Cuba-US Crisis: कैरेबियाई द्वीप राष्ट्र क्यूबा और अमेरिका के बीच लंबे समय से चली आ रही तल्खी एक बार फिर चरम पर पहुंच गई है। क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कैनेल ने हाल ही में एक अंतरराष्ट्रीय समाचार चैनल को दिए साक्षात्कार में अमेरिका को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि क्यूबा की संप्रभुता के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ अमेरिका के लिए बहुत महंगा साबित हो सकता है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों में भारी अनिश्चितता बनी हुई है।
Cuba-US Crisis: ‘हम अपनी जान दे देंगे, लेकिन पीछे नहीं हटेंगे’: डियाज-कैनेल
एनबीसी न्यूज के कार्यक्रम ‘मीट द प्रेस’ में राष्ट्रपति डियाज-कैनेल ने अमेरिकी सैन्य मंसूबों पर करारा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका के पास क्यूबा पर हमला करने या उनकी चुनी हुई सरकार को सत्ता से बेदखल करने का कोई कानूनी या नैतिक आधार नहीं है। राष्ट्रपति ने भावुक और कड़े लहजे में कहा, “अगर अमेरिका ने सर्जिकल ऑपरेशन करने या राष्ट्रपति को अगवा करने जैसी कोई कोशिश की, तो क्यूबा का हर नागरिक अपने देश की रक्षा के लिए हथियार उठाएगा।” उन्होंने अपने राष्ट्रगान का हवाला देते हुए कहा कि वतन के लिए बलिदान देना ही हमारे लिए वास्तविक जीवन है और हम अपनी आजादी के लिए जान देने से पीछे नहीं हटेंगे।
Cuba-US Crisis: राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव से क्यूबा का साफ इनकार
अमेरिका और क्यूबा के बीच पर्दे के पीछे बातचीत की खबरें आ रही हैं, लेकिन राष्ट्रपति डियाज-कैनेल ने यह साफ कर दिया है कि किसी भी समझौते की कीमत क्यूबा की राजनीतिक व्यवस्था नहीं होगी। उन्होंने अमेरिका पर ‘शत्रुतापूर्ण नीति’ अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि क्यूबा बिना किसी पूर्व शर्त के बातचीत के लिए तैयार है, बशर्ते उसकी संप्रभुता का सम्मान किया जाए। उन्होंने दो टूक कहा, “जैसे हम अमेरिका से उसके सिस्टम में बदलाव की मांग नहीं करते, वैसे ही अमेरिका को भी हमारे आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है।” क्यूबा ने साफ कर दिया है कि वह अपनी कम्युनिस्ट विचारधारा और शासन प्रणाली से कोई समझौता नहीं करेगा।
ऊर्जा नाकेबंदी और गहराता आर्थिक संकट
क्यूबा वर्तमान में अपने इतिहास के सबसे गंभीर आर्थिक दौर से गुजर रहा है। राष्ट्रपति ने इस बदहाली के लिए सीधे तौर पर अमेरिका द्वारा लगाई गई ऊर्जा नाकेबंदी को जिम्मेदार ठहराया। इस प्रतिबंध के कारण क्यूबा में स्वास्थ्य सेवाएं, सार्वजनिक परिवहन और खाद्य उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। क्यूबा अपनी जरूरत का केवल 40 प्रतिशत ईंधन ही पैदा कर पाता है, और जनवरी में वेनेजुएला से तेल की आपूर्ति रुकने के बाद वहां अंधेरा छाने की स्थिति पैदा हो गई है। हालांकि, हाल ही में रूस से तेल की खेप पहुंचने से कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन संकट अभी भी बरकरार है।
ट्रंप के आरोपों पर क्यूबा का पलटवार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में क्यूबा सरकार पर भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन के गंभीर आरोप लगाए थे। डियाज-कैनेल ने इन बयानों को केवल आरोप नहीं, बल्कि सैन्य हमले की आहट और चेतावनी के रूप में लिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका क्यूबा के लोगों की इच्छाशक्ति को तोड़ने की कोशिश कर रहा है, लेकिन वे पूरी तरह तैयार हैं। क्यूबा का संदेश स्पष्ट है—आर्थिक मुश्किलें और प्रतिबंध चाहे जितने भी कड़े हों, वे अमेरिकी दबाव के सामने घुटने नहीं टेकेंगे।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर मंडराता खतरा
राष्ट्रपति डियाज-कैनेल ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका क्यूबा पर सैन्य बल का प्रयोग करता है, तो इसका असर केवल इन दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने कहा कि इससे पूरे कैरेबियाई और लैटिन अमेरिकी क्षेत्र की सुरक्षा और शांति खतरे में पड़ जाएगी। यह संघर्ष एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह अमेरिका की होगी। अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब इस बढ़ते तनाव को बड़ी चिंता के साथ देख रहा है, क्योंकि रूस और वेनेजुएला जैसे देश क्यूबा के समर्थन में खड़े नजर आ रहे हैं।
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