Mojtaba Khamenei : मध्य पूर्व में जारी भीषण युद्ध और इजरायली-अमेरिकी हमलों के बीच ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई को लेकर रहस्य गहराता जा रहा है। सोमवार, 30 मार्च 2026 को ईरानी सरकारी मीडिया ने एक रिपोर्ट जारी की, जिसमें दावा किया गया कि मोजतबा खामेनेई ने युद्ध के कठिन समय में तेहरान का समर्थन करने के लिए इराकी जनता और वहां के धार्मिक नेतृत्व का आभार व्यक्त किया है। हालांकि, इस लिखित संदेश ने उनकी सलामती पर उठ रहे सवालों को शांत करने के बजाय और हवा दे दी है। दुनिया भर की खुफिया एजेंसियां अब इस गुत्थी को सुलझाने में लगी हैं कि मोजतबा वाकई सत्ता संभाल रहे हैं या यह केवल एक दिखावा है।
Mojtaba Khamenei : डोनाल्ड ट्रंप का दावा: “सुप्रीम लीडर अब सुप्रीम नहीं रहे”
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को एक बेहद चौंकाने वाला दावा कर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी थी। ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट और मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कहा कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा या तो अमेरिकी मिलिट्री ऑपरेशन में मारे जा चुके हैं या वे ऐसी गंभीर स्थिति में हैं कि दोबारा सामने नहीं आ सकते। ट्रंप ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, “उनके नेता मर चुके हैं। उनके सुप्रीम लीडर अब सुप्रीम नहीं रहे। किसी ने भी उनके बेटे (मोजतबा) के बारे में हाल-फिलहाल में कुछ नहीं सुना है। मुझे लगता है कि वह बुरी तरह घायल हैं और बस खुद को इस जंग से बाहर रखना चाहते हैं।”
Mojtaba Khamenei : लंबी चुप्पी और सार्वजनिक उपस्थिति का अभाव
मोजतबा खामेनेई को लेकर सबसे बड़ा संदेह उनकी सार्वजनिक अनुपस्थिति से पैदा होता है। अपने पिता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद, 9 मार्च 2026 को उन्हें औपचारिक रूप से ईरान का सर्वोच्च नेता (Supreme Leader) नियुक्त किया गया था। लेकिन नियुक्ति के 20 से अधिक दिन बीत जाने के बाद भी वे एक बार भी कैमरे के सामने नहीं आए हैं। तेहरान से जारी होने वाले उनके सभी आदेश और संदेश लिखित रूप में होते हैं, जिन्हें सरकारी टीवी चैनलों के एंकर पढ़कर सुनाते हैं। यह असामान्य स्थिति इस थ्योरी को बल देती है कि ईरान का शीर्ष नेतृत्व या तो पूरी तरह भूमिगत हो चुका है या फिर वह गंभीर रूप से अक्षम है।
तेहरान की चुप्पी: सबूत देने में नाकाम रही ईरानी सरकार
ट्रंप के दावों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया की अटकलों के बावजूद, ईरान की सरकार या आईआरजीसी (IRGC) ने मोजतबा की सलामती का कोई ठोस वीडियो या फोटो साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया है। इराक को भेजे गए ताजा संदेश के बारे में भी यह स्पष्ट नहीं किया गया कि यह संदेश किस माध्यम से भेजा गया। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मोजतबा सुरक्षित होते, तो वे अपनी सत्ता की पकड़ दिखाने के लिए अब तक कोई न कोई वीडियो संदेश जरूर जारी करते। तेहरान की यह ‘चुप्पी’ और केवल ‘कागजी संदेशों’ का सहारा लेना उनके डिफेंस स्ट्रक्चर की कमजोरी को दर्शाता है।
सुरक्षा कारणों से छिपे हैं या गंभीर रूप से जख्मी?
मोजतबा खामेनेई की स्थिति को लेकर तीन मुख्य संभावनाएं जताई जा रही हैं। पहली यह कि वे इजरायली ‘लक्षित हमलों’ (Targeted Attacks) के डर से किसी अज्ञात बंकर में छिपे हुए हैं। दूसरी संभावना यह है कि 28 फरवरी के उन हमलों में, जिनमें उनके पिता की मौत हुई थी, मोजतबा भी गंभीर रूप से घायल हो गए थे और फिलहाल उनका इलाज चल रहा है। तीसरी और सबसे खतरनाक संभावना यह है कि ईरान में सत्ता का संघर्ष चल रहा है और मोजतबा केवल एक मुखौटा बनकर रह गए हैं। सच जो भी हो, मोजतबा की गैरमौजूदगी ने ईरानी सशस्त्र बलों और जनता के मनोबल पर गहरा असर डाला है।
ईरान का भविष्य और नेतृत्व का संकट
ईरान इस समय अपने इतिहास के सबसे बड़े अस्तित्वगत संकट से गुजर रहा है। एक तरफ सीमा पर इजरायल और अमेरिका के घातक हमले जारी हैं, तो दूसरी तरफ नेतृत्व का यह ‘वैक्यूम’ देश को अराजकता की ओर धकेल सकता है। यदि मोजतबा खामेनेई जल्द ही दुनिया के सामने नहीं आते हैं, तो यह मान लिया जाएगा कि ईरान का शीर्ष नेतृत्व पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है। फिलहाल, इराक को भेजा गया उनका यह ‘शुक्रिया’ संदेश केवल एक कूटनीतिक औपचारिकता नजर आता है, जिसका मकसद दुनिया को यह दिखाना है कि तेहरान में सब कुछ सामान्य है, जबकि हकीकत इसके ठीक उलट दिख रही है।
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