Puri Jagannath Temple: ओडिशा के पुरी स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर के ‘रत्न भंडार’ की बहुप्रतीक्षित गणना और सूची बनाने की प्रक्रिया आखिरकार शुरू होने जा रही है। राज्य सरकार ने इस ऐतिहासिक कार्य के लिए 25 मार्च 2026 की तिथि निर्धारित की है। शुभ मुहूर्त के अनुसार, यह प्रक्रिया दोपहर 12:12 बजे से 1:45 बजे के बीच शुरू की जाएगी। भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और देवी सुभद्रा के इस दिव्य खजाने को दशकों बाद फिर से दुनिया के सामने व्यवस्थित रूप से सूचीबद्ध किया जाएगा।
Puri Jagannath Temple: खजाने का अनुमान: 128 किलो सोना और 221 किलो चांदी के जेवर
रत्न भंडार में मौजूद संपदा की पिछली बार विस्तृत गणना वर्ष 1978 में की गई थी। उस समय की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, खजाने में 128.38 किलो सोना और 221.53 किलो चांदी के आभूषण व बर्तन दर्ज किए गए थे। 1978 की वह गणना प्रक्रिया पूरी 72 दिनों तक चली थी। रत्न भंडार के दो हिस्से हैं—भीतर भंडार और बाहरी भंडार। बाहरी भंडार में वे आभूषण रखे जाते हैं जिनका उपयोग भगवान के दैनिक श्रृंगार और विशेष उत्सवों के लिए किया जाता है।
Puri Jagannath Temple: डिजिटल निगरानी और बैंकिंग विशेषज्ञों की भागीदारी
पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए इस बार पूरी गणना प्रक्रिया की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी अनिवार्य की गई है। इस विशाल कार्य में तकनीकी सहायता के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपने दो वरिष्ठ अधिकारियों को नियुक्त करने की सहमति दे दी है। साथ ही, राष्ट्रीयकृत बैंकों द्वारा पंजीकृत सुनारों की सेवाएं ली जाएंगी। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) के मुख्य प्रशासक अरविंद पाढ़ी के अनुसार, आभूषणों में जड़े बेशकीमती पत्थरों की पहचान के लिए राज्य सरकार दो अनुभवी ‘रत्नविज्ञानी’ भी उपलब्ध कराएगी।
सुरक्षा और एसओपी: सोने-चांदी के लिए बनेंगे अलग बॉक्स
राज्य सरकार ने खजाने की गिनती के लिए एक विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की है। पूरी प्रक्रिया की निगरानी तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय पैनल करेगा। गिनती के दौरान सोने, चांदी और अन्य रत्नों के लिए अलग-अलग बॉक्स तैयार किए गए हैं। कुल 10 विशेषज्ञ कर्मियों को आभूषणों को सहेजने और बॉक्स में रखने की जिम्मेदारी दी गई है। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के तहत, मजिस्ट्रेट प्रतिदिन खजाने की चाबियां लेकर आएंगे और शाम को काम पूरा होने के बाद उन्हें वापस सरकारी ट्रेजरी में जमा करेंगे।
विवादों का इतिहास: जब गुम हो गई थीं रत्न भंडार की चाबियां
रत्न भंडार को खोलने की कोशिशों का इतिहास विवादों भरा रहा है। अप्रैल 2018 में ओडिशा हाईकोर्ट के आदेश पर जब 16 सदस्यीय टीम चेंबर खोलने पहुँची, तो प्रशासन ने यह कहकर सनसनी फैला दी कि भीतरी भंडार की चाबियां खो गई हैं। इस घटना पर भारी राजनीतिक और सामाजिक हंगामा हुआ। तत्कालीन मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने इसके लिए एक न्यायिक जांच आयोग का गठन किया था, जिसकी रिपोर्ट नवंबर 2018 में सौंपी गई, लेकिन उसे सार्वजनिक नहीं किया गया।
रथ यात्रा की सिफारिश और नई उम्मीद
पिछले साल अगस्त में जगन्नाथ मंदिर प्रबंध समिति ने राज्य सरकार से सिफारिश की थी कि 2024 की रथ यात्रा के दौरान भंडार को खोला जाए। हालांकि, अब 2026 में यह प्रक्रिया पूर्णता की ओर बढ़ रही है। पूर्व कानून मंत्री प्रताप जेना के अनुसार, रिकॉर्ड में 12,831 भरी सोना और 22,153 भरी चांदी दर्ज है (एक भरी लगभग 11.66 ग्राम)। भक्तों और इतिहासकारों के लिए यह केवल संपत्ति की गिनती नहीं, बल्कि सदियों पुरानी परंपरा और आस्था के संरक्षण का एक महत्वपूर्ण कदम है।
