Odisha Politics: ओडिशा की राजनीति में शनिवार, 21 मार्च 2026 को एक बड़ा भूचाल आ गया है। राज्य की मुख्य क्षेत्रीय पार्टी बीजू जनता दल (BJD) ने कड़ा अनुशासनात्मक कदम उठाते हुए अपने 6 मौजूदा विधायकों को तत्काल प्रभाव से पार्टी से निलंबित कर दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेडी प्रमुख नवीन पटनायक के इस फैसले ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। इन विधायकों पर राज्यसभा चुनाव के दौरान ‘क्रॉस वोटिंग’ करने और गंभीर दल-विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के पुख्ता आरोप लगे हैं।
Odisha Politics: अनुशासन समिति की जांच और सख्त फैसला
पार्टी सूत्रों के अनुसार, बीजू जनता दल की ‘राजनीतिक मामलों की समिति’ ने पिछले कुछ दिनों से इन विधायकों की गतिविधियों पर पैनी नजर रखी थी। निलंबन से पहले सभी आरोपी विधायकों को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया गया था। नवीन पटनायक की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में विधायकों द्वारा दिए गए स्पष्टीकरणों की गहन समीक्षा की गई। जब अनुशासन समिति ने इन जवाबों को असंतोषजनक और पार्टी के हितों के खिलाफ पाया, तब सर्वसम्मति से इन्हें बाहर का रास्ता दिखाने की सिफारिश की गई। बीजेडी ने इस कार्रवाई के जरिए यह स्पष्ट संदेश दिया है कि संगठन के भीतर सामूहिक निर्णयों का उल्लंघन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
Odisha Politics: इन 6 विधायकों पर गिरी गाज: राज्यसभा चुनाव बना मुख्य कारण
निलंबित किए गए विधायकों की सूची में राज्य के कई प्रमुख नाम शामिल हैं। इनमें चक्रमणि कन्हार (बालीगुड़ा), नबकिशोर मलिक (जयदेव), सौविक बिस्वाल (चौदवार-कटक), सुभासिनी जेना (बस्ता), रामकांत भुईं (तिरतोल) और देवी रंजन त्रिपाठी (बांकी) का नाम शामिल है। इन सभी पर आरोप है कि 16 मार्च 2026 को हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान इन्होंने पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार के बजाय विपक्षी खेमे या निर्दलीय उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया।
ओडिशा राज्यसभा चुनाव के नतीजे और क्रॉस वोटिंग का खेल
ओडिशा की चार राज्यसभा सीटों के लिए हुए चुनाव के परिणाम बेहद चौंकाने वाले रहे थे। इन चार सीटों में से भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने दो सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि बीजेडी को केवल एक सीट से संतोष करना पड़ा। चौथी सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप राय ने जीत हासिल की। चुनाव के तुरंत बाद से ही बीजेडी के भीतर आठ विधायकों द्वारा क्रॉस वोटिंग करने की अफवाहें तेज थीं। गहन छानबीन के बाद पार्टी ने आठ में से छह विधायकों को दोषी पाते हुए उन पर कार्रवाई की है। इस चुनाव परिणाम ने बीजेडी की आंतरिक गुटबाजी को उजागर कर दिया था, जिसे ठीक करने के लिए अब पटनायक ने ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की है।
नवीन पटनायक का कड़ा रुख: “एकता और अखंडता सर्वोपरि”
निलंबन के बाद एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए बीजेडी प्रमुख नवीन पटनायक ने कहा कि पार्टी का संविधान प्रत्येक सदस्य से अटूट निष्ठा और अनुशासन की मांग करता है। उन्होंने स्पष्ट किया, “यह कड़ा कदम पार्टी की एकता और अखंडता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए अनिवार्य था। कोई भी व्यक्ति पार्टी के सिद्धांतों से बड़ा नहीं है।” पटनायक के इस रुख ने यह साफ कर दिया है कि वे आने वाले समय में संगठन के भीतर किसी भी प्रकार की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं हैं।
सियासी मायने: आगामी विधानसभा चुनाव और विपक्षी खेमे में हलचल
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नवीन पटनायक का यह फैसला केवल एक अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं, बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले अपनी पकड़ मजबूत करने की एक सधी हुई रणनीति है। विधायकों को पार्टी से निकालकर उन्होंने यह संदेश दिया है कि वे बागियों पर निर्भर रहने के बजाय नए और वफादार चेहरों पर दांव लगाने को तैयार हैं। इस फैसले से विपक्षी खेमे में भी सनसनी फैल गई है, क्योंकि बीजेडी अब और अधिक आक्रामक और एकजुट नजर आ रही है।
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