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ग्रहों की चाल से बदलती है जीवन की दिशा, कैसे डालते हैं प्रभाव सभी राशियों पर?

ग्रहों की चाल से बदलती है जीवन की दिशा, कैसे डालते हैं प्रभाव सभी राशियों पर?

ज्योतिष विज्ञान के अनुसार ब्रह्माण्ड में स्थित सभी ग्रह और खगोलीय पिंड पृथ्वी और मानव जीवन पर गहरा प्रभाव डालते हैं। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु ये नौ ग्रह समय-समय पर अपनी राशि बदलते हैं, जिसे ग्रह गोचर कहा जाता है।

वैदिक ज्योतिष में ग्रहों के गोचर को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। जब कोई ग्रह एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है, तो इसे गोचर या राशि परिवर्तन कहा जाता है। यह परिवर्तन सभी 12 राशियों के जीवन पर सीधा प्रभाव डालता है, जो स्वास्थ्य, करियर, आर्थिक स्थिति और वैवाहिक जीवन से जुड़ा होता है। जैसे सूर्य हर माह राशि बदलते हैं, वहीं चंद्रमा सिर्फ सवा दिन में गोचर कर लेते हैं। शनि ग्रह को राशि बदलने में ढाई साल लगते हैं।

कब फल देना बंद कर देते हैं ग्रह?

जब कोई ग्रह सूर्य के अत्यंत निकट चला जाता है और उसकी चमक में दब जाता है, तो वह ‘अस्त’ कहलाता है। इस स्थिति में वह ग्रह अपना शुभ प्रभाव खो देता है। वहीं जब वह पुनः सूर्य से दूरी बना लेता है तो ‘उदित’ कहलाता है और फिर से सकारात्मक प्रभाव देने लगता है। यह स्थिति ग्रहों की शुभ-अशुभ फलदायिता में बड़ा बदलाव लाती है।

जब ग्रह उल्टी चाल चलते हैं

जब कोई ग्रह अपनी सामान्य दिशा के विपरीत दिशा में चलता है, तो वह वक्री कहलाता है। यह विशेष स्थिति कभी-कभी जीवन में रुकावटें, भ्रम और अव्यवस्था का कारण बनती है। शनि, बृहस्पति, बुध आदि ग्रह समय-समय पर वक्री होते हैं, जबकि राहु और केतु हमेशा वक्री रहते हैं।

राशियों पर गहराता है प्रभाव

हर ग्रह का गोचर, वक्री चाल या अस्त-उदय सभी 12 राशियों पर भिन्न-भिन्न असर डालता है। किसी के लिए यह शुभ समाचार लाता है, तो किसी के लिए चुनौतियों का कारण बनता है। इसलिए कुंडली के अनुसार ग्रहों की स्थिति को समझना आवश्यक है।

समय की गणना से बदलती है तकदीर

ग्रहों की चाल वैदिक पंचांग के अनुसार तय होती है और इनकी अवधि निर्धारित होती है। ज्योतिष विद्वान इन बदलावों के आधार पर भविष्यवाणी करते हैं। जीवन के उतार-चढ़ाव में ग्रहों की भूमिका को जानकर हम सावधानीपूर्वक कदम बढ़ा सकते हैं।

 

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