गोण्डा| निजी स्कूलों की लगातार बढ़ती मनमानी और शिक्षा के नाम पर खुले व्यापार के खिलाफ अवधकेशरी सेना ने मोर्चा खोल दिया है। संगठन ने कहा है कि शिक्षा प्रणाली को व्यवस्थित करने के बजाय निजी स्कूल इसे कमाई का जरिया बना चुके हैं। हर साल फीस में मनमानी बढ़ोतरी, परीक्षा शुल्क, ड्रेस, किताबें, डायरी, आईकार्ड और यहां तक कि समाज सेवा के नाम पर भी धन वसूला जा रहा है।
संगठन के पदाधिकारियों का आरोप है कि स्कूल प्रशासन अभिभावकों को मजबूर करता है कि वे स्कूल की दुकान से ही महंगी किताबें और ड्रेस खरीदें, जबकि बाजार में वही सामग्री काफी सस्ती मिलती है। वहीं, शिक्षकों द्वारा छात्रों को व्यक्तिगत ट्यूशन के लिए दबाव बनाया जाता है। ट्यूशन न लेने पर बच्चों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है, परीक्षा में अंक काटे जाते हैं, जिससे उनके मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ता है।
अवधकेशरी सेना ने बताया कि जब अभिभावक स्कूल प्रशासन से अपनी समस्याएं साझा करते हैं, तो उन्हें ताना मारा जाता है और उनके बच्चों को निशाना बनाया जाता है। कई बार छात्रों को सार्वजनिक रूप से अपमानित भी किया जाता है। स्कूल प्रशासन यह तक कह देता है कि यदि परेशानी है तो बच्चे का नाम कटवा लें।
इस पूरे प्रकरण में शिक्षा विभाग की निष्क्रियता पर भी सवाल उठते हैं। समय-समय पर निरीक्षण न होने से स्कूलों की मनमानी और बढ़ गई है। अवधकेशरी सेना ने मांग की है कि किसी वरिष्ठ अधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और स्कूलों पर शुल्क नियंत्रण, मानक शिक्षण ढांचा और अभिभावकों के सम्मानजनक व्यवहार की व्यवस्था सुनिश्चित हो।
