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रीढ़ की हड्डी में दर्द? जानिए इसके 6 बड़े कारण और इलाज

रीढ़ की हड्डी में दर्द? जानिए इसके 6 बड़े कारण और इलाज

रीढ़ की हड्डी यानी स्पाइन शरीर की मुख्य संरचना होती है, जो शरीर को संतुलन और स्थिरता प्रदान करती है। अगर इसमें किसी प्रकार का दर्द होता है तो यह केवल असहजता नहीं, बल्कि गंभीर स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है। आइए जानते हैं इससे जुड़ी 6 महत्वपूर्ण बातें।

गलत मुद्रा (Posture) से होता है रीढ़ में तनाव

लंबे समय तक झुककर बैठना, कंप्यूटर या मोबाइल पर झुके रहना, और सही तरह से न बैठना-ये सभी आदतें रीढ़ की हड्डी पर दबाव डालती हैं। इससे मांसपेशियां तनावग्रस्त हो जाती हैं और पीठ में दर्द शुरू हो जाता है। लंबे समय तक यह आदत बनी रही तो स्लिप डिस्क या सर्वाइकल जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए हर 30-40 मिनट में अपनी मुद्रा बदलें और पीठ को सीधा रखें।

अत्यधिक वजन उठाना भी बनता है कारण

बिना सही तकनीक के भारी सामान उठाने से रीढ़ पर अत्यधिक दबाव पड़ता है, जिससे दर्द और कभी-कभी चोट भी लग सकती है। खासतौर पर जिम में वेट ट्रेनिंग के दौरान या घरेलू कामों के समय सतर्क रहना जरूरी है। हमेशा घुटनों को मोड़कर वजन उठाएं और पीठ को सीधा रखें। यह आदत आपकी स्पाइन को सुरक्षित रखेगी।

अधिक वजन और मोटापा बढ़ाते हैं पीठ दर्द का जोखिम

जब शरीर का वजन अधिक होता है, तो रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त भार पड़ता है। यह भार स्पाइन के जोड़ों को दबाता है और धीरे-धीरे इनमें घिसाव होने लगता है, जिससे पीठ में लगातार दर्द बना रहता है। वजन नियंत्रित रखने के लिए संतुलित आहार और नियमित व्यायाम जरूरी है।

रीढ़ की हड्डी में दर्द कुछ बीमारियों का लक्षण भी हो सकता है

रीढ़ में दर्द कभी-कभी केवल थकान नहीं, बल्कि स्पॉन्डिलाइटिस, स्लिप डिस्क, हड्डियों की कमजोरी (ऑस्टियोपोरोसिस) या किडनी संबंधी बीमारियों का लक्षण भी हो सकता है। यदि दर्द लगातार बना रहे, साथ में हाथ या पैरों में सुन्नपन हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठना या लेटना

ऑफिस वर्क या ऑनलाइन क्लासेज के दौरान कई लोग घंटों तक एक ही जगह बैठे रहते हैं। इससे रीढ़ की हड्डी पर अत्यधिक दबाव पड़ता है और पीठ में जकड़न आने लगती है। हर 30 मिनट में खड़े होकर हल्का वॉक करना या स्ट्रेचिंग करना बहुत जरूरी है।

इलाज में देरी बन सकती है भविष्य में विकलांगता का कारण

यदि रीढ़ की हड्डी में दर्द को लगातार नजरअंदाज किया जाए, तो यह केवल दर्द तक सीमित नहीं रहता। यह धीरे-धीरे तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर सकता है, जिससे चलने-फिरने में परेशानी और स्थायी विकलांगता तक हो सकती है। इसलिए दर्द होने पर तुरन्त विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लें और MRI या X-Ray जैसी जांच करवाएं।

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