SIPRI Report 2026: वर्तमान समय में वैश्विक स्तर पर विभिन्न देशों के बीच अविश्वास की खाई लगातार गहरी होती जा रही है। जियो-पॉलिटिकल टेंशन (भू-राजनीतिक तनाव) के इस दौर में दुनिया की महाशक्तियां और परमाणु संपन्न देश अपने सैन्य जखीरे को मजबूत करने में जुटे हैं। परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने और निशस्त्रीकरण के लिए दशकों से किए जा रहे अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को अब बड़ा झटका लगता दिख रहा है। शांति और सुरक्षा के तमाम दावों के बीच वैश्विक मंच पर एक बार फिर परमाणु हथियारों की होड़ तेज हो गई है।
सिपरी ईयरबुक 2026: सुरक्षा के लिए परमाणु निर्भरता
रक्षा और वैश्विक सुरक्षा पर पैनी नजर रखने वाली प्रतिष्ठित संस्था ‘स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट’ (SIPRI) ने अपनी ताजा ‘सिपरी ईयरबुक 2026’ जारी कर दी है। इस चौंकाने वाली रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के कई प्रमुख देश अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को चाक-चौबंद करने के लिए एक बार फिर परमाणु हथियारों पर अपनी निर्भरता को बढ़ा रहे हैं। पुरानी संधियों और वादों को दरकिनार कर, देश न केवल नए हथियार बना रहे हैं, बल्कि अपने मौजूदा परमाणु ढांचे को आधुनिक तकनीकों से लैस भी कर रहे हैं।
दक्षिण एशिया में रणनीतिक बदलाव: भारत की बड़ी छलांग
इस रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण और चर्चा में रहने वाला पहलू दक्षिण एशिया के रणनीतिक संतुलन से जुड़ा है। सिपरी के आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने अपनी सैन्य और रणनीतिक क्षमताओं में एक नया मुकाम हासिल कर लिया है। साल 2025 में भारत के पास परमाणु हथियारों (वॉरहेड्स) की संख्या 180 थी, जो साल 2026 में बढ़कर 190 तक पहुंच चुकी है। भारत का यह कदम अपनी संप्रभुता और सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए बेहद परिपक्व और रणनीतिक माना जा रहा है।
भारत ने पाकिस्तान को पीछे छोड़ा: बदली शक्ति संतुलन की तस्वीर
परमाणु क्षमता के मामले में भारत अब अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान से काफी आगे निकल चुका है। जहां भारत ने अपने परमाणु वॉरहेड्स की संख्या में बढ़ोतरी की है, वहीं इस दौरान पाकिस्तान की परमाणु क्षमता में कोई बदलाव नहीं हुआ है और वह 170 वॉरहेड्स पर ही टिकी हुई है। संख्या बल के इस अंतर ने दक्षिण एशिया में शक्ति संतुलन को पूरी तरह बदल दिया है। हालांकि भारत और पाकिस्तान दोनों ही अपने मिसाइल डिलीवरी सिस्टम को आधुनिक बनाने में जुटे हैं, लेकिन भारत अब स्पष्ट बढ़त हासिल कर चुका है।
वैश्विक परमाणु भंडार का सच: गिरावट के आंकड़ों के पीछे का भ्रम
सिपरी की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2026 तक पूरी दुनिया में कुल परमाणु हथियारों की संख्या 12,187 आंकी गई है, जो साल 2025 के 12,241 के मुकाबले थोड़ी कम है। विशेषज्ञों का मानना है कि कुल संख्या में दिख रही यह मामूली गिरावट भ्रामक हो सकती है। असल में, विभिन्न देश अपने पुराने और सेवामुक्त हो चुके परमाणु हथियारों को नष्ट करने की रफ्तार को धीमा कर रहे हैं। इसके विपरीत, नए और अधिक विनाशकारी परमाणु प्रणालियों की तैनाती को तेज किया जा रहा है, जिससे आने वाले समय में यह संख्या फिर बढ़ सकती है।
