अंकुरित अनाज को स्वास्थ्य का खजाना माना जाता है। ये फाइबर, प्रोटीन, एंजाइम और जरूरी विटामिनों से भरपूर होते हैं। लेकिन अक्सर लोग यह तय नहीं कर पाते कि इन्हें कच्चा खाएं या उबाल कर। यहां हम 6 बिंदुओं में यह स्पष्ट कर रहे हैं कि अंकुरित अनाज का सेवन कैसे करें ताकि उसका पोषण पूरी तरह शरीर को मिल सके।
कच्चे अंकुरित अनाज-सबसे प्राकृतिक रूप
अधिकांश पोषण विशेषज्ञ मानते हैं कि अंकुरित अनाज को कच्चा खाने से इसके सभी प्राकृतिक एंजाइम और विटामिन्स शरीर को मिलते हैं। कच्चे अंकुरित मूंग, चना, अल्फाल्फा या मैथी में फाइबर, एंजाइम और विटामिन C प्रचुर मात्रा में होता है। हालांकि ध्यान देना जरूरी है कि कच्चे अनाज ताजे और अच्छी तरह धोए गए हों, अन्यथा इनमें बैक्टीरिया पनप सकते हैं। कच्चा खाने के लिए इन्हें नींबू, कटा प्याज, टमाटर और थोड़ा काला नमक मिलाकर सलाद के रूप में सेवन करें। यह नाश्ते या शाम की भूख के लिए एक आदर्श विकल्प है। जिन लोगों को गैस या अपच की समस्या होती है, उन्हें थोड़ी मात्रा से शुरुआत करनी चाहिए।
उबाल कर खाने के फायदे-जब पाचन हो कमजोर
यदि किसी व्यक्ति को पाचन संबंधी समस्या है, जैसे गैस, अपच या पेट भारी लगना, तो अंकुरित अनाज को हल्का उबालकर खाना बेहतर होता है। हल्की भाप या 2-3 मिनट उबालने से ये नरम हो जाते हैं और पाचन में आसान हो जाते हैं। उबालने से कुछ पोषक तत्व (जैसे विटामिन C) कम हो सकते हैं, लेकिन यह तरीका बुजुर्गों, बच्चों और रोगियों के लिए उपयुक्त है। इन्हें नमक, नींबू और थोड़ा सा जीरा या काली मिर्च डालकर स्वादिष्ट बनाया जा सकता है। आप इसे सूप, उपमा या पोहा के साथ भी मिला सकते हैं। ध्यान रहे कि ज्यादा देर उबालने से इनका पोषण कम हो सकता है।
अंकुरित अनाज कब और कितनी मात्रा में खाएं?
अंकुरित अनाज का सबसे सही समय सुबह का नाश्ता है। इस समय शरीर की पाचन शक्ति सबसे ज्यादा सक्रिय होती है। सुबह खाली पेट या नाश्ते में एक कटोरी अंकुरित अनाज लेना शरीर को ऊर्जा देता है और दिनभर पेट साफ रखने में मदद करता है। एक बार में लगभग 50-100 ग्राम अंकुरित अनाज पर्याप्त होता है। ज्यादा मात्रा में खाना गैस या अपच का कारण बन सकता है। सप्ताह में 4-5 दिन अंकुरित अनाज खाना पर्याप्त है। विविधता बनाए रखने के लिए कभी मूंग, कभी चना, कभी रागी या मैथी अंकुरित करें। ज्यादा मात्रा या हर दिन खाना कुछ लोगों में पोषक असंतुलन पैदा कर सकता है।
किन लोगों को उबालकर खाना चाहिए?
कुछ लोगों को अंकुरित अनाज कच्चा नहीं खाना चाहिए। जिनका पाचन कमजोर है, जिनका पेट जल्दी खराब हो जाता है, या जो लंबे समय से बीमार हैं, उन्हें हमेशा अंकुरित अनाज को उबालकर या भाप में पकाकर ही खाना चाहिए। इसके अलावा छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के लिए भी उबला हुआ अंकुरित अनाज बेहतर होता है क्योंकि यह अधिक सुपाच्य होता है। जिन लोगों को थायरॉइड की समस्या है, उन्हें सोया जैसे अंकुरित अनाज से परहेज करना चाहिए। यदि आप किसी रोग के लिए दवा ले रहे हैं, तो डॉक्टर से पूछकर ही इसका सेवन करें।
अंकुरित अनाज में क्या मिलाकर खाना चाहिए?
अंकुरित अनाज में स्वाद और पोषण बढ़ाने के लिए आप कई प्राकृतिक चीजें मिला सकते हैं। नींबू रस, कटा हुआ टमाटर, खीरा, प्याज, पुदीना या धनिया जैसे ताजे हरे पत्ते इसमें स्वाद और पोषण दोनों बढ़ाते हैं। आप चाहें तो थोड़ा सा काला नमक, काली मिर्च और भुना हुआ जीरा भी मिला सकते हैं। कुछ लोग अंकुरित अनाज में दही या छाछ मिलाकर रायते की तरह भी खाते हैं, जो गर्मी में बहुत लाभकारी होता है। हल्के नारियल तेल या घी में भूनकर भी स्वादिष्ट नाश्ता तैयार किया जा सकता है। याद रखें कि अंकुरित अनाज के साथ ज्यादा मसाले या फ्राई चीजें नहीं मिलानी चाहिए।
अंकुरित अनाज बनाने का सही तरीका
अच्छे अंकुरण के लिए सबसे पहले अनाज को रातभर पानी में भिगो दें (लगभग 8-10 घंटे)। इसके बाद पानी निकालकर किसी सूती कपड़े में बांध दें और गर्म स्थान पर 12–24 घंटे रखें। हर 6-8 घंटे में कपड़ा खोलकर हल्का गीला करें ताकि अंकुरण ठीक से हो। मूंग, चना, मैथी, रागी, गेहूं आदि को अंकुरित किया जा सकता है। अंकुर उगते ही इन्हें तुरंत खा लेना चाहिए क्योंकि ज्यादा देर रखने से इनमें बैक्टीरिया पनप सकते हैं। ताजे और सफेद अंकुर वाले अनाज ही चुनें, जिनमें बदबू या काले धब्बे न हों।
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