PM Modi Letter: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को देश की महिलाओं के नाम एक विशेष पत्र लिखकर भारतीय राजनीति में एक नए युग की शुरुआत का संकेत दिया है। इस पत्र के माध्यम से उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार महिलाओं को उनका राजनीतिक हक दिलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इसे अब और टाला नहीं जा सकता।
PM Modi Letter: प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम पत्र: 2029 में दिखेगा ‘नारी शक्ति’ का प्रभाव
प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में विश्वास जताया कि यदि 2029 के लोकसभा और विभिन्न राज्यों के विधानसभा चुनाव पूर्ण महिला आरक्षण के साथ संपन्न होते हैं, तो यह भारतीय लोकतंत्र को पहले से कहीं अधिक सुदृढ़ और जीवंत बना देगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत की बेटियां आज अंतरिक्ष से लेकर खेल के मैदान तक हर क्षेत्र में कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। ऐसे में यह न्यायोचित है कि कानून बनाने वाली संस्थाओं (संसद और विधानसभाओं) में भी उनकी सक्रिय भागीदारी और संख्या बढ़े।
PM Modi Letter: सोशल मीडिया पर साझा किए विचार: दशकों पुराना वादा होगा पूरा
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर इस पत्र को साझा करते हुए लिखा कि यह ‘नारी शक्ति’ के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि दशकों से लंबित पड़े इस वादे को पूरा करने का समय आ गया है। प्रधानमंत्री ने नागरिकों से आग्रह किया कि वे अपने स्थानीय सांसदों को पत्र लिखकर उनका मनोबल बढ़ाएं, ताकि आगामी विशेष संसद सत्र में इस ऐतिहासिक संशोधन को सर्वसम्मति से पारित किया जा सके।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम: 2023 के कानून में बदलाव की आवश्यकता
विदित हो कि सितंबर 2023 में संसद ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पारित किया था, जिसका लक्ष्य विधायी संस्थाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करना था। हालांकि, पुराने प्रावधानों के अनुसार यह आरक्षण केवल जनगणना और परिसीमन की लंबी प्रक्रिया के बाद 2034 तक ही लागू हो पाता। सरकार ने महसूस किया कि महिलाओं को इतने लंबे समय तक इंतजार नहीं कराया जा सकता, इसलिए अब इस कानून में संशोधन के लिए विशेष सत्र बुलाया जा रहा है।
विधेयक में संशोधन और परिसीमन की नई प्रक्रिया
आरक्षण को 2029 के चुनावों से ही प्रभावी बनाने के लिए सरकार दो महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधन पेश करने वाली है। इसमें एक पृथक परिसीमन विधेयक भी शामिल होगा। इन संशोधनों के पारित होने के बाद आरक्षण की समयसीमा बदल जाएगी। सरकार ने यह भी साफ किया है कि वर्तमान व्यवस्था के तहत अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षण पहले की तरह जारी रहेगा, हालांकि इसमें अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए फिलहाल अलग से आरक्षण का कोई नया प्रावधान नहीं जोड़ा गया है।
लोकसभा का नया स्वरूप: 273 सीटों पर होगा महिलाओं का कब्ज़ा
जब ‘महिला आरक्षण अधिनियम’ के ये नए संशोधन संसद की मुहर के बाद प्रभावी होंगे, तो भारतीय संसद की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी। संशोधनों के बाद लोकसभा सीटों की कुल संख्या बढ़कर 816 होने का अनुमान है। इस बढ़ी हुई संख्या में से 33 प्रतिशत यानी कुल 273 सीटें विशेष रूप से महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षित होंगी। यह कदम न केवल महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण को सुनिश्चित करेगा, बल्कि देश की नीतियों के निर्धारण में आधी आबादी की आवाज को भी मजबूती देगा।
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