Headline
PM Modi Letter
PM Modi Letter: 2029 के रण में ‘नारी शक्ति’ बनेगी गेमचेंजर, महिला आरक्षण पर पीएम मोदी का ऐतिहासिक पत्र
US-Iran Talks
US-Iran Talks: इस्लामाबाद में शांति वार्ता का पहला दौर बेनतीजा, गुरुवार की बैठक पर टिकी दुनिया की सांसें
Health Alert
Health Alert: गर्मियों में फ्रिज का ठंडा पानी पीने की भूल न करें, शरीर को झेलने पड़ सकते हैं ये 5 बड़े नुकसान
UP Salary Hike
UP Salary Hike: नोएडा और गाजियाबाद के लाखों श्रमिकों की बल्ले-बल्ले, वेतन में 21% की ऐतिहासिक बढ़ोतरी
Baisakhi 2026
Baisakhi 2026: खालसा पंथ की स्थापना और फसल उत्सव का संगम, जानें बैसाखी का गौरवशाली इतिहास
Cuba-US Crisis
Cuba-US Crisis: “हम झुकेंगे नहीं, अपनी रक्षा खुद करेंगे”, क्यूबा ने अमेरिका की सैन्य धमकी पर दिया कड़ा जवाब!
Amit Shah in Bengal
Amit Shah in Bengal: “UCC लागू होकर रहेगा”, अमित शाह ने ममता सरकार को भ्रष्टाचार पर घेरा!
Asha Bhosle funeral
Asha Bhosle funeral : पंचतत्व में विलीन हुईं आशा भोसले, राजकीय सम्मान और नम आंखों के साथ दी गई अंतिम विदाई!
Noida Phase 2 Violence
Noida Phase 2 Violence: नोएडा फेज-2 में कर्मचारियों का हिंसक प्रदर्शन, फूंकी गाड़ियां, पुलिस पर पथराव, भारी तनाव!

US-Iran Talks: इस्लामाबाद में शांति वार्ता का पहला दौर बेनतीजा, गुरुवार की बैठक पर टिकी दुनिया की सांसें

US-Iran Talks

US-Iran Talks : मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में जारी तनाव के बीच वैश्विक कूटनीति की नजरें एक बार फिर अमेरिका और ईरान के रिश्तों पर टिक गई हैं। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुई उच्च स्तरीय शांति वार्ता के बेनतीजा रहने के बाद भी दोनों देशों ने संवाद का रास्ता बंद नहीं किया है। ताजा जानकारी के अनुसार, शांति की एक और कोशिश के तहत दोनों देश इसी गुरुवार को दोबारा मेज पर बैठ सकते हैं।

US-Iran Talks : नई बैठक की तैयारी: तनाव कम करने के लिए फिर से जुटेंगे प्रतिनिधि

इस्लामाबाद में हुई 21 घंटे की मैराथन बैठक भले ही किसी समझौते तक नहीं पहुंच पाई, लेकिन इसने बातचीत का एक नया सिलसिला शुरू कर दिया है। गुरुवार को होने वाली संभावित मीटिंग के लिए दोनों देशों के सीनियर प्रतिनिधि तैयारियों में जुट गए हैं। हालांकि, सुरक्षा और कूटनीतिक कारणों से अभी इस बैठक के स्थान का खुलासा नहीं किया गया है। इस बातचीत का प्राथमिक उद्देश्य मिडल ईस्ट में युद्ध की आशंकाओं को कम करना और उन विवादित मुद्दों पर सहमति बनाना है, जो दशकों से दोनों देशों के बीच टकराव का कारण बने हुए हैं।

US-Iran Talks : 1979 के बाद की सबसे बड़ी प्रत्यक्ष वार्ता, लेकिन परिणाम शून्य

इस्लामाबाद में हुई पिछली मुलाकात ऐतिहासिक थी क्योंकि 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद यह पहली बार था जब दोनों देशों के बीच इतने उच्च स्तर पर आमने-सामने की बातचीत हुई। ईरान की ओर से संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने मोर्चा संभाला, जबकि अमेरिकी खेमे का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जारेड कुशनर कर रहे थे। इतनी बड़ी राजनीतिक ताकत के जुटने के बावजूद, करीब 21 घंटे तक चली बहस किसी भी साझा समझौते पर हस्ताक्षर किए बिना समाप्त हो गई।

परमाणु कार्यक्रम और संप्रभुता का पेच: क्यों फेल हुई बातचीत?

वार्ता के असफल होने का सबसे बड़ा कारण ‘परमाणु कार्यक्रम’ रहा। अमेरिका ने ईरान के सामने कड़ी शर्त रखी थी कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर का सख्त नियंत्रण स्वीकार करे और भविष्य में कभी भी परमाणु हथियार विकसित न करने की लिखित गारंटी दे। ईरान ने अमेरिका की इस शर्त को अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता पर हमला बताया। तेहरान का तर्क है कि उसका कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और वह किसी भी विदेशी दबाव में अपनी सुरक्षा नीतियों से समझौता नहीं करेगा।

आर्थिक प्रतिबंध और तेल निर्यात: ईरान की अपनी शर्तें

ईरान ने भी बातचीत की मेज पर अपनी मांगें मजबूती से रखीं। ईरान चाहता है कि अमेरिका उस पर लगे सभी कड़े आर्थिक प्रतिबंधों को तुरंत हटाए और विशेष रूप से ईरानी तेल के निर्यात पर लगी पाबंदियों को खत्म करे ताकि उसकी चरमराती अर्थव्यवस्था को सहारा मिल सके। अमेरिका का रुख इसके विपरीत है; वाशिंगटन का कहना है कि जब तक ईरान परमाणु प्रतिबद्धताओं पर ठोस कदम नहीं उठाता, तब तक प्रतिबंधों में ढील देना संभव नहीं होगा।

अविश्वास की गहरी खाई और भविष्य की चुनौतियां

दोनों देशों के बीच दशकों पुराना अविश्वास बातचीत में सबसे बड़ी बाधा बनकर उभरा। राजनीतिक दबाव और अपनी-अपनी घरेलू राजनीति की मजबूरियों के कारण कोई भी पक्ष झुकने को तैयार नहीं दिखा। हालांकि, गुरुवार को होने वाली दूसरी बैठक इस बात का संकेत है कि युद्ध के जोखिम को देखते हुए दोनों पक्ष कूटनीति को एक और मौका देना चाहते हैं। पूरी दुनिया को उम्मीद है कि आगामी दौर की बातचीत मिडल ईस्ट में शांति की नई किरण लेकर आएगी।

Read More : Health Alert: गर्मियों में फ्रिज का ठंडा पानी पीने की भूल न करें, शरीर को झेलने पड़ सकते हैं ये 5 बड़े नुकसान

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top