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Cockroach Janta Party : ‘कॉकरोच’ बुलाने पर भड़के युवा, अब सरकार के खिलाफ शुरू हुई बड़ी कानूनी जंग

Cockroach Janta Party

Cockroach Janta Party: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पिछले कुछ समय से जमकर सुर्खियां बटोरने वाली वर्चुअल “कॉकरोच जनता पार्टी” अब एक नए और बेहद पेचीदा कानूनी विवाद में फंस गई है। शुरुआत में इस अनूठे नाम से कई पैरोडी और मीम सोशल मीडिया अकाउंट्स बनाए गए थे, जिसके बाद इन हैंडल्स के ब्लॉक और रीस्टोर होने को लेकर इंटरनेट पर लंबी बहस चली थी। लेकिन अब यह पूरा मामला केवल सोशल मीडिया वॉर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सीधे भारत के ट्रेडमार्क दफ्तर तक पहुंच गया है। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस वायरल नाम पर अपना एकाधिकार जमाने के लिए दो अलग-अलग व्यक्तियों ने आधिकारिक तौर पर ट्रेडमार्क आवेदन दाखिल कर दिए हैं, जिससे इस मजाकिया नाम को लेकर कानूनी दांवपेंच शुरू हो गए हैं।

पेटेंट और ट्रेडमार्क वेबसाइट पर खुलासा: क्लास 45 के तहत दो दावेदारों ने ठोंका दावा

भारत सरकार के ‘कंट्रोलर जनरल ऑफ पेटेंट्स, डिजाइन्स एंड ट्रेड मार्क्स’ की आधिकारिक वेबसाइट से मिली जानकारी के अनुसार, “कॉकरोच जनता पार्टी” नाम के मालिकाना हक के लिए दो अलग-अलग आवेदन प्राप्त हुए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि ये दोनों ही आवेदन कानूनी और सामाजिक सेवाओं से जुड़ी श्रेणी यानी ‘क्लास 45’ () के तहत दायर किए गए हैं। प्रशासनिक रिकॉर्ड के मुताबिक, इन दोनों आवेदनों ने अपनी शुरुआती कागजी और तकनीकी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पार कर लिया है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब यह मामला पूरी तरह से कानूनी रूप ले चुका है और दोनों ही पक्ष इस नाम को अपने नाम पर रजिस्टर्ड कराने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं।

आवेदन नंबरों के साथ सामने आए नाम: अज़ीम अदमभाई और अखंड स्वरूप के बीच सीधा मुकाबला

इस अजीबोगरीब ट्रेडमार्क विवाद में शामिल दोनों आवेदकों और उनके आवेदन नंबरों का पूरा विवरण भी अब सार्वजनिक हो चुका है। वेबसाइट के अनुसार, पहला आवेदन अज़ीम अदमभाई जम नामक व्यक्ति द्वारा “COCKROACH JANTA PARTY” नाम को सुरक्षित करने के लिए दाखिल किया गया है, जिसका आधिकारिक एप्लीकेशन नंबर 7737937 है। वहीं, इस नाम पर अपना दावा ठोंकने वाले दूसरे आवेदक अखंड स्वरूप हैं, जिन्होंने “Cockroach Janta Party” नाम से अपना आवेदन प्रस्तुत किया है और उनका एप्लीकेशन नंबर 7741481 दर्ज किया गया है। इन दोनों आवेदनों के सामने आने के बाद इंटरनेट स्पेस में इस नाम के असली मालिक को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

बोस्टन यूनिवर्सिटी के छात्र का था आइडिया: ‘आलसी और बेरोजगारों की आवाज’ बनी थी यह पार्टी

इस पूरे विवाद के बीच सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि इस अनोखे नाम को मूल रूप से बोस्टन यूनिवर्सिटी के एक छात्र और पॉलिटिकल कम्युनिकेशन स्ट्रैटेजिस्ट अभिजीत दिपके ने तैयार किया था। अभिजीत दिपके का कहना है कि उन्होंने इस नाम की शुरुआत केवल एक साधारण मजाक, राजनीतिक व्यंग्य और मीम के तौर पर की थी। उन्हें इस बात का बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि यह इंटरनेट पर इस कदर वायरल हो जाएगा। यह काल्पनिक पार्टी खुद को मजाकिया लहजे में “वॉइस ऑफ द लेजी एंड अनएम्प्लॉयड” यानी “आलसी और बेरोजगारों की आवाज” के रूप में प्रचारित करती थी, जिससे सोशल मीडिया के युवा यूजर्स ने इसे हाथों-हाथ लिया और बड़े पैमाने पर प्रमोट किया।

डिजिटल कब्जे की नई लड़ाई: मीम ब्रांडिंग के भविष्य पर खड़े हुए कई बड़े सवाल

Social media पर राजनीतिक मीम्स और चुटकुलों के जरिए तेजी से वायरल होने के बाद, कई अन्य यूजर्स ने भी इस नाम का फायदा उठाते हुए अलग-अलग पेज और ग्रुप्स बना लिए थे। अब इस नाम पर ट्रेडमार्क की जंग छिड़ने के बाद टेक और कानूनी विशेषज्ञ इसे “मीम ब्रांडिंग” और “डिजिटल कब्जे” की एक नई और अनोखी लड़ाई के रूप में देख रहे हैं। इंटरनेट यूजर्स के बीच अब यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि क्या महज मजाक में बनाए गए किसी वायरल मीम या नाम पर कोई व्यक्ति कानूनी रूप से अपना व्यक्तिगत मालिकाना हक जता सकता है? अगर इनमें से किसी भी एक पक्ष को इस नाम का लीगल ट्रेडमार्क मिल जाता है, तो भविष्य में इसके इस्तेमाल और कॉपीराइट को लेकर कड़े कानूनी नियम तय हो जाएंगे।

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