TMC Rebellion : पश्चिम बंगाल की राजनीति से इस वक्त की एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के शीर्ष नेतृत्व के प्रति सार्वजनिक रूप से अपनी गहरी निराशा व्यक्त करने वाली लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने बुधवार को पार्टी के सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया है। पिछले कुछ समय से सांसद काकोली घोष दस्तीदार टीएमसी के कई प्रमुख और महत्वपूर्ण कार्यक्रमों से लगातार अनुपस्थित चल रही थीं, जिसके बाद से ही उनके अगले कदम को लेकर कयास लगाए जा रहे थे। उन्होंने खुले तौर पर पार्टी के भीतर चल रहे आंतरिक कामकाज और निर्णय लेने की प्रक्रिया पर गहरा असंतोष व्यक्त किया था। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया है कि वह फिलहाल लोकसभा सांसद के पद पर बनी रहेंगी, लेकिन संगठन में उनकी अब कोई भूमिका नहीं होगी।
इस्तीफे में छलका सांसद का दर्द: अभद्र व्यवहार और नेतृत्व की बेरुखी पर उठाए सवाल
काकोली घोष दस्तीदार ने तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को भेजे अपने आधिकारिक त्यागपत्र में बेहद भावुक और तीखे शब्दों का इस्तेमाल किया है। उन्होंने अपने इस्तीफे में लिखा, “एक बेहद गहन भावनात्मक संघर्ष और लंबे आत्मचिंतन के बाद, मैं यह कड़ा पत्र लिखने के लिए विवश हुई हूं। अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस ने मुझे मेरे लंबे राजनीतिक जीवन के दौरान जनता की सेवा करने का जो सम्मान, जिम्मेदारी और अवसर दिया है, उसके लिए मैं पार्टी की तहे दिल से आभारी हूं। विशेष रूप से, महिला तृणमूल कांग्रेस की चेयरपर्सन के रूप में कार्य करने का अवसर मेरे सार्वजनिक जीवन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय रहा है।
लेकिन आज मुझे बहुत दुख और भारी मन से यह घोषणा करनी पड़ रही है कि मैं अखिल भारतीय तृणमूल महिला कांग्रेस के अध्यक्ष पद समेत पार्टी के अन्य सभी संगठनात्मक पदों, समितियों और जिम्मेदारियों से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे रही हूं।” उन्होंने आगे बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए लिखा कि ऐसे गरिमामयी पद पर बने रहना बिल्कुल भी उचित नहीं है जहां एक महिला सांसद होने के बावजूद वह किसी अन्य अशिक्षित और असभ्य पार्टी सांसद के अभद्र व्यवहार को न तो रोक पा रही हैं और न ही इस विषय पर उन्हें पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व का कोई सहयोग या सहानुभूति मिल रही है।
भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनियमितताओं पर खोला मोर्चा: अंतरात्मा की आवाज का दिया हवाला
अपने इस्तीफे में केवल आंतरिक कलह ही नहीं, बल्कि काकोली घोष दस्तीदार ने राज्य सरकार और पार्टी पर लगे भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों को लेकर भी अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने लिखा कि पिछले एक दशक में पश्चिम बंगाल और तृणमूल कांग्रेस से जुड़े कई गंभीर आरोप और अप्रिय घटनाएं लगातार सामने आई हैं, जिससे आज उनकी अंतरात्मा अत्यंत विचलित और व्यथित है। उन्होंने राज्य में हुए बहुचर्चित राशन भ्रष्टाचार और शिक्षक भर्ती घोटाले का सीधा जिक्र करते हुए कहा कि इन वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं ने राज्य की आम जनता के मन में सरकार के प्रति गहरा आक्रोश और भारी अविश्वास पैदा कर दिया है।
आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना और आई-पैक के बढ़ते प्रभाव पर जताई गहरी चिंता
सांसद दस्तीदार ने कोलकाता के आर. जी. कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक पीजीटी महिला डॉक्टर की दुखद मृत्यु और उसके बाद पैदा हुए हालातों का भी विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस संवेदनशील घटना को दबाने और साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ के संभावित आरोपों ने पूरे सभ्य समाज को गहरी पीड़ा पहुंचाई है और स्तब्ध कर दिया है। उन्होंने इन तमाम घटनाओं के नैतिक प्रभाव को व्यक्तिगत स्तर पर गहराई से महसूस किया है।
इसके अतिरिक्त, उन्होंने पार्टी की चुनावी रणनीति संभालने वाली एजेंसी आई-पैक (I-PAC) पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आई-पैक से जुड़े विभिन्न व्यक्तियों और बाहरी समूहों द्वारा संगठन में हस्तक्षेप के जो चिंताजनक आरोप लग रहे हैं, उससे वह बेहद व्याकुल हैं। उनका मानना है कि यदि स्वस्थ लोकतांत्रिक राजनीतिक संस्कृति के स्थान पर कोई अपारदर्शी और अलोकतांत्रिक बाहरी प्रभाव धीरे-धीरे राजनीतिक संगठन पर हावी होने लगेगा, तो यह पार्टी की मूल विचारधारा और उसकी गौरवशाली परंपरा के हित में कभी नहीं हो सकता।
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