Headline
Tax Bill 2026
Tax Bill 2026 : हंगामे के बीच लोकसभा से टैक्स बिल 2026 पास, विपक्ष को चर्चा का मौका नहीं
Mohan Bhagwat On GenZ
Mohan Bhagwat On GenZ: GenZ को लेकर भागवत का बड़ा संदेश, बोले- GenZ एंटी नेशनल नहीं, युवाओं पर करना चाहिए भरोसा
NEET-UG Case
NEET-UG Case : NEET-UG मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई टाली, 19 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
PoK Election
PoK Election : PoK चुनाव में बवाल के बीच PML-N सबसे आगे, 10 साल बाद नवाज शरीफ की वापसी करीब
Parliament Special Session
Parliament Special Session : संसद विशेष सत्र की अटकलों पर रिजिजू का जवाब, सरकार ने प्रस्ताव से किया इनकार
Morning Health Tips
Morning Health Tips: खाली पेट इन 3 चीजों से बढ़ाएं एनर्जी, न्यूट्रिशनिस्ट का फिटनेस मंत्र
Panchmukhi Hanuman
Panchmukhi Hanuman : पंचमुखी हनुमान अवतार की रहस्यमयी कथा, अहिरावण वध और पांच मुखों का महत्व
Jantar Mantar Terror Plot
Jantar Mantar Terror Plot: जंतर-मंतर आतंकी हमले की साजिश नाकाम, ISI मॉड्यूल का खुलासा, 9 आरोपी गिरफ्तार
RBI Repo Rate Update
RBI Repo Rate Update: RBI ने Repo Rate 5.25% पर रखा स्थिर, लोन EMI में राहत नहीं

Om Birla No Confidence: संसद में विपक्ष को लगा बड़ा झटका, स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ध्वनि मत से गिरा!

Om Birla No Confidence

Om Birla No Confidence : भारतीय संसदीय लोकतंत्र के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय तब जुड़ा, जब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव ध्वनि मत से खारिज कर दिया गया। पिछले दो दिनों से सदन में इस मुद्दे पर तीखी बहस और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा था। विपक्ष ने स्पीकर की कार्यशैली और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए थे, लेकिन अंततः सत्ता पक्ष के संख्या बल और तर्कों के सामने यह प्रस्ताव टिक नहीं सका। प्रस्ताव के गिरने के साथ ही यह साफ हो गया कि ओम बिरला अपने पद पर बने रहेंगे और सदन की कार्यवाही का संचालन पूर्ववत करते रहेंगे।

Om Birla No Confidence : अमित शाह का विपक्ष पर प्रहार: “सदन कोई बाजार नहीं”

बहस के अंतिम चरण में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कमान संभाली और स्पीकर का पुरजोर बचाव किया। शाह ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि सदन की कार्यवाही नियमों और आपसी भरोसे के आधार पर चलती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्पीकर सदन का एक ‘न्यूट्रल कस्टोडियन’ होता है, जो सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों का प्रतिनिधित्व करता है। शाह ने तंज कसते हुए कहा, “यह सदन कोई मार्केटप्लेस (बाजार) नहीं है; यहाँ सदस्यों से अपेक्षा की जाती है कि वे स्थापित नियमों और प्रक्रियाओं के दायरे में रहकर अपनी बात रखें।” उन्होंने स्पष्ट किया कि बिरला ने हमेशा नियमों का पालन सुनिश्चित किया है।

Om Birla No Confidence : विपक्ष का आरोप: “सत्ता के अत्याचार का प्रतीक बनी चेयर”

अविश्वास प्रस्ताव पेश करने वाले कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद और उनके सहयोगियों ने स्पीकर पर पक्षपात का आरोप लगाया। आरजेडी सांसद अभय कुमार सिन्हा ने बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि वर्तमान में चेयर सदन की स्वतंत्रता के बजाय सत्ता पक्ष के ‘अत्याचार’ का प्रतीक बनती जा रही है। उन्होंने उन ‘काले दिनों’ का जिक्र किया जब एक ही दिन में 140 से अधिक सांसदों को निलंबित कर दिया गया था। सिन्हा ने तर्क दिया कि असली लोकतंत्र वह है जहाँ कमजोर की आवाज भी सुनी जाए, लेकिन विपक्ष जब भी बोलने की कोशिश करता है, तो चेयर की ओर से केवल “नहीं, नहीं” सुनाई देता है।

कैमरा एंगल और भाषणों में रुकावट पर तकरार

जेएमएम सांसद विजय कुमार हंसदक ने सदन के भीतर तकनीकी पक्षपात का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि जब भी विपक्ष का कोई बड़ा नेता बोलना शुरू करता है, तो सदन का कैमरा अक्सर दूसरी दिशा में घुमा दिया जाता है या उसे बोलने से रोक दिया जाता है। उन्होंने इसे एक गलत परंपरा करार दिया। वहीं, एनसीपी (एसपी) के सांसद बजरंग मनोहर सोनवाने ने एक दिलचस्प उदाहरण देते हुए कहा, “चेयर की कार्यप्रणाली एक टेबल फैन की तरह हो गई है, जो सिर्फ एक तरफ (दाहिनी ओर) हवा देती है। जब स्पीकर दाईं ओर देखते हैं तो उनके चेहरे पर मुस्कान होती है, लेकिन बाईं ओर देखते ही वे सख्त हो जाते हैं।”

लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए लाया गया प्रस्ताव

विपक्षी सांसदों ने स्वीकार किया कि उन्हें पहले से ही इस प्रस्ताव के विफल होने का आभास था, क्योंकि उनके पास पर्याप्त संख्या बल नहीं था। हालांकि, उनका मुख्य उद्देश्य मतदान जीतना नहीं, बल्कि देश के सामने उन चिंताओं को रखना था जो संसद के भीतर घटते लोकतांत्रिक स्थान को लेकर पैदा हुई हैं। विपक्षी नेताओं ने स्पष्ट किया कि यह किसी व्यक्ति विशेष पर हमला नहीं था, बल्कि संसदीय गरिमा को पुनर्जीवित करने का एक प्रयास था। अब जबकि प्रस्ताव गिर चुका है, सत्ता पक्ष इसे अपनी नैतिक जीत मान रहा है, जबकि विपक्ष ने इसे अपने विरोध दर्ज कराने का एक प्रभावी मंच बताया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top
महादेव के रंग में रंगें नाखून उत्तराखंड का रहस्यमयी हिल स्टेशन घर की सूनी दीवार को बनाएं हराभरा ग्रीन साड़ी में रॉयल और ट्रेंडी दिखने के लिए अपनाएं ये तरीके पिंपल्स वाली स्किन के लिए मेकअप के आसान टिप्स