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Ram Mandir Donation Case : रामदास बाल योगी का बयान, चढ़ावा चोरी विवाद से साधु-संत भुगत रहे असर, अयोध्या में हलचल

Ram Mandir Donation Case

Ram Mandir Donation Case  : अयोध्या के राम मंदिर में हुए चढ़ावे की चोरी की घटना ने पूरे धर्मनगरी के संतों और श्रद्धालुओं को झकझोर कर रख दिया है। संत रामदास बाल योगी महाराज का कहना है कि इस घटना से न केवल राम मंदिर की छवि धूमिल हुई है, बल्कि पूरी अयोध्या को इसका भारी खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि इस घटना के बाद से श्रद्धालुओं की संख्या में भारी गिरावट आई है और अयोध्या के अन्य मंदिरों को मिलने वाले दान में भी कमी देखी जा रही है। संत के अनुसार, जो भक्त रामलला के दर्शन के लिए आते थे, वे ही शाम को सरयू आरती और अन्य मंदिरों में भी जाया करते थे, लेकिन अब माहौल बदल गया है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि जो भी इस चोरी में शामिल हैं, उन्हें भगवान राम कभी माफ नहीं करेंगे।

जवाबदेही से इनकार और श्रेय लेने की राजनीति

संत रामदास बाल योगी महाराज ने मंदिर प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि जब सपा नेता अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया के माध्यम से चोरी की बात उजागर की, तो मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने इसे सिरे से नकार दिया था। उन्होंने तब इसे महज एक ‘भ्रम’ बताया था। संत का तर्क है कि जब मंदिर निर्माण और उसके प्रचार-प्रसार का श्रेय लेने के लिए ट्रस्ट के पदाधिकारी और आरएसएस के लोग सबसे आगे थे, तो अब चोरी की जिम्मेदारी लेने से क्यों कतरा रहे हैं? उन्होंने सवाल किया कि क्या इतनी बड़ी चोरी केवल वेतनभोगी कर्मचारियों के बस की बात है, या इसके पीछे किसी बड़े तंत्र का हाथ है?

जमीन घोटाले से दान चोरी तक: ट्रस्ट पर गंभीर आरोप

संत ने इस घटना को एक बड़ी श्रृंखला का हिस्सा बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राम मंदिर ट्रस्ट के नाम पर पहले भी जमीन खरीद में करोड़ों के घोटाले हुए हैं, जहाँ एक करोड़ की जमीनें 25-25 करोड़ में खरीदी गईं। उन्होंने दावा किया कि जानकारी के अनुसार, नकदी के साथ-साथ भारी मात्रा में सोना-चांदी और भगवान के आभूषणों की भी हेराफेरी की गई है। संत का आरोप है कि मामले को रफा-दफा करने के लिए केवल छोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है, जबकि इसमें शामिल ‘बड़ी मछलियों’ को सुरक्षा कवच दिया जा रहा है।

सुरक्षा व्यवस्था और कमीशनखोरी के चौंकाने वाले दावे

संत रामदास बाल योगी ने यह भी दावा किया कि मंदिर की चाक-चौबंद सुरक्षा और सीसीटीवी कैमरों की मौजूदगी में चोरी होना यह साबित करता है कि इसके पीछे गहरी मिलीभगत है। उन्होंने कहा कि इस बारे में ट्रस्टी अनिल मिश्रा को पहले भी सूचित किया गया था, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इतना ही नहीं, उन्होंने मंदिर निर्माण कार्य में भी 40 प्रतिशत कमीशनखोरी का सनसनीखेज आरोप लगाया। उन्होंने अफसोस जताया कि जो लोग मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के नाम पर अपना जीवन यापन करते हैं, आज उन्हीं के मंदिर में चोरी हो रही है।

संतों की चुप्पी और असली राम भक्त पर बहस

इस पूरे विवाद के बीच, संत रामदास बाल योगी ने उन संतों पर भी निशाना साधा जो सरकारी सुविधाओं और सुरक्षा घेरे में रहने के कारण इस गंभीर विषय पर चुप्पी साधे हुए हैं। उन्होंने अखिलेश यादव द्वारा मामले को उठाने को ‘असली राम भक्ति’ करार दिया। उन्होंने कहा कि जब उनके अपने ठाकुर जी के मंदिर में ही सुरक्षा और पारदर्शिता का अभाव है, तो वे चुप कैसे बैठ सकते हैं? संतों के इस आक्रोश ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राम मंदिर ट्रस्ट को अपनी कार्यप्रणाली में भारी सुधार और पूर्ण पारदर्शिता की आवश्यकता है, ताकि श्रद्धालुओं का डगमगाता विश्वास वापस लौट सके।

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