Headline
US Iran Conflict
US Iran Conflict : अमेरिका और ईरान में छिड़ा महायुद्ध, ईरानी विदेश मंत्री ने दी फारस की खाड़ी छोड़ने की खुली चेतावनी
PM Modi Record
PM Modi Record : लंबे समय तक निर्वाचित पीएम रहने का रिकॉर्ड, एनडीए बैठक में मोदी का अभिनंदन
Raw Garlic Benefits
Raw Garlic Benefits : खाली पेट कच्चा लहसुन खाने से इम्यूनिटी, दिल और पाचन को मिल सकते हैं कई स्वास्थ्य लाभ
Ekadashi Vrat Story
Ekadashi Vrat Story : आखिर क्यों रखा जाता है एकादशी का व्रत? जानें देवी एकादशी के जन्म की कहानी
NEET Re-exam Result
NEET Re-exam Result: एनटीए मुख्यालय पहुंचे शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, नीट परीक्षा और रिजल्ट पर दिया बड़ा अपडेट
PM Ujjwala Yojana
PM Ujjwala Yojana: उज्ज्वला योजना के नियमों में बड़ा बदलाव, अब साल में मिलेंगे केवल 4 सब्सिडी वाले सिलेंडर
PoK Violence
PoK Violence : PoK में निर्दोष नागरिकों पर गोलीबारी से भड़का भारत, अंतरराष्ट्रीय समुदाय से की कार्रवाई की मांग
India slams Pakistan in UNSC
India slams Pakistan in UNSC : UNSC में भारत ने पाकिस्तान को लताड़ा, अफगानिस्तान पर हवाई हमलों की कड़ी निंदा
Love Jihad UP Law
Love Jihad UP Law : लखनऊ में सीएम योगी का अब तक का सबसे बड़ा बयान, आक्रांताओं को दी खुली चेतावनी!

Assam UCC Bill : असम में यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल पास, ऐसा करने वाला बना देश का तीसरा राज्य

Assam UCC Bill

Assam UCC Bill : असम की राजनीति और देश के कानूनी इतिहास में एक बेहद बड़ा और दूरगामी फैसला सामने आया है। असम विधानसभा ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए ‘यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) असम बिल 2026’ को पूर्ण बहुमत से पारित कर दिया है। इस नए कानून के पारित होने के साथ ही असम पूरे पूर्वोत्तर (नॉर्थ-ईस्ट) भारत का ऐसा पहला राज्य बन गया है, जिसने समान नागरिक संहिता को लागू करने का साहस दिखाया है। इसके साथ ही, राष्ट्रीय स्तर पर असम अब देश का तीसरा ऐसा राज्य बन गया है जहां यह कानून प्रभावी होगा। इस कानून के लागू होने के बाद राज्य में रहने वाले सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, बच्चा गोद लेना, उत्तराधिकार, संपत्ति का बंटवारा और पारिवारिक विवादों से जुड़े तमाम कानूनी नियम पूरी तरह से एक समान हो जाएंगे।

अलग पर्सनल लॉ का खात्मा: अब सभी धर्मों के लिए होगी एक ही कानूनी व्यवस्था

असम में इस ऐतिहासिक कानून के अस्तित्व में आने के बाद अब विभिन्न धर्मों, जातियों और समुदायों के लिए सदियों से चले आ रहे अलग-अलग पर्सनल लॉ (व्यक्तिगत कानून) का प्रभाव पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। उनकी जगह पर अब राज्य के प्रत्येक नागरिक पर एक ही धर्मनिरपेक्ष और समान कानून लागू होगा। असम सरकार का इस बिल को लेकर स्पष्ट तर्क है कि इस कानून का प्राथमिक उद्देश्य समाज के सभी वर्गों, विशेषकर महिलाओं और वंचितों को समान अधिकार प्रदान करना है। इसके साथ ही, अलग-अलग पर्सनल लॉ के कारण पैदा होने वाली विसंगतियों को दूर कर पूरी कानूनी व्यवस्था को बेहद सरल, सुगम और पारदर्शी बनाना है।

कानून को लेकर राजनीतिक घमासान: विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने जताई चिंता

जहां एक तरफ सत्ता पक्ष इस कानून को समाज सुधार की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ राज्य के मुख्य विपक्षी दलों और कई सामाजिक-धार्मिक संगठनों ने इस पर गहरी चिंता व्यक्त की है। विपक्ष का आरोप है कि इस कानून को लागू करने में जल्दबाजी दिखाई गई है और इससे असम की विविध धार्मिक, जनजातीय और सांस्कृतिक परंपराओं पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। हालांकि, सरकार ने आश्वस्त किया है कि किसी भी समुदाय की अनूठी संस्कृति को ठेस नहीं पहुंचाई जाएगी। आपको बता दें कि असम से पहले देश में केवल उत्तराखंड और गोवा ही ऐसे राज्य थे जहां यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू था, और अब असम भी इस विशिष्ट सूची में शामिल हो गया है।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का बयान: इसे बताया राज्य के लिए ऐतिहासिक क्षण

बिल के सफलतापूर्वक पास होने के बाद असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने राज्य की जनता को बधाई दी और इसे असम के इतिहास का एक स्वर्णिम एवं ऐतिहासिक क्षण करार दिया। मुख्यमंत्री सरमा ने सोशल मीडिया और विधानसभा में दिए अपने बयान में कहा कि यह कानून राज्य में सामाजिक समानता, लैंगिक न्याय और मानवीय गरिमा को सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया सबसे बड़ा और निर्णायक कदम है। उन्होंने आगे कहा कि यह ऐतिहासिक फैसला भारत के महान राष्ट्र-निर्माताओं, दूरदर्शी संस्थापकों और संविधान निर्माताओं की मूल सोच तथा उनकी पवित्र इच्छा को धरातल पर उतारने और आगे बढ़ाने जैसा है।

तीन मुख्य संकल्पों को पूरा करता है यह कानून: चुनावी वादा हुआ सच

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस कानून के महत्व को रेखांकित करते हुए स्पष्ट किया कि यह ऐतिहासिक फैसला मुख्य रूप से तीन बेहद महत्वपूर्ण संकल्पों और आदर्शों को एक साथ पूरा करता है। पहला, यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 (आर्टिकल 44) में निहित राज्य के नीति निर्देशक तत्वों की मूल भावना और आदर्शों का सम्मान करता है। दूसरा, यह भारतीय जनता पार्टी (BJP) के स्थापना काल से चले आ रहे वैचारिक सिद्धांतों को पूरा करता है। और तीसरा, यह बीजेपी असम द्वारा राज्य की जनता से किए गए प्रमुख चुनावी वादे की ससमय पूर्ति है। मुख्यमंत्री ने दृढ़ता से कहा कि सरकार ने जो वादा असम की जनता से किया था, उसे आज पूरी ईमानदारी के साथ निभा दिया गया है।

Read more  :  TMC Rebellion : टीएमसी में बगावत तेज, काकोली घोष दस्तीदार सहित दो पार्षदों ने दिया इस्तीफा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top
स्किन ऑयली है? कलाई पर उंगली रखकर पहचानें हार्ट रिदम की समस्या सेहत के लिए कितना फायदेमंद है दलिया? नींबू पानी में भूलकर भी न डालें ये चीज क्या डायबिटीज में रोज जामुन खाना सही है?