Shortness of Breath: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में थोड़ा सा चलने या कुछ सीढ़ियां चढ़ने पर सांस फूलना एक आम समस्या बन गई है। अधिकांश लोग इसे केवल फेफड़ों की बीमारी या शारीरिक कमजोरी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि कुछ जागरूक लोग इसे सीधे हृदय रोग (Heart Disease) से जोड़कर देखने लगते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दिल की धड़कन तेज होना और सांस फूलना हमेशा शारीरिक बीमारी नहीं होती? इसका एक गहरा संबंध आपकी मानसिक स्थिति और ‘एंग्जाइटी’ से भी हो सकता है। आइए, विशेषज्ञों की राय से इस उलझन को सुलझाते हैं।
Shortness of Breath: हृदय स्वास्थ्य और सांस फूलने का सीधा संबंध
दिल्ली के राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में कार्डियोलॉजी विभाग के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. अजीत जैन के अनुसार, यदि सीढ़ियां चढ़ते समय आपका दिल असामान्य रूप से धड़कने लगे और सांस लेने में कठिनाई हो, तो यह हृदय संबंधी विकार का प्रारंभिक संकेत हो सकता है। जब हृदय की धमनियों में किसी प्रकार का ‘ब्लॉकेज’ होता है, तो हृदय को पूरे शरीर में रक्त पंप करने के लिए सामान्य से अधिक मेहनत करनी पड़ती है। इस प्रक्रिया में हृदय को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिससे सांस फूलने की समस्या उत्पन्न होती है। यदि यह लक्षण बार-बार उभर रहे हैं, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए।
Shortness of Breath: क्या यह केवल शारीरिक है या मानसिक तनाव (एंग्जाइटी)?
डॉ. जैन स्पष्ट करते हैं कि तेज धड़कन और सांस फूलने के पीछे मानसिक स्वास्थ्य का भी बड़ा हाथ हो सकता है। यदि आपको किसी ऑफिस मीटिंग से पहले घबराहट होती है, कहीं बाहर जाने के नाम से पसीना आने लगता है या आप छोटी-छोटी बातों पर निरंतर चिंतित रहते हैं, तो यह ‘एंग्जाइटी’ (Anxiety) के लक्षण हैं। एंग्जाइटी के दौर में शरीर का ‘फाइट या फ्लाइट’ रिस्पांस सक्रिय हो जाता है, जिससे बिना किसी भारी शारीरिक मेहनत के भी दिल की धड़कन बढ़ सकती है। ऐसे मामलों में हृदय रोग विशेषज्ञ के बजाय किसी मनोरोग विशेषज्ञ (Psychiatrist) से परामर्श लेना अधिक उचित होता है।
एनीमिया और थायरॉयड का प्रभाव
सांस फूलने के पीछे केवल हृदय या मस्तिष्क ही जिम्मेदार नहीं होते। डॉ. जैन के मुताबिक, शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी यानी एनीमिया एक प्रमुख कारण है। जब खून में ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता कम हो जाती है, तो दिल को उसकी भरपाई के लिए तेज धड़कना पड़ता है। इसके अतिरिक्त, थायरॉयड की समस्या (विशेषकर हाइपरथायरायडिज्म) में भी मेटाबॉलिज्म तेज हो जाता है, जिससे हार्ट रेट बढ़ जाता है। महिलाओं में यह समस्या पुरुषों की तुलना में अधिक देखी जाती है, इसलिए खून की जांच और थायरॉयड प्रोफाइल करवाना भी आवश्यक है।
बचाव के प्रभावी उपाय और जीवनशैली में बदलाव
इस समस्या से निपटने के लिए आपको अपनी दिनचर्या में कुछ बुनियादी बदलाव करने की आवश्यकता है:
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नियमित व्यायाम: प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट की पैदल सैर (Walking) हृदय और फेफड़ों की कार्यक्षमता को बढ़ाती है।
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संतुलित आहार: अपने भोजन में आयरन, विटामिन्स और ओमेगा-3 फैटी एसिड युक्त खाद्य पदार्थों को शामिल करें।
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मानसिक शांति: तनाव और एंग्जाइटी को नियंत्रित करने के लिए योग, प्राणायाम और ध्यान (Meditation) का सहारा लें।
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रूटीन चेकअप: समय-समय पर ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच करवाते रहें ताकि किसी भी बीमारी का शुरुआती स्तर पर पता चल सके।
हृदय की धड़कन का बढ़ना शरीर का एक सिग्नल है। इसे अनसुना न करें, लेकिन डरें भी नहीं। सही समय पर सही विशेषज्ञ की सलाह आपको एक स्वस्थ और लंबा जीवन दे सकती है।
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