Delhi Bulldozer Action : देश की राजधानी दिल्ली में रविवार सुबह-सुबह एक बहुत बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई देखने को मिली, जब उत्तर-पश्चिम (नॉर्थ वेस्ट) दिल्ली के शालीमार बाग इलाके में प्रशासन का बुलडोजर एक्शन शुरू हो गया। इस इलाके में बड़े पैमाने पर ध्वस्तीकरण (डिमोलिशन) अभियान चलाया जा रहा है। किसी भी तरह के भारी विरोध-प्रदर्शन, हंगामे या अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए शनिवार रात से ही भारी संख्या में पैरामिलिट्री फोर्सेस (अर्धसैनिक बलों) और दिल्ली पुलिस के जवानों को पूरे इलाके में तैनात कर दिया गया था। प्रशासन की इस बड़ी योजना के तहत इलाके में बने करीब 300 रिहायशी घरों को ध्वस्त किया जाना तय हुआ है।
सड़क चौड़ीकरण योजना के तहत कार्रवाई: आउटर रिंग रोड को आजादपुर मंडी से जोड़ने की कवायद
प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, यह पूरी डिमोलिशन ड्राइव शालीमार बाग क्षेत्र में यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने और सड़क को चौड़ा करने के उद्देश्य से की जा रही है। इस प्रभावित क्षेत्र में काफी पुराने और कई मंजिला (बहुमंजिला) पक्के मकान बने हुए हैं, जो सड़क की जद में आ रहे हैं। इस महत्वपूर्ण सड़क परियोजना का मुख्य उद्देश्य संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर को सीधे तौर पर एशिया की सबसे बड़ी फल और सब्जी मंडी, यानी आजादपुर मंडी से जोड़ना है। इस सड़क के चौड़ा होने से आउटर रिंग रोड से आजादपुर की तरफ आने-जाने वाले वाहनों को रोजाना लगने वाले भीषण ट्रैफिक जाम से हमेशा के लिए बड़ी राहत मिल जाएगी।
30 मई तक मकान खाली करने का मिला था अल्टीमेटम: पहले ही जारी हो चुके थे नोटिस
इस ध्वस्तीकरण अभियान को लेकर संबंधित सरकारी विभागों द्वारा स्थानीय मकान मालिकों और निवासियों को बहुत पहले ही कानूनी नोटिस तामील करा दिए गए थे। नोटिस के जरिए सभी प्रभावित परिवारों को अपने-अपने मकान खाली करने के लिए 30 मई तक का अंतिम समय (अल्टीमेटम) दिया गया था। इस समयसीमा के खत्म होने के बाद रविवार सुबह ही प्रशासनिक दस्ता बुलडोजर और जेसीबी मशीनों के साथ मौके पर पहुंच गया। नोटिस की अवधि को देखते हुए कुछ जागरूक नागरिकों ने समय रहते अपने घरों को खुद ही खाली कर दिया था और अपना कीमती सामान हटा लिया था, जबकि कुछ घरों में अभी भी घरेलू सामान अंदर ही मौजूद दिखा।
सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट से भी नहीं मिली कोई राहत: कानूनी लड़ाई हार गए स्थानीय निवासी
अवैध निर्माण और सड़क की जमीन पर बने इन मकानों को बचाने के लिए स्थानीय निवासियों ने लंबी कानूनी लड़ाई भी लड़ी। प्रभावित लोग राहत की उम्मीद में दिल्ली हाई कोर्ट से लेकर देश की सर्वोच्च अदालत, यानी सुप्रीम कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाने गए थे। हालांकि, जनहित और सड़क विकास परियोजना के महत्व को देखते हुए अदालतों ने भी निर्माण हटाने के फैसले पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया और निवासियों को अदालती मोर्चे पर कोई राहत नहीं मिल सकी। इसके बाद प्रशासन के लिए तय समय सीमा समाप्त होते ही कानूनन कार्रवाई का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया।
मौके पर प्रशासनिक अमला मुस्तैद: पैरामिलिट्री फोर्स और दिल्ली पुलिस ने संभाला मोर्चा
कार्रवाई शुरू होते ही प्रभावित क्षेत्र में स्थानीय लोगों और तमाशबीनों की भारी भीड़ जमा हो गई। कानून-व्यवस्था की स्थिति पर बारीकी से नजर रखने के लिए संबंधित जिलों के वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी खुद मौके पर डटे हुए हैं। दरअसल, पैरामिलिट्री फोर्स एक ऐसी प्रशिक्षित सशस्त्र सेना होती है जो सैन्य पद्धति पर काम करती है। दिल्ली जैसे संवेदनशील महानगर में कानून-व्यवस्था की बहाली, उग्र विरोध प्रदर्शनों को दबाने और स्थानीय दिल्ली पुलिस को अतिरिक्त सुरक्षा बैकअप प्रदान करने के लिए ही इन विशेष केंद्रीय बलों को बुलडोजर एक्शन के दौरान तैनात किया गया है।

