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Punjab Politics: BJP-SAD गठबंधन की अटकलें तेज, अकाली दल ने महिला आरक्षण और परिसीमन का किया समर्थन

Punjab Politics

Punjab Politics: शिरोमणि अकाली दल ने देश में महिला आरक्षण से जुड़े प्रावधानों को जल्द से जल्द लागू करने की मांग की है। चंडीगढ़ में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई, जिसमें महिला आरक्षण और आगामी परिसीमन से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के बाद पार्टी ने कहा कि राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए अब किसी तरह की अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में बराबर प्रतिनिधित्व मिलना लोकतांत्रिक व्यवस्था को और मजबूत करेगा।

राजनीति में महिलाओं की समान भागीदारी पर जोर

अकाली दल का कहना है कि देश की राजनीति में महिलाओं को उचित और सम्मानजनक प्रतिनिधित्व मिलना जरूरी है। पार्टी ने महिला आरक्षण को केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि समानता और सामाजिक न्याय से जुड़ा विषय बताया। पार्टी नेताओं के मुताबिक, महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से लोकतांत्रिक संस्थाओं में समाज के सभी वर्गों की आवाज को अधिक प्रभावी ढंग से जगह मिल सकेगी। इसलिए महिला आरक्षण के क्रियान्वयन को अब प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

सिख गुरुओं की शिक्षाओं का दिया हवाला

अकाली दल ने अपने रुख के समर्थन में सिख गुरुओं की शिक्षाओं का भी उल्लेख किया। पार्टी नेताओं ने कहा कि सिख गुरुओं ने हमेशा महिलाओं की गरिमा, समानता और अधिकारों का सम्मान करने की बात कही है। इसी वैचारिक आधार को ध्यान में रखते हुए अकाली दल महिला आरक्षण को जल्द लागू करने की मांग कर रहा है। पार्टी का मानना है कि महिलाओं को समान अवसर देना समाज और लोकतंत्र दोनों के हित में है।

SGPC में महिला आरक्षण का उदाहरण

बैठक में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी यानी SGPC की व्यवस्था का भी उदाहरण दिया गया। अकाली दल के अनुसार, SGPC ने अपने सदन में महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान किया है। पार्टी ने सवाल उठाया कि जब धार्मिक और सामाजिक संस्था में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए आरक्षण लागू किया जा सकता है, तो देश की राजनीतिक व्यवस्था में भी महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व क्यों नहीं दिया जा सकता।

परिसीमन को लेकर भी पार्टी ने रखी मांग

महिला आरक्षण के साथ-साथ बैठक में देश में प्रस्तावित परिसीमन को लेकर भी विस्तृत चर्चा हुई। अकाली दल ने कहा कि परिसीमन की पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष, संतुलित और सभी राज्यों के हितों को ध्यान में रखकर की जानी चाहिए। पार्टी का कहना है कि सीटों के पुनर्विन्यास के दौरान किसी राज्य को अनुचित लाभ या नुकसान नहीं होना चाहिए। सभी राज्यों को उनकी परिस्थितियों के अनुसार उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिलना आवश्यक है।

राज्यों के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर

अकाली दल ने परिसीमन के दौरान राज्यों के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत बताई। पार्टी के मुताबिक, केवल जनसंख्या के आधार पर सीटों में बदलाव करने से कुछ राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है। ऐसे में परिसीमन की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिससे किसी भी राज्य को यह महसूस न हो कि उसके साथ भेदभाव हुआ है। पार्टी ने व्यापक सहमति के साथ आगे बढ़ने की बात कही।

50 प्रतिशत सीटें बढ़ाने के प्रस्ताव का समर्थन

अकाली दल ने केंद्र सरकार की ओर से सदन में रखे गए उस प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसमें सभी राज्यों की लोकसभा सीटों में समान रूप से 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी करने की बात कही गई है। पार्टी का मानना है कि यदि सभी राज्यों की सीटें समान अनुपात में बढ़ाई जाती हैं, तो प्रतिनिधित्व बढ़ाने के साथ परिसीमन से जुड़ी कई आशंकाओं को कम किया जा सकता है।

महिला आरक्षण और परिसीमन जल्द पूरा करने की मांग

अकाली दल ने स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण और परिसीमन दोनों प्रक्रियाओं को अब ज्यादा समय तक लंबित नहीं रखा जाना चाहिए। पार्टी के मुताबिक, महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाना लोकतांत्रिक मजबूती के लिए जरूरी है, वहीं परिसीमन में राज्यों के बीच समानता और संतुलन बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। पार्टी चाहती है कि दोनों मुद्दों पर केंद्र सरकार जल्द ठोस कदम उठाए।

प्रतिनिधित्व बढ़ाने पर अकाली दल का फोकस

बैठक से यह संकेत मिला कि अकाली दल महिला राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने और राज्यों के प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता देना चाहता है। पार्टी ने महिला आरक्षण के तत्काल क्रियान्वयन और संतुलित परिसीमन की मांग को दोहराते हुए कहा कि लोकतंत्र में हर वर्ग और क्षेत्र को उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। अब इस मुद्दे पर केंद्र सरकार के अगले कदम पर राजनीतिक दलों की नजर रहेगी।

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