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INDIA Alliance Meeting

INDIA Alliance Meeting : देश की राजनीति में विपक्षी एकजुटता को एक बार फिर से धार देने के लिए राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में ‘INDIA’ ब्लॉक की एक बेहद महत्वपूर्ण और रणनीतिक बैठक आयोजित की गई। पूरे दो साल के लंबे अंतराल के बाद आयोजित हुई इस सातवीं बैठक में देश भर के 25 प्रमुख विपक्षी राजनीतिक दलों के दिग्गज नेताओं ने हिस्सा लिया। बैठक में व्यक्तिगत रूप से कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी, लोकसभा सदस्य राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी, सुप्रिया सुले और स्वतंत्र राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल सहित कई बड़े चेहरे मौजूद रहे। वहीं, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस उच्च स्तरीय बैठक में वर्चुअली माध्यम से शामिल हुए।

मल्लिकार्जुन खड़गे ने साधा निशाना

तकरीबन दो घंटे से अधिक समय तक चली इस मैराथन बैठक के बाद कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। खड़गे ने बताया कि बैठक के दौरान विपक्षी दलों के बीच पांच मुख्य राष्ट्रीय मुद्दों पर पूरी तरह से सहमति बनी है। उन्होंने हालिया नीट (NEET) परीक्षा विवाद को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और कहा कि देश के लाखों होनहार युवाओं के भविष्य के साथ घोर धोखा हुआ है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि नीट और सीबीएसई (CBSE) परीक्षाओं में हुई भारी गड़बड़ी, धांधली और पेपर लीक के लिए सीधे तौर पर देश के शिक्षा मंत्री जिम्मेदार हैं, इसलिए उन्हें अपने पद से तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए।

वोटर लिस्ट में धांधली को लेकर सीजेआई को पत्र लिखेगा विपक्ष

कांग्रेस अध्यक्ष ने चुनाव प्रणाली की निष्पक्षता पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि हालिया चुनावों में करोड़ों वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से जानबूझकर काट दिए गए। चुनाव की शुचिता और निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए इंडिया ब्लॉक के नेता देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को एक औपचारिक पत्र लिखकर इस पूरे मामले की जांच की मांग करेंगे। इसके साथ ही विपक्ष ने मांग की है कि देश की गिरती अर्थव्यवस्था, बढ़ती बेरोजगारी और बेकाबू महंगाई जैसे संवेदनशील मुद्दों पर केंद्र सरकार को तुरंत एक सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए। गठबंधन ने यह भी तय किया है कि वे अब हर दो महीने में और आगामी मानसून सत्र के दौरान लगातार बैठकें करेंगे। गठबंधन की अगली बड़ी बैठक आगामी 8 अगस्त को हैदराबाद में आयोजित की जाएगी।

दिल्ली की सड़कों पर राहुल गांधी के खिलाफ लगे विवादित पोस्टर

इस महत्वपूर्ण बैठक के बीच दिल्ली के सियासी गलियारों में उस समय तनाव फैल गया जब सोमवार की सुबह कांग्रेस मुख्यालय के पास अकबर रोड पर कुछ अज्ञात लोगों द्वारा कांग्रेस और राहुल गांधी के खिलाफ विवादित पोस्टर लगा दिए गए। इन पोस्टरों में राहुल गांधी की तस्वीर के साथ कांग्रेस पार्टी की तीखी आलोचना की गई थी। एक पोस्टर में तो एनसीपी (शरद चंद्र पवार) के प्रमुख शरद पवार की तस्वीर के साथ लिखा था कि “राहुल गांधी में निरंतरता (कंसिस्टेंसी) की कमी है।” हालांकि, दोपहर होते-होते यूथ कांग्रेस के आक्रोशित कार्यकर्ता भारी संख्या में मौके पर पहुंचे और उन्होंने इन सभी विवादित और आपत्तिजनक पोस्टरों को उखाड़कर फाड़ दिया।

शरद पवार ने दिया एकजुटता का मंत्र

बैठक के बाद अपनी प्रतिक्रिया देते हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (SCP) के प्रमुख शरद पवार ने कहा कि मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में इंडिया ब्लॉक के सभी सहयोगी दलों को एक साथ और एकजुट रखना सबसे आवश्यक कार्य है। उन्होंने कहा कि आज देश में एक तरफ नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार है, तो दूसरी तरफ वे दल हैं जो इस विचारधारा को स्वीकार नहीं करते। पवार ने भरोसा जताया कि गठबंधन के भीतर चल रहे वैचारिक मतभेदों को सभी वरिष्ठ नेता आपस में मिल-बैठकर बहुत जल्द सुलझा लेंगे। उन्होंने कहा कि चूंकि अगले दो-तीन सालों तक देश में कोई बड़ा चुनाव नहीं है, इसलिए यह समय आपसी संगठन को जमीनी स्तर पर बेहद मजबूत करने के लिए सबसे मुफीद है।

तीन सालों में जेडीयू, आप और डीएमके जैसी बड़ी पार्टियां हुईं अलग

मल्लिकार्जुन खड़गे ने स्वीकार किया कि बीते तीन वर्षों के भीतर कुछ बड़े दल इस गठबंधन से अलग भी हुए हैं, जिनमें 2024 लोकसभा चुनाव के वक्त जेडीयू, दिल्ली-हरियाणा विधानसभा चुनाव के दौरान आम आदमी पार्टी (AAP) और हाल ही में तमिलनाडु चुनाव के बाद डीएमके (DMK) शामिल हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि आज भी 23 से ज्यादा दल पूरी तरह एकजुट हैं। दूसरी तरफ, उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने विपक्षी एकजुटता पर तंज कसते हुए इंडिया ब्लॉक को ‘अवसरवादियों का जमावड़ा’ करार दिया। उन्होंने कहा कि ये सभी दल एक-दूसरे के धुर राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी हैं और इनके बीच की दरारें चुनाव आते ही फिर से उजागर हो जाएंगी।

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