PM Modi-Yogi Meeting : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होती दिखाई दे रही हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। दोनों नेताओं की यह बैठक प्रधानमंत्री आवास पर हुई और करीब एक घंटे तक चली। हालांकि, बैठक में किन मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। चुनावी तैयारियों के बीच हुई इस मुलाकात को संगठन और सरकार से जुड़े मामलों के संदर्भ में देखा जा रहा है।
चुनावी तैयारी को लेकर बीजेपी का बूथ फोकस
उत्तर प्रदेश में बीजेपी ने विधानसभा चुनाव की तैयारियों के तहत बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने पर जोर बढ़ाया है। पार्टी के आंतरिक आकलन के अनुसार, करीब 18,900 ऐसे बूथ चिन्हित किए गए हैं, जहां 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को बढ़त या जीत मिली थी, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में तस्वीर बदल गई। पार्टी अब इन बूथों पर दोबारा संगठनात्मक सक्रियता बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है।
ग्रामीण इलाकों के बूथों पर विशेष नजर
रिपोर्टों के मुताबिक, इन करीब 18,900 बूथों में लगभग 80 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। अवध और पूर्वांचल में ऐसे बूथों की संख्या अधिक बताई गई है। बीजेपी के आंतरिक विश्लेषण में इन इलाकों में मतदाताओं के रुझान में आए बदलाव और स्थानीय स्तर पर संगठन की स्थिति का अध्ययन किया जा रहा है। इसके आधार पर पार्टी बूथवार अपनी रणनीति तैयार करने की कोशिश कर रही है।
सामाजिक समीकरण को संगठन से जोड़ने की तैयारी
बीजेपी की प्रस्तावित रणनीति में बूथ समितियों को स्थानीय सामाजिक संपर्क का प्रमुख माध्यम बनाने पर जोर है। पार्टी की योजना के मुताबिक, किसी बूथ क्षेत्र में जिन प्रमुख सामाजिक समूहों की मौजूदगी है, उन्हें संगठनात्मक जिम्मेदारियों में प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की जाएगी। उद्देश्य यह है कि अलग-अलग समुदायों के साथ स्थानीय स्तर पर संवाद और संपर्क को व्यवस्थित किया जा सके।
जातीय समीकरण को लेकर पार्टी का मंथन
बीजेपी के प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े ने सितंबर में प्रदेश संगठन के नेताओं और पदाधिकारियों के साथ बैठकें की हैं। इन बैठकों में संगठन की स्थिति और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर चर्चा हुई। रिपोर्टों के अनुसार, पार्टी के आकलन में जातीय समीकरण को महत्वपूर्ण चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है। साथ ही विपक्ष की ओर से PDA, संविधान और आरक्षण जैसे मुद्दों को उठाए जाने की संभावना पर भी संगठनात्मक स्तर पर चर्चा हुई है।
अवध और पूर्वांचल में ज्यादा बूथ प्रभावित
बीजेपी के बूथवार विश्लेषण में अवध और पूर्वांचल को महत्वपूर्ण क्षेत्रों के रूप में चिन्हित किया गया है। 2022 में बीजेपी ने अवध क्षेत्र की 154 विधानसभा सीटों में से 101 पर जीत दर्ज की थी, जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव में इन सीटों पर पार्टी की बढ़त घटकर 51 रह गई। इसी तरह पूर्वांचल की 102 विधानसभा सीटों में 2022 में बीजेपी ने 53 सीटें जीती थीं, जबकि 2024 में वह 36 सीटों पर आगे रही।
स्थानीय मुद्दों और सामाजिक बदलाव का अध्ययन
पार्टी के आकलन में केवल जातीय समीकरण ही नहीं, बल्कि स्थानीय मुद्दों और क्षेत्रीय परिस्थितियों को भी महत्व दिया जा रहा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, रुहेलखंड और बुंदेलखंड में भी 2022 की तुलना में 2024 के दौरान बीजेपी की स्थिति में बदलाव दर्ज किया गया। ऐसे में पार्टी बूथ स्तर पर यह समझने की कोशिश कर रही है कि किन क्षेत्रों में संगठन, स्थानीय मुद्दों या सामाजिक समीकरणों के कारण चुनावी प्रदर्शन प्रभावित हुआ।
बूथ कमेटियों के जरिए बढ़ेगा स्थानीय संपर्क
बीजेपी की बूथ आधारित रणनीति का मुख्य जोर स्थानीय संगठन को सक्रिय करने पर है। पार्टी पहले भी उत्तर प्रदेश में बूथ समितियों में क्षेत्र के प्रमुख सामाजिक समूहों के कार्यकर्ताओं को शामिल करने की व्यवस्था पर काम कर चुकी है। अब आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए बूथ स्तर पर संगठनात्मक ढांचे और स्थानीय संपर्क को और मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।
चुनाव से पहले संगठन विस्तार पर जोर
उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों वाले चुनाव से पहले बीजेपी का फोकस राज्यव्यापी रणनीति के साथ-साथ बूथवार समीक्षा पर है। 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को उत्तर प्रदेश में 33 सीटें मिली थीं, जबकि समाजवादी पार्टी ने 37 सीटें जीती थीं। इसके बाद बीजेपी ने बूथ स्तर पर हुए बदलावों का विस्तृत विश्लेषण शुरू किया है। अब योगी सरकार और संगठन के स्तर पर चुनावी तैयारियों को आगे बढ़ाने के साथ स्थानीय सामाजिक संपर्क और बूथ प्रबंधन को भी अहम हिस्सा बनाया जा रहा है।
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