Petrol Diesel Price : मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की वैश्विक कमी का सीधा असर अब भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर दिखने लगा है। देश में तेल विपणन कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी कर दी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के कारण घरेलू स्तर पर ईंधन के दाम बढ़ाना कंपनियों की मजबूरी बन गया था। इस नए फैसले के बाद आम जनता पर महंगाई का बोझ और अधिक बढ़ गया है, जिससे रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ने की आशंका गहरा गई है।
मात्र दस दिनों के भीतर तीसरी बार बढ़े पेट्रोल और डीजल के दाम
उपभोक्ताओं के लिए सबसे चिंताजनक बात यह है कि बीते 10 दिनों के भीतर ईंधन की कीमतों में यह तीसरी बड़ी बढ़ोतरी है। तेल कंपनियों ने लगातार बढ़ रहे घाटे को कम करने के लिए यह कदम उठाया है। नए संशोधन के तहत इस बार पेट्रोल की कीमत में 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल की कीमत में 91 पैसे प्रति लीटर का इजाफा किया गया है। ईंधन की ये बढ़ी हुई दरें आज सुबह 6 बजे से पूरे देश में प्रभावी रूप से लागू कर दी गई हैं।
देश की राजधानी दिल्ली में ईंधन की नई कीमतें और मई का आंकड़ा
इस ताजा बढ़ोतरी के बाद देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल और डीजल के दाम अब तक के बेहद संवेदनशील स्तर पर पहुंच गए हैं। दिल्ली में अब एक लीटर पेट्रोल की कीमत 99.51 रुपये हो गई है, जबकि डीजल 92.49 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है। अगर मई महीने के आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले कुछ ही दिनों में पेट्रोल और डीजल कुल मिलाकर लगभग ₹5 प्रति लीटर तक महंगे हो चुके हैं। मई में इसकी शुरुआत 15-16 मई को हुई थी, जब 4 साल के लंबे अंतराल के बाद दोनों ईंधनों में ₹3-₹3 प्रति लीटर की एकमुश्त भारी बढ़ोतरी की गई थी। इसके बाद 19 मई को भी कीमतें बढ़ाई गईं और आज तीसरी बार दाम बढ़ गए।
माल ढुलाई महंगी होने से आम आदमी पर बढ़ेगा चौतरफा महंगाई का बोझ
पेट्रोल और खासकर डीजल की कीमतों में लगातार हो रही इस बढ़ोतरी का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर पड़ेगा। डीजल के दाम बढ़ने से माल ढुलाई (ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट) महंगी हो जाती है। जब माल ढुलाई का खर्च बढ़ता है, तो मंडियों और बाजारों तक पहुंचने वाली हरी सब्जियां, फल, दूध, राशन और अन्य जरूरी घरेलू सामानों की कीमतों में भी स्वतः ही तेजी आ जाती है। जानकारों का मानना है कि इस बढ़ोतरी से खुदरा महंगाई दर में और इजाफा हो सकता है।
ईंधन संकट के बीच पीएम मोदी की अपील और नेताओं के काफिलों में कटौती
देश में तेल और गैस की किल्लत की खबरों के बीच पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से ईंधन बचाने की विशेष अपील की थी। पीएम की इस मुहिम का असर यह हुआ कि विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों, मंत्रियों और शीर्ष नेताओं ने अपने सरकारी काफिलों की गाड़ियों की संख्या को सीमित कर दिया। खुद प्रधानमंत्री मोदी ने भी अपने काफिले को छोटा कर जनता को ईंधन संरक्षण का एक बड़ा संदेश देने का प्रयास किया, ताकि देश के संसाधनों को सुरक्षित रखा जा सके।
पेट्रोल पंपों पर उमड़ी भारी भीड़ और पेट्रोलियम मंत्रालय की अहम सफाई
दाम बढ़ने और तेल की कमी की अफवाहों के चलते देश के कई हिस्सों में पेट्रोल पंपों पर अचानक वाहनों की भारी भीड़ देखी गई। कुछ इलाकों से ईंधन खत्म होने की खबरें भी आईं, जिससे जनता में घबराहट फैल गई। हालांकि, स्थिति को संभालते हुए केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर जनता को आश्वस्त किया। मंत्रालय ने साफ कहा कि देश में ईंधन का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और किसी भी तरह की कमी नहीं है। सरकार ने नागरिकों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।
अमेरिका-ईरान तनाव और भारत द्वारा सस्ते कच्चे तेल की खरीद से उम्मीदें
वैश्विक स्तर पर इस संकट की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता हुआ राजनयिक और सैन्य तनाव है, जिसने दुनिया भर की तेल सप्लाई चेन को बाधित कर दिया है। लेकिन इस बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर भी सामने आई है। भारत ने मई महीने के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार से रणनीतिक तौर पर सस्ते कच्चे तेल की खरीद को काफी बढ़ा दिया है। आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भारत इसी तरह लगातार सस्ता कच्चा तेल आयात करने में सफल रहता है, तो आने वाले समय में घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर बना दबाव कम होगा और कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। हालांकि, मौजूदा अनिश्चितताओं को देखते हुए अभी अंतिम रूप से कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।
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