनाव और शारीरिक सक्रियता की कमी के कारण युवा भी इसकी चपेट में तेजी से आ रहे हैं।
Brain Stroke Symptoms: स्ट्रोक के मुख्य कारण: क्यों हो रही है यह बीमारी?
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रेन स्ट्रोक के पीछे कई चिकित्सीय और जीवनशैली संबंधी कारक जिम्मेदार हैं। उच्च रक्तचाप (Hypertension) इसका सबसे बड़ा कारण है, क्योंकि यह धमनियों पर दबाव डालता है। इसके अलावा, डायबिटीज, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, मोटापा और हृदय रोग जोखिम को दोगुना कर देते हैं। धूम्रपान और शराब का अत्यधिक सेवन रक्त वाहिकाओं को संकुचित कर देता है, जिससे थक्के जमने की संभावना बढ़ जाती है। 50 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्तियों और मेटाबॉलिक सिंड्रोम से जूझ रहे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
Brain Stroke Symptoms: लक्षणों की पहचान: शरीर में दिखने वाले अचानक बदलाव
ब्रेन स्ट्रोक के लक्षणों को पहचानना ही जीवन बचाने की पहली सीढ़ी है। वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. राजेश कुमार बताते हैं कि इसके लक्षण अत्यंत अचानक प्रकट होते हैं। मुख्य संकेतों में शरीर के एक तरफ (हाथ, पैर या चेहरे) में अचानक सुन्नपन या कमजोरी महसूस होना शामिल है। यदि किसी व्यक्ति का चेहरा एक तरफ झुक रहा हो या उसे मुस्कुराने में कठिनाई हो रही हो, तो यह स्ट्रोक का स्पष्ट संकेत है। इसके अलावा, अचानक बोलने में लड़खड़ाहट, धुंधला दिखाई देना, तेज सिरदर्द और शरीर का संतुलन बिगड़ना भी इसके गंभीर लक्षण हैं।
आपातकालीन स्थिति में क्या करें: हर मिनट है कीमती
स्ट्रोक के लक्षण दिखने पर ‘गोल्डन ऑवर’ यानी शुरुआती एक घंटा सबसे महत्वपूर्ण होता है। जैसे ही लक्षण दिखाई दें, बिना समय गंवाए मरीज को नजदीकी न्यूरो-स्पेशियलिटी अस्पताल ले जाएं। एम्बुलेंस आने तक मरीज को करवट दिलाकर लिटा दें और सिर को थोड़ा ऊपर रखें। इस दौरान मरीज को कुछ भी खाने या पीने (पानी भी नहीं) के लिए न दें, क्योंकि स्ट्रोक में निगलने की क्षमता प्रभावित हो सकती है, जिससे दम घुटने का खतरा रहता है। शांत रहकर मरीज का मनोबल बढ़ाना भी स्थिति को बिगड़ने से रोकता है।
बचाव के उपाय और सही उपचार की दिशा
ब्रेन स्ट्रोक से बचने का सबसे प्रभावी तरीका एक स्वस्थ दिनचर्या का पालन करना है। दैनिक रूप से कम से कम 30 मिनट व्यायाम करें और अपने वजन को नियंत्रित रखें। आहार में नमक और चिकनाई की मात्रा कम करें और ताजे फल व हरी सब्जियों को प्राथमिकता दें। नियमित स्वास्थ्य जांच के जरिए बीपी और शुगर को सामान्य बनाए रखें। उपचार की बात करें तो, डॉक्टर स्ट्रोक के प्रकार (इस्कीमिक या हैमरेजिक) के आधार पर थक्का घोलने वाली दवाएं, सर्जरी या लंबे समय तक फिजियोथेरेपी की सलाह देते हैं। सही समय पर मिला उपचार विकलांगता के जोखिम को न्यूनतम कर सकता है।
