CEC Gyanesh Kumar : चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा है। शनिवार को भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस और राहुल गांधी की ओर से चुनाव आयोग पर लगाए जा रहे आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि एक मीडिया रिपोर्ट के आधार पर संवैधानिक संस्था पर गंभीर आरोप लगाना उचित नहीं है।
रविशंकर प्रसाद ने आरोपों को बताया निराधार
रविशंकर प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि विपक्ष, विशेष रूप से कांग्रेस और राहुल गांधी, चुनाव आयोग के खिलाफ लगातार आरोप लगा रहे हैं। उनके मुताबिक आयोग ने इस पूरे मामले पर आधिकारिक प्रेस नोट जारी करके अपना पक्ष स्पष्ट किया है। उन्होंने यह भी कहा कि आयोग की बैठक में तीनों चुनाव आयुक्त मौजूद थे।
राहुल गांधी की राजनीतिक शैली पर बीजेपी का हमला
भाजपा सांसद ने राहुल गांधी को लेकर भी तीखी राजनीतिक टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी चुनाव आयोग और सरकार से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता के बजाय राजनीतिक आरोपों को आगे बढ़ा रहे हैं। रविशंकर प्रसाद ने उन्हें “नॉन सीरियस पॉलिटिशियन” कहा। यह टिप्पणी भाजपा नेता का राजनीतिक आकलन है, जिसे कांग्रेस और राहुल गांधी के पक्ष से अलग देखा जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री पद को लेकर भी साधा निशाना
रविशंकर प्रसाद ने राहुल गांधी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर राजनीतिक टिप्पणी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनके बयानों में प्रधानमंत्री नहीं बन पाने की निराशा दिखाई देती है। उन्होंने राहुल गांधी के संसद और विदेश नीति से जुड़े बयानों का भी उल्लेख किया। इस दौरान उन्होंने विपक्षी दलों के साथ राहुल गांधी के राजनीतिक संबंधों को लेकर भी सवाल उठाए।
विपक्षी गठबंधन को लेकर भी टिप्पणी
भाजपा नेता ने विपक्षी दलों को राहुल गांधी के साथ राजनीतिक रणनीति को लेकर भी निशाना बनाया। उन्होंने दावा किया कि जिन राजनीतिक दलों ने अलग-अलग समय पर कांग्रेस या राहुल गांधी के साथ गठबंधन किया, उनके राजनीतिक समीकरण बाद में बदले। हालांकि, ये रविशंकर प्रसाद की राजनीतिक टिप्पणियां हैं और इन्हें भविष्य के चुनावी परिणाम या गठबंधन की स्थिति के बारे में निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता।
SIR पर चुनाव आयोग के पक्ष का हवाला
रविशंकर प्रसाद ने चुनाव आयोग के उस स्पष्टीकरण का स्वागत किया, जिसमें आयोग ने कहा है कि उसके फैसले पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए हैं। आयोग के अनुसार, संस्थागत निर्णय लेने से पहले अलग-अलग विचार और टिप्पणियां सामने आना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग ने यह भी कहा कि पिछले एक वर्ष में उसके आधिकारिक फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
चुनाव आयोग ने मतभेदों को बताया प्रक्रिया का हिस्सा
चुनाव आयोग ने हाल में सामने आई रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि तीनों आयुक्तों या आयोग के अधिकारियों की ओर से अलग-अलग सुझाव या टिप्पणियां आना निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग ने कहा कि केवल कुछ आंतरिक टिप्पणियों को आधार बनाकर पूरी प्रक्रिया की तस्वीर देखना उचित नहीं होगा। उसके मुताबिक SIR समेत कई चुनावी सुधारों और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों को पूर्ण आयोग ने मंजूरी दी है।
विपक्ष आयोग से मांग रहा है जवाब
दूसरी ओर, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मामलों में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
SIR को लेकर राजनीतिक बहस हुई तेज
SIR को लेकर जारी विवाद की शुरुआत चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों की रिपोर्ट सामने आने के बाद और तेज हुई। एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि दो चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में कई बार SIR से जुड़े निर्णयों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। आयोग ने इसके जवाब में कहा कि अलग-अलग विचार संस्थागत विचार-विमर्श का हिस्सा हैं और अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए।
चुनाव आयोग के मुद्दे पर बढ़ा राजनीतिक टकराव
फिलहाल चुनाव आयोग, SIR और CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। भाजपा आयोग के आधिकारिक स्पष्टीकरण को आधार बनाकर विपक्ष के आरोपों को चुनौती दे रही है, जबकि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल आयोग से अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक बहस का प्रमुख केंद्र बना रह सकता है।
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