NEET Paper Leak : देश की सबसे बड़ी चिकित्सा प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी (NEET-UG) 2026 के पेपर लीक मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो () की तफ्तीश जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, महाराष्ट्र का लातूर कनेक्शन और गहराता जा रहा है। जांच एजेंसी ने एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए पूछताछ के दायरे में आए लातूर के प्रख्यात बाल रोग विशेषज्ञ (पीडियाट्रिशियन) डॉक्टर मनोज शिरुरे को पुणे से आधिकारिक तौर पर गिरफ्तार कर लिया है।
इस गिरफ्तारी से ठीक एक दिन पहले सीबीआई की एक विशेष टीम ने लातूर स्थित डॉक्टर शिरुरे के निजी अस्पताल में छापा मारा था और उनसे करीब तीन घंटे तक गहन पूछताछ की थी। इस हाई-प्रोफाइल मामले में लातूर से अब तक सेवानिवृत्त प्रोफेसर पी. वी. कुलकर्णी, आरसीसी () कोचिंग क्लासेस के संचालक शिवराज मोटेगांवकर और अब डॉक्टर मनोज शिरुरे की गिरफ्तारी के बाद हड़कंप मच गया है।
बेटे के लिए प्रश्न पत्र खरीदने का संगीन आरोप
सीबीआई सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, डॉक्टर मनोज शिरुरे पर अपने बेटे को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए इस प्रतिष्ठित परीक्षा का लीक प्रश्न पत्र खरीदने का बेहद गंभीर और संगीन आरोप है। जांचकर्ताओं का दावा है कि शिरुरे के बेटे ने इस साल मेडिकल प्रवेश परीक्षा दी थी और उसे अच्छे अंक दिलाने के लिए डॉक्टर ने कथित तौर पर भारी रकम देकर पेपर हासिल किया था। बुधवार रात को हिरासत में लेने के बाद एजेंसी उन्हें तुरंत पुणे ले गई।
तकनीकी और कड़ियों की जांच में यह बात सामने आई है कि डॉक्टर शिरुरे कथित तौर पर रसायन विज्ञान (केमिस्ट्री) के सेवानिवृत्त प्रोफेसर पी.वी. कुलकर्णी और आरसीसी क्लासेस के संस्थापक शिवराज मोटेगांवकर के लगातार संपर्क में थे। दिलचस्प बात यह है कि डॉक्टर के बेटे ने आरसीसी क्लासेस के बजाय किसी अन्य कोचिंग संस्थान से पढ़ाई की थी, फिर भी वे इस सिंडिकेट से जुड़े हुए थे।
रसायन विज्ञान के प्रोफेसर तक थी पेपर की पहुंच
इस पूरे रैकेट का सबसे चौंकाने वाला पहलू परीक्षा की गोपनीयता और प्रश्न पत्रों के चयन प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। जांचकर्ताओं का मानना है कि अंतिम प्रश्न पत्र तय होने से पहले तैयार किए गए रसायन विज्ञान के कई गोपनीय प्रश्न पत्र सेटों तक सेवानिवृत्त प्रोफेसर पी.वी. कुलकर्णी की सीधी पहुंच थी। सीबीआई के दावों के मुताबिक, नीट-यूजी 2026 के अंतिम प्रश्न पत्र के रसायन विज्ञान खंड (केमिस्ट्री सेक्शन) में पूछे गए कुल 45 प्रश्नों में से रिकॉर्ड 43 प्रश्न कथित तौर पर आरसीसी कोचिंग के “गेस पेपर” (अनुमानित प्रश्न पत्र) से हूबहू मेल खाते थे। यह गेस पेपर परीक्षा से पहले ही कुछ खास छात्रों के बीच बांट दिया गया था, जो सीधे तौर पर एक सुनियोजित और बड़े पैमाने पर किए गए पेपर लीक की ओर इशारा करता है।
बिचौलियों और परिवारों का संगठित नेटवर्क
सीबीआई के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, लातूर से संचालित हो रहा यह कथित पेपर लीक नेटवर्क एक बेहद संगठित और शातिर शृंखला (चेन) के माध्यम से काम कर रहा था। इस पूरे खेल को अंजाम देने के लिए बकायदा तीन स्तरों पर काम किया जाता था। सबसे पहले मुख्य सरगनाओं द्वारा परीक्षा से जुड़े गोपनीय प्रिंटिंग प्रेस या सेटर्स के माध्यम से प्रश्न पत्र के सेट तक अवैध पहुंच बनाई जाती थी। इसके बाद दूसरे चरण में सक्रिय बिचौलियों (एजेंटों) के माध्यम से इन पेपर्स को देश के अलग-अलग हिस्सों में स्थित कोचिंग संचालकों तक पहुंचाया जाता था। अंतिम चरण में, परीक्षा से ठीक कुछ घंटे पहले मोटी रकम का सौदा करके चुने हुए उम्मीदवारों और उनके रसूखदार परिवारों तक इन्हें लीक कर दिया जाता था, जिसका शिकार अब डॉक्टर शिरुरे का परिवार भी हुआ है।
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