West Bengal New CM : पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव परिणामों ने भारतीय राजनीति में एक नया अध्याय लिख दिया है। 4 मई को घोषित हुए नतीजों में भारतीय जनता पार्टी की प्रचंड और ऐतिहासिक जीत के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि राज्य की कमान किसके हाथों में सौंपी जाएगी। राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर जिस नाम की गूंज सबसे ज्यादा सुनाई दे रही है, वह है सुवेंदु अधिकारी।
सुवेंदु ने इस चुनाव में वह कर दिखाया है जिसकी कल्पना करना भी मुश्किल था; उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उनके सबसे सुरक्षित गढ़ माने जाने वाले भवानीपुर में करारी शिकस्त दी है। इससे पहले 2021 में भी नंदीग्राम में उन्होंने ममता बनर्जी को हराया था, लेकिन इस बार भवानीपुर की जीत ने उनका कद भाजपा आलाकमान की नजरों में काफी ऊंचा कर दिया है। सुवेंदु की आक्रामक शैली और जमीनी पकड़ उन्हें मुख्यमंत्री पद का सबसे प्रबल दावेदार बनाती है।
West Bengal New CM : अमित शाह की कोलकाता में मौजूदगी: आज विधायक दल की बैठक में होगा फैसला
पश्चिम बंगाल की सत्ता का केंद्र अब कोलकाता के उस होटल और भाजपा कार्यालय में सिमट गया है, जहां केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर्यवेक्षक के रूप में पहुंच चुके हैं। उनके साथ ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को सह-पर्यक्षक बनाकर भेजा गया है। अमित शाह ने चुनाव प्रचार के दौरान ही स्पष्ट कर दिया था कि बंगाल का मुख्यमंत्री ‘धरती पुत्र’ होगा, जो बंगाली संस्कृति को समझता हो, बंगाली बोलता हो और स्थानीय भावनाओं से जुड़ा हो। आज दोपहर में नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में विधायक दल के नेता का चुनाव होगा, जिसके तुरंत बाद औपचारिक रूप से अगले मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान कर दिया जाएगा। पूरे प्रदेश की नजरें अब उसी ‘नाम वाली पर्ची’ पर टिकी हैं।
West Bengal New CM : बीजेपी का ‘डिप्टी सीएम’ फॉर्मूला: क्या बंगाल में भी दिखेगी तीन चेहरों की सरकार?
पिछले कुछ वर्षों में भाजपा ने राज्यों में सरकार बनाने का एक खास पैटर्न विकसित किया है। पार्टी अब केवल मुख्यमंत्री ही नहीं, बल्कि जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने के लिए दो डिप्टी सीएम का फॉर्मूला अपना रही है। हाल के वर्षों में राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और बिहार जैसे राज्यों में भाजपा ने इसी रणनीति के तहत सरकार चलाई है। अब कयास लगाए जा रहे हैं कि बंगाल जैसे जटिल और विविधतापूर्ण राज्य में भी भाजपा इसी मॉडल को दोहरा सकती है।
यदि सुवेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री बनते हैं, तो उनके साथ दो ऐसे चेहरों को डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है जो राज्य के अलग-अलग हिस्सों और समुदायों का प्रतिनिधित्व करते हों। अमित शाह और मोहन चरण माझी की टीम बंगाल की राजनीति के जटिल समीकरणों को देखते हुए तीन नामों की घोषणा कर सबको चौंका सकती है।
विभिन्न राज्यों में भाजपा का वर्तमान नेतृत्व ढांचा
बीजेपी ने जिन राज्यों में हाल ही में सरकारें बनाई हैं, वहां का नेतृत्व समीकरण कुछ इस प्रकार है, जो बंगाल के लिए एक ब्लूप्रिंट साबित हो सकता है:
डिप्टी सीएम की दौड़ में शामिल प्रमुख चेहरे: दिलीप घोष और अग्निमित्रा पॉल
अगर बंगाल में दो उपमुख्यमंत्री बनाने का फैसला लिया जाता है, तो इस सूची में सबसे पहला नाम दिलीप घोष का आता है। दिलीप घोष बंगाल भाजपा के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं और उन्होंने शून्य से शिखर तक पार्टी को पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई है। 2021 में उनके नेतृत्व में भाजपा 77 सीटों के साथ मुख्य विपक्षी दल बनी थी। इस बार उन्होंने खड़गपुर सदर से टीएमसी के दिग्गज उम्मीदवार को 30 हजार से अधिक वोटों से हराकर अपनी ताकत दिखाई है।
वहीं महिला चेहरे के तौर पर अग्निमित्रा पॉल का नाम सबसे ऊपर है। पेशे से मशहूर फैशन डिजाइनर अग्निमित्रा को उनकी बेबाक और निडर छवि के लिए जाना जाता है। आसनसोल दक्षिण से जीत दर्ज करने वाली अग्निमित्रा ने पार्टी के महिला विंग को मजबूत करने में काफी मेहनत की है। यदि सुवेंदु मुख्यमंत्री बनते हैं, तो अग्निमित्रा पॉल को डिप्टी सीएम बनाकर भाजपा महिला वोटर्स को एक बड़ा संदेश देना चाहेगी।
रूपा गांगुली और समीक भट्टाचार्य: समीकरणों में फिट बैठते अनुभवी नेता
संभावितों की लिस्ट में ‘महाभारत’ की द्रौपदी के रूप में प्रसिद्ध हुई रूपा गांगुली का नाम भी काफी चर्चा में है। रूपा गांगुली लंबे समय से भाजपा से जुड़ी हैं और उन्होंने सोनारपुर दक्षिण सीट से टीएमसी की अरुंधति मैत्रा को 35 हजार वोटों के विशाल अंतर से शिकस्त दी है। उनकी लोकप्रियता और साफ-सुथरी छवि उन्हें डिप्टी सीएम पद की दौड़ में मजबूत बनाती है।
दूसरी ओर, संगठन के आदमी माने जाने वाले समीक भट्टाचार्य का नाम भी प्रबल दावेदारों में है। हालांकि समीक ने इस बार विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा है, लेकिन चर्चा है कि यदि सुवेंदु अधिकारी भवानीपुर सीट अपने पास रखते हैं और नंदीग्राम सीट छोड़ते हैं, तो समीक वहां से उपचुनाव लड़कर सदन में पहुंच सकते हैं। मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर उनके पास संगठन चलाने का गहरा अनुभव है, जो सरकार के लिए काफी मददगार साबित हो सकता है।
बंगाल के भविष्य का नया सवेरा
बीजेपी के लिए पश्चिम बंगाल केवल एक राज्य नहीं, बल्कि एक वैचारिक मिशन है। यहां मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्रियों का चयन न केवल 2026 के शासन को ध्यान में रखकर किया जाएगा, बल्कि आने वाले दशकों के लिए बंगाल में भाजपा की जड़ें जमाने के उद्देश्य से होगा। क्या सुवेंदु अधिकारी निर्विवाद रूप से कमान संभालेंगे? क्या बंगाल को पहली बार दो डिप्टी सीएम मिलेंगे? इन सभी सवालों के जवाब आज शाम तक स्पष्ट हो जाएंगे। फिलहाल, कोलकाता में हलचल तेज है और कार्यकर्ताओं के बीच भारी उत्साह देखा जा रहा है।
