Dumaria Electrification : झारखंड के जमशेदपुर जिले से ग्रामीण विकास की एक बेहद सुखद और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। पोटका विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सुदूरवर्ती डुमरिया प्रखंड के उन गांवों में पहली बार बिजली पहुंचाने की दिशा में एक बड़ा और ठोस कदम उठाया गया है, जो दशकों से बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे थे। खैरबनी गांव के बानागोड़ा टोला और पलाशबनी पंचायत के बाकड़ाकोचा गांव के राहड़गोड़ा टोला में इस बहुप्रतीक्षित विद्युतीकरण कार्य का आधिकारिक शिलान्यास किया गया। स्थानीय विधायक संजीव सरदार ने पूरी विधि-विधान से पूजा-अर्चना और नारियल फोड़कर इस विकास कार्य की आधारशिला रखी, जिससे क्षेत्र के लोगों का वर्षों पुराना सपना सच होने जा रहा है।
मुख्यमंत्री उज्ज्वल झारखंड योजना का असर
ग्रामीण और आदिवासी बहुल सुदूरवर्ती इलाकों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए झारखंड सरकार द्वारा चलाई जा रही ‘मुख्यमंत्री उज्ज्वल झारखंड योजना’ और ‘एमयूजेआई’ इस ऐतिहासिक बदलाव का मुख्य जरिया बनी हैं। इसी कल्याणकारी सरकारी योजना के अंतर्गत अब इन उपेक्षित और अंधेरे में डूबे गांवों में बिजली के नए खंभे खड़े किए जाएंगे, हाई-वोल्टेज और एलटी तार बिछाए जाएंगे और बिजली की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक क्षमता के नए बिजली ट्रांसफॉर्मर भी स्थापित किए जाएंगे। इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य के उन अंतिम गांवों तक प्रकाश फैलाना है, जहां भौगोलिक विषमताओं के कारण अब तक सरकारी तंत्र की पहुंच सुस्त थी।
आजादी के 80 साल बाद खत्म होगा अंधेरा
स्थानीय प्रशासनिक सूत्रों और ग्रामीणों के मुताबिक, देश की आजादी के लगभग 80 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद इन गांवों में पहली बार बिजली के दर्शन होंगे। इस अभूतपूर्व विकास कार्य को अपनी आंखों के सामने शुरू होते देख स्थानीय ग्रामीणों और विशेषकर आदिवासी परिवारों में भारी उत्साह और जश्न का माहौल देखा गया। शिलान्यास कार्यक्रम के दौरान पूरे गांव ने ढोल-नगाड़ों और गाजे-बाजे के साथ अपनी पारंपरिक रीति-रिवाज के अनुसार विधायक संजीव सरदार का भव्य और आत्मीय स्वागत किया। ग्रामीणों ने भावुक होते हुए कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनके जीते-जी गांव में विकास का यह उजाला पहुंच पाएगा।
जनप्रतिनिधियों की उदासीनता का अंत
शिलान्यास समारोह के दौरान अपनी बात रखते हुए ग्रामीणों ने पुरानी सरकारों और जनप्रतिनिधियों के प्रति अपना दर्द भी बयां किया। उन्होंने कहा कि बीते दशकों में कई नेता और जनप्रतिनिधि चुनाव के समय वोट मांगने आए और बड़े-बड़े वादे करके चले गए, लेकिन चुनाव जीतने के बाद किसी ने भी इन सुदूरवर्ती और दुर्गम गांवों की बुनियादी समस्याओं की ओर मुड़कर नहीं देखा। आज भी ये गांव पक्की सड़क, स्वच्छ पेयजल और बिजली जैसी मूलभूत आवश्यकताओं से कोसों दूर थे। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और विधायक संजीव सरदार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बिजली आ जाने से अब उनके बच्चों की पढ़ाई रात के समय प्रभावित नहीं होगी और पूरे गांव का जीवन आसान हो जाएगा।
विधायक संजीव सरदार का बड़ा भरोसा
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और विधायक संजीव सरदार ने इस अवसर पर न केवल शिलान्यास किया, बल्कि गांव के चौपाल पर बैठकर स्थानीय ग्रामीणों की अन्य समस्याओं को भी बेहद गंभीरता से सुना। उन्होंने मौके पर उपस्थित ग्रामीणों को पूरी तरह आश्वस्त किया कि क्षेत्र के किसी भी छोटे या बड़े गांव को विकास की दौड़ में पीछे नहीं रहने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के कुशल नेतृत्व में ‘अबुआ सरकार’ (हमारी सरकार) राज्य के आदिवासी और ग्रामीण अंचलों के समग्र उत्थान के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ दिन-रात कार्य कर रही है।
गुणवत्तापूर्ण कार्य के सख्त निर्देश
विधायक ने कार्यक्रम में मौजूद विद्युत विभाग और संबंधित निर्माण एजेंसी के अधिकारियों को सख्त लहजे में निर्देश दिया कि पूरे विद्युतीकरण कार्य में सामग्री की गुणवत्ता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि इस परियोजना को एक निश्चित समय सीमा के भीतर पूरी पारदर्शिता के साथ मुकम्मल किया जाए ताकि ग्रामीणों को जल्द से जल्द बिजली की इस बेहतरीन सुविधा का सीधा लाभ मिल सके। विधायक ने जोर देकर कहा कि जब सुदूर गांवों को बिजली और सड़क मिलेगी, तभी सही मायने में आदिवासियों और किसानों के जीवन स्तर में एक बड़ा और सकारात्मक सुधार देखा जा सकेगा।
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