Rajya Sabha Election 2026: भारतीय लोकतंत्र के ऊपरी सदन यानी राज्यसभा के लिए चुनावी हलचल तेज हो गई है। निर्वाचन आयोग ने घोषणा की है कि अप्रैल 2026 में खाली होने वाली 37 राज्यसभा सीटों के लिए 16 मार्च 2026 को मतदान कराया जाएगा। यह चुनाव उन सदस्यों का कार्यकाल समाप्त होने के कारण हो रहा है जो पिछले 6 वर्षों से सदन का हिस्सा थे। इस घोषणा के साथ ही संबंधित 11 राज्यों की विधानसभाओं में राजनीतिक गहमागहमी बढ़ गई है। सभी प्रमुख राजनीतिक दल अब अपने समीकरण बिठाने और उम्मीदवारों के नामों पर अंतिम मुहर लगाने की प्रक्रिया में जुट गए हैं।
Rajya Sabha Election 2026: महाराष्ट्र और तमिलनाडु: उच्च सदन की जंग में सबसे बड़े राज्य
इस चुनावी चक्र में महाराष्ट्र और तमिलनाडु की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रहने वाली है। महाराष्ट्र की कुल 7 सीटों पर चुनाव होना है, जो वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए काफी दिलचस्प होगा। यहाँ सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच एक-एक सीट के लिए कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है। वहीं, दक्षिण भारत के प्रमुख राज्य तमिलनाडु की 6 सीटों के लिए भी वोट डाले जाएंगे। इन राज्यों में पार्टियों की संख्याबल के आधार पर यह तय होगा कि दिल्ली के गलियारों में किसकी आवाज ज्यादा बुलंद होगी।
Rajya Sabha Election 2026: बिहार और पश्चिम बंगाल: क्षेत्रीय दलों की प्रतिष्ठा दांव पर
पूर्वी भारत के दो महत्वपूर्ण राज्यों, बिहार और पश्चिम बंगाल से भी राज्यसभा के लिए भारी संख्या में सदस्य चुने जाने हैं। बिहार की 5 सीटों पर चुनाव होना है, जहाँ गठबंधन की राजनीति और विधायकों की निष्ठा परिणामों को प्रभावित कर सकती है। दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल की भी 5 सीटों के लिए मतदान होगा। ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी दलों के बीच यहाँ वर्चस्व की लड़ाई देखने को मिलेगी। इन दोनों राज्यों के चुनाव परिणाम राष्ट्रीय राजनीति में क्षेत्रीय दलों की ताकत का आकलन करने में मदद करेंगे।
ओडिशा और असम: खाली हो रही हैं महत्वपूर्ण सीटें
ओडिशा और असम में भी राज्यसभा की रिक्तियों को भरने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। ओडिशा की 4 सीटों के लिए चुनाव संपन्न कराया जाएगा। नवीन पटनायक की पार्टी और भाजपा के बीच यहाँ कड़ी टक्कर होने की संभावना है। वहीं, पूर्वोत्तर के सबसे बड़े राज्य असम की 3 सीटों पर मतदान होगा। असम में सत्तासीन दल अपनी सीटों को बरकरार रखने के लिए पूरी ताकत झोंक रहा है, जबकि विपक्ष यहाँ सेंध लगाने की कोशिश में है।
छत्तीसगढ़, हरियाणा और तेलंगाना: दो-दो सीटों का समीकरण
मध्य और उत्तर भारत के कुछ राज्यों में भी राज्यसभा की सीटें खाली हो रही हैं। छत्तीसगढ़, हरियाणा और तेलंगाना की 2-2 सीटों के लिए 16 मार्च को मतदान होगा। इन राज्यों में मुकाबला सीधा और स्पष्ट होने की उम्मीद है, क्योंकि यहाँ अक्सर संख्याबल के आधार पर निर्विरोध निर्वाचन की स्थितियां बनती हैं। हालांकि, हरियाणा और तेलंगाना में बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के कारण चुनाव परिणाम अप्रत्याशित भी हो सकते हैं।
हिमाचल प्रदेश: एक सीट के लिए कड़ी मशक्कत
पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश की 1 राज्यसभा सीट के लिए भी इसी दिन चुनाव कराया जाएगा। भले ही यहाँ केवल एक सीट पर मतदान होना है, लेकिन राज्य की वर्तमान विधानसभा की संरचना को देखते हुए यह एक प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गई है। दोनों मुख्य दल इस एकल सीट को जीतने के लिए अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं।
चुनावी प्रक्रिया और महत्वपूर्ण तिथियां
निर्वाचन आयोग के अनुसार, मतदान की प्रक्रिया सुबह 9 बजे से शुरू होकर शाम 4 बजे तक चलेगी, जिसके तुरंत बाद वोटों की गिनती की जाएगी। राज्यसभा चुनाव में विधायक ‘अप्रत्यक्ष निर्वाचन’ पद्धति (Single Transferable Vote) के माध्यम से मतदान करते हैं। सभी राजनीतिक दलों ने अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए व्हिप जारी करना और बैठकें बुलाना शुरू कर दिया है। 16 मार्च का दिन यह तय करेगा कि देश की सर्वोच्च पंचायत में आगामी 6 वर्षों के लिए किन चेहरों को जगह मिलेगी।

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