Stock Market Crash: भारतीय शेयर बाजार के लिए शुक्रवार, 13 मार्च 2026 का दिन किसी दुःस्वप्न से कम नहीं रहा। कल की भारी गिरावट के बाद आज भी बाजार लाल निशान के साथ खुला और खुलते ही धराशायी हो गया। ईरान युद्ध की बढ़ती आहट और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों ने निवेशकों के आत्मविश्वास को पूरी तरह झकझोर दिया है।
सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन सेंसेक्स और निफ्टी में शुरुआती मिनटों में ही बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिससे दलाल स्ट्रीट पर चारों तरफ केवल बिकवाली का माहौल नजर आ रहा है।
Stock Market Crash: सेंसेक्स और निफ्टी के ताजा आंकड़े: गिरावट का दौर जारी
आज सुबह बाजार खुलते ही 9:19 बजे तक सेंसेक्स (Sensex) करीब 611.65 अंक (0.80%) फिसलकर 75,422.77 के स्तर पर आ गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक निफ्टी (Nifty 50) भी 186.40 अंकों (0.79%) की गिरावट के साथ 23,452.75 पर ट्रेड करता दिखा। बाजार के जानकारों का कहना है कि यदि मिडिल ईस्ट से शांति की खबरें नहीं आईं, तो यह गिरावट और भी गहरा सकती है। निवेशकों में इस बात का डर है कि युद्ध लंबा खिंचने पर भारतीय कंपनियों के मुनाफे पर सीधा असर पड़ेगा।
Stock Market Crash: गुरुवार की तबाही: एक दिन में स्वाहा हुए ₹2 लाख करोड़
बाजार में गिरावट का सिलसिला कल यानी 12 मार्च से ही उग्र हो गया था। गुरुवार को सेंसेक्स 829.29 अंक टूटकर 76,034.42 पर बंद हुआ था। इस गिरावट ने महज कुछ घंटों के भीतर निवेशकों की करीब 2 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति खाक कर दी। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FIIs) ने भी भारतीय बाजार से अपना हाथ खींचना शुरू कर दिया है। आंकड़ों के मुताबिक, कल विदेशी निवेशकों ने बाजार से करीब 7,049.87 करोड़ रुपये के शेयर बेचकर पैसा निकाल लिया, जिससे घरेलू निवेशकों में घबराहट बढ़ गई है।
मिडिल ईस्ट संकट का बड़ा झटका: ₹23.44 लाख करोड़ की चपत
जब से अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले शुरू किए हैं, तब से भारतीय शेयर बाजार गहरे संकट के साये में है। पिछले कुछ ही दिनों में बीएसई सेंसेक्स 5,252 अंक (6.46%) से अधिक नीचे आ चुका है। इस युद्ध के कारण लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप 463 लाख करोड़ रुपये से गिरकर अब 440 लाख करोड़ रुपये के करीब सिमट गया है। 27 फरवरी 2026 से अब तक निवेशकों की कुल संपत्ति में 23.44 लाख करोड़ रुपये की भारी कमी आई है, जो भारतीय बाजार के इतिहास की सबसे बड़ी गिरावटों में से एक है।
तेल की सप्लाई और होर्मुज स्ट्रेट: गिरावट की असली वजह
भारतीय बाजार के इस पतन के पीछे सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की आपूर्ति पर मंडराता खतरा है। कच्चा तेल इस समय $100 प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर के आसपास मंडरा रहा है। आज ब्रेंट क्रूड $98 के आसपास बना हुआ है, जबकि कल इसने $100 का आंकड़ा पार कर लिया था। ईरान द्वारा ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ जैसे रणनीतिक रास्तों पर प्रतिबंध लगाने की धमकी से तेल की ग्लोबल सप्लाई चेन बाधित हो रही है। भारत अपनी तेल जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, इसलिए कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें महंगाई और राजकोषीय घाटे को बढ़ा सकती हैं।
एशियाई बाजारों में भी गिरावट: वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव
केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरा एशियाई बाजार इस समय युद्ध के डर से कांप रहा है। आज के कारोबार में जापान का Nikkei 1.1% और दक्षिण कोरिया का Kospi 1.3% तक टूट चुका है। ताइवान और हांगकांग के बाजारों में भी कमजोरी का सिलसिला जारी है। वैश्विक अनिश्चितता के कारण निवेशक अब इक्विटी से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश जैसे सोना (Gold) और डॉलर की ओर भाग रहे हैं, जिससे आने वाले दिनों में शेयर बाजार पर दबाव बना रहने की संभावना है।
