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Dhar Bhojshala : भोजशाला में 721 साल बाद नहीं होगी जुमे की नमाज, सुरक्षा के कड़े इंतजाम

Dhar Bhojshala

Dhar Bhojshala : मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक और विवादित भोजशाला परिसर में आज सुबह से ही हिंदू श्रद्धालुओं द्वारा पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जा रही है। हाई कोर्ट के एक ऐतिहासिक आदेश के बाद आज यह पहला ऐसा शुक्रवार है, जब परिसर के भीतर जुमे की नमाज अदा नहीं की जाएगी। इतिहास के पन्नों को पलटें तो लगभग 721 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद यह पहला मौका है जब शुक्रवार के दिन भोजशाला में नमाज का आयोजन नहीं हो रहा है। विशेष अवसर को देखते हुए आज यहां माता वाग्देवी की एक भव्य महाआरती का भी आयोजन किया जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। इस बदलाव को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े और अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं।

हाई कोर्ट के फैसले के बाद हिंदू श्रद्धालुओं ने भोजशाला परिसर में शुरू की विशेष प्रार्थनाएं

माननीय उच्च न्यायालय के इस बड़े फैसले के बाद से ही भोजशाला परिसर के भीतर और बाहर का माहौल पूरी तरह से बदल गया है। इस पूरे आयोजन को लेकर भोज उत्सव समिति के महासचिव सुमित चौधरी ने मीडिया को महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अदालत के इस नए आदेश के लागू होने से पहले तक मुस्लिम समुदाय के लोग हर शुक्रवार को दोपहर 1:00 बजे से लेकर 3:00 बजे के बीच यहां आकर जुमे की नमाज अदा किया करते थे। लेकिन हाई कोर्ट के इस निर्णय के बाद आज पहला शुक्रवार है जब हिंदू समुदाय के श्रद्धालु बिना किसी समय की पाबंदी के पूरे दिन यहां रुककर प्रार्थना और धार्मिक अनुष्ठान कर रहे हैं।

एएसआई का दशकों पुराना व्यवस्था संबंधी आदेश निरस्त, परिसर से हटाए गए नोटिस बोर्ड्स

हाई कोर्ट की इंदौर पीठ ने अपने इस युगांतकारी फैसले के साथ ही भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के दशकों पुराने उस आदेश को पूरी तरह से निरस्त कर दिया है जिसके तहत यहां दोनों समुदायों के लिए अलग-अलग नियम बनाए गए थे। अदालत के रुख को देखते हुए एएसआई प्रशासन ने भोजशाला परिसर में लगे उन सभी पुराने नोटिस बोर्ड्स को भी तत्काल प्रभाव से हटा दिया है, जिन पर हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लिए पूजा और नमाज की अलग-अलग टाइमिंग और दिन लिखे हुए थे। किसी भी अप्रिय स्थिति या सांप्रदायिक तनाव को तुरंत रोकने के लिए और मौके पर हालात को पूरी तरह संभालने के लिए भारी संख्या में सुरक्षा बल मुस्तैद हैं।

15 मई के ऐतिहासिक अदालती फैसले ने बदल दी धार भोजशाला की सदियों पुरानी रवायत

गौरतलब है कि बीते 15 मई को हाई कोर्ट की इंदौर पीठ ने एक अहम सुनवाई के बाद अपना यह बड़ा फैसला सुनाया था। अदालत ने एएसआई के उस पुराने आदेश को खारिज कर दिया जिसके तहत हिंदुओं को केवल मंगलवार के दिन पूजा करने की अनुमति थी और मुस्लिम समाज को शुक्रवार को नमाज की इजाजत दी गई थी। कोर्ट के इस आदेश के बाद से हिंदू संगठनों में भारी उत्साह है और वे आज सुबह से ही भोजशाला के भीतर डटे हुए हैं। आज के दिन को यादगार बनाने के लिए भोजशाला परिसर के मुख्य भाग में ज्ञान की देवी मां वाग्देवी की भव्य और ऐतिहासिक महाआरती का आयोजन किया जा रहा है।

आसमान से ड्रोन की नजर और जमीन पर 9 लेयर सिक्योरिटी के साथ शहर छावनी में तब्दील

शुक्रवार के दिन किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने की आशंका को देखते हुए धार जिला प्रशासन ने सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए हैं। शहर में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल ने एक दिन पहले ही संवेदनशील इलाकों में फ्लैग मार्च निकाला था। पूरे भोजशाला क्षेत्र और धार शहर को 9 लेयर की अभेद्य सुरक्षा व्यवस्था में तब्दील कर दिया गया है। जमीन पर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवान मुस्तैद हैं, वहीं हवा में उड़ रहे आधुनिक ड्रोन कैमरों से चप्पे-चप्पे की निगरानी की जा रही है। सुरक्षा का नियंत्रण सीधे मुख्य कंट्रोल रूम से किया जा रहा है और प्रशासन ने साफ कर दिया है कि कोर्ट के आदेश का सख्ती से पालन कराया जाएगा।

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