भारत-चीन सीमा: भारत और चीन, दो एशियाई महाशक्तियों की सीमाएं हजारों किलोमीटर तक फैली हुई हैं। इन दोनों देशों की सीमा रेखा को “LAC (Line of Actual Control)” कहा जाता है, जो विभिन्न राज्यों से होकर गुजरती है। भारत के 5 राज्य ऐसे हैं जिनकी सीमाएं चीन से मिलती हैं-जम्मू-कश्मीर (लद्दाख), हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश। ये राज्य न सिर्फ भौगोलिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि सामरिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी देश के लिए खास महत्व रखते हैं।
लद्दाख: सबसे लंबी सीमा चीन से
लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश है जो जम्मू-कश्मीर से अलग होकर 2019 में अस्तित्व में आया। लद्दाख की चीन के साथ सबसे लंबी सीमा है, जो लगभग 1597 किमी तक फैली हुई है। यहीं पर स्थित है पैंगोंग लेक, गलवान घाटी, जो भारत-चीन के बीच तनाव के केंद्र रहे हैं। यहां भारतीय सेना की भारी तैनाती रहती है और यह क्षेत्र सामरिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है। लद्दाख की संस्कृति तिब्बती प्रभाव से प्रभावित है और बॉर्डर सुरक्षा को लेकर यहां विशेष सतर्कता बरती जाती है।
हिमाचल प्रदेश: पूर्वोत्तर की संवेदनशीलता
हिमाचल प्रदेश की सीमा चीन के तिब्बत क्षेत्र से सटी हुई है, खासकर किन्नौर और लाहौल-स्पीति जिलों में। यह राज्य लगभग 260 किमी चीन के साथ अपनी सीमा साझा करता है। भौगोलिक रूप से कठिनाइयों से भरपूर यह इलाका सीमाई निगरानी के लिहाज से चुनौतीपूर्ण है। हिमाचल की संस्कृति में बौद्ध और हिंदू परंपराओं का समावेश देखने को मिलता है। चीन के साथ सीमा विवाद की संभावनाओं को देखते हुए यहां भी सेना की गतिविधियां मजबूत रहती हैं।
उत्तराखंड: सामरिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र
उत्तराखंड का चमोली, पिथौरागढ़ और उत्तरकाशी जैसे जिलों की सीमाएं तिब्बत से मिलती हैं। यहां की सीमा लगभग 345 किमी लंबी है और सैन्य दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। उत्तराखंड के सीमावर्ती क्षेत्रों में ट्रैकिंग, तीर्थयात्रा और सैनिक आवाजाही प्रमुख रूप से देखी जाती है। ‘लिपुलेख दर्रा’ और ‘काला पानी’ क्षेत्र भारत-नेपाल-चीन के त्रिकोणीय तनाव का कारण रहे हैं। यहां का भौगोलिक परिदृश्य पर्वतीय है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था चुनौतीपूर्ण होती है।
सिक्किम: चीन से लगा छोटा लेकिन महत्वपूर्ण राज्य
सिक्किम भारत का एक छोटा लेकिन सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण राज्य है। इसकी चीन के साथ सीमा लगभग 220 किमी है और यहां का नाथू ला पास बेहद प्रसिद्ध है। डोकलाम विवाद (2017) के दौरान भारत-चीन सेना आमने-सामने आई थी, जिससे इसकी अहमियत और बढ़ गई। सिक्किम का भौगोलिक क्षेत्र बर्फीली चोटियों और घने जंगलों से भरा हुआ है, जिससे गश्ती करना कठिन होता है। यहां की संस्कृति तिब्बती, नेपाली और भूटानी प्रभावों से परिपूर्ण है।
अरुणाचल प्रदेश: सीमा विवाद का मुख्य केंद्र
अरुणाचल प्रदेश की सीमा चीन के साथ लगभग 1126 किमी लंबी है। चीन इसे “दक्षिण तिब्बत” कहता है और इस पर पूरे राज्य पर दावा करता है। यह राज्य भारत-चीन सीमा विवादों का मुख्य केंद्र रहा है। अरुणाचल में तवांग जैसे क्षेत्र सामरिक और धार्मिक दृष्टि से दोनों देशों के लिए अहम हैं। यहां भारी सेना की तैनाती के साथ-साथ सड़क और एयरबेस निर्माण भी तेजी से हो रहा है।
भारतीय सेना की मजबूत उपस्थिति
भारत की चीन के साथ कुल सीमा लगभग 3,488 किमी है। यह सीमा ज्यादातर ऊँचाई वाले और कठिन भौगोलिक क्षेत्रों से होकर गुजरती है। सीमा विवाद और सैन्य झड़पों के चलते यहां विशेष सुरक्षा और सतर्कता बरती जाती है। इन राज्यों में ITBP और भारतीय सेना की मजबूत उपस्थिति होती है। सीमा पर बुनियादी ढांचे का निर्माण केंद्र सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में है।
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