Ram Mandir Trust Fraud : अयोध्या स्थित भव्य राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में जबरदस्त भूचाल आ गया है। समाजवादी पार्टी द्वारा इस मामले को प्रमुखता से उठाए जाने और कड़ी कार्रवाई की मांग के बाद, राम मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर राज्य सरकार ने आनन-फानन में एक उच्च स्तरीय जांच टीम का गठन कर दिया है। विशेष जांच दल (SIT) की यह टीम अयोध्या पहुंचकर अपनी तफ्तीश में जुट गई है। एसआईटी को अगले 15 दिनों के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट शासन को सौंपनी है, जिससे यह पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगा कि मंदिर के चढ़ावे में कोई हेराफेरी हुई है या नहीं, और यदि हुई है तो उसकी कुल राशि कितनी है।
चढ़ावा गिनने वाले कर्मचारियों पर शक की सुई, करोड़ों रुपये बरामद
इस बेहद संवेदनशील जांच के दायरे में राम मंदिर के वे सभी 50 कर्मचारी आएंगे, जो दैनिक आधार पर श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और कैश को गिनने का काम करते हैं। शुरुआती कार्रवाई के तहत अब तक 5 संदिग्ध कर्मचारियों के पास से करीब 2 करोड़ रुपये की भारी-भरकम नकदी बरामद की जा चुकी है, जिसने इस पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।
अनुकल्प और लवकुश के घरों पर छापेमारी, दबी जुबान में बोले ग्रामीण
इस कथित घोटाले के तार अयोध्या से करीब 45 किलोमीटर दूर मिल्कीपुर के बंसावा ईंट गांव से भी जुड़ रहे हैं। वहां के निवासी अनुकल्प, जो वर्तमान में अयोध्या में रहकर राम मंदिर में काम करते हैं, मुख्य संदिग्धों में शामिल हैं। अनुकल्प ने ही कुछ समय पहले अपने बहनोई लवकुश को मंदिर में नौकरी दिलवाई थी। ताजा जानकारी के मुताबिक, लवकुश के परिसर से 10 लाख रुपये कैश बरामद हुए हैं। गांव में अनुकल्प का हाल ही में बना आलीशान मकान चर्चा का विषय है, और ग्रामीणों का कहना है कि कम समय में ही उनके पास अकूत संपत्ति आ गई है।
तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय एसआईटी टीम का गठन और उनकी प्रोफाइल
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित इस 3 सदस्यीय एसआईटी की कमान 2004 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और लखनऊ के डिविजनल कमिश्नर विजय विश्वास पंत संभाल रहे हैं। टीम के दूसरे सदस्य 2008 बैच के आईपीएस और आईजी (रेंज) किरण एस हैं, जिन्हें सीबीआई और इंटरपोल में काम करने का लंबा तजुर्बा है। तीसरे सदस्य के रूप में वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन कुमार को शामिल किया गया है, जिनके पास फाइनेंस और एकाउंट्स कैडर में 36 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है।
बैंक खातों, ऑडिट रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज की बारीकी से होगी जांच
यह विशेष जांच टीम मंदिर में आने वाले सभी प्रकार के ऑनलाइन और ऑफलाइन दान, ट्रस्ट के आधिकारिक बैंक खातों तथा पूर्व की ऑडिट रिपोर्ट्स को खंगालेगी। टीम यह भी देखेगी कि दान पात्रों से कैश निकालने, उसे गिनने और बैंक तक सुरक्षित पहुंचाने की मौजूदा प्रक्रिया में कहां चूक हुई। इसके अतिरिक्त, एसआईटी संदिग्धों, ट्रस्ट के पदाधिकारियों और गंभीर आरोप लगाने वाले पूर्व कर्मचारी महिपाल सिंह के बयान दर्ज करेगी। जांच इस बात पर केंद्रित होगी कि कड़ी सुरक्षा और सीसीटीवी की निगरानी के बावजूद चोरी कैसे संभव हुई।
नृपेंद्र मिश्रा ने जताया जांच पर भरोसा, व्यवस्था सुधार पर दिया जोर
श्री राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने अयोध्या पहुंचकर इस एसआईटी जांच पर पूरा भरोसा जताया है। उन्होंने त्वरित कार्रवाई के लिए राज्य सरकार की सराहना करते हुए कहा कि इस मामले के दो पहलू हैं—पहला आपराधिक पक्ष जिसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है, और दूसरा भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए व्यवस्थागत सुधार। जब तक दोनों स्तरों पर कड़े कदम नहीं उठाए जाएंगे, तब तक श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास दोबारा कायम करना मुश्किल होगा। उन्होंने मंदिर प्रशासन की ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया है।
अखिलेश यादव के बदलते बयानों पर भारतीय जनता पार्टी का तीखा पलटवार
दूसरी तरफ, इस मामले पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। पहले जांच की मांग करने वाले सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अब अपना स्टैंड बदलते हुए कहा है कि धार्मिक मामलों की जांच अफसरों से कराना सनातन का अपमान है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि मंदिर की लाइट और कैमरे बंद कर दिए जाएं, तो चोर खुद पैसे लौटा जाएगा। इस पर भाजपा नेता बृजेश पाठक ने पलटवार करते हुए कहा कि चढ़ावा तो बाबरी मस्जिद के लिए भी इकट्ठा हुआ था, अखिलेश कभी उस पर भी सवाल उठाएं। फिलहाल, इस धार्मिक मुद्दे पर सियासी सीनाजोरी चरम पर है।
