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K Annamalai : साउथ में BJP को लगा अब तक का सबसे बड़ा झटका! के. अन्नामलाई ने दिया इस्तीफा

K Annamalai

K Annamalai : तमिलनाडु की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) को एक बहुत बड़ा झटका लगा है। तमिलनाडु भाजपा के कद्दावर नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। जानकारी के अनुसार, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने उनका यह इस्तीफा स्वीकार भी कर लिया है। आगामी राज्य विधानसभा चुनावों के मद्देनजर खुद को दरकिनार किए जाने से बेहद असंतुष्ट अन्नामलाई अब से कुछ ही देर में अपने भविष्य को लेकर एक बड़ा ऐलान करने वाले हैं। उनके द्वारा सोशल मीडिया पर किए गए एक ताजा पोस्ट ने चेन्नई की प्रांतीय राजनीति से लेकर दिल्ली के केंद्रीय गलियारों तक जबरदस्त सियासी हलचल पैदा कर दी है।

क्या अन्नामलाई बनाने जा रहे हैं एक नया राजनीतिक मोर्चा?

अन्नामलाई के इस अप्रत्याशित कदम के बाद अब हर तरफ यह सवाल तैर रहा है कि आखिर उनके मन में क्या चल रहा है? राजनीतिक सूत्रों और गलियारों में चल रही चर्चाओं की मानें तो वे तमिलनाडु में एक नई राजनीतिक पार्टी के गठन की पुरजोर तैयारी कर रहे हैं। खबरों के अनुसार, अन्नामलाई अब किसी के अधीन काम करने के बजाय स्वतंत्र रूप से चुनावी मैदान में उतरने की योजना बना चुके हैं। इस बड़े फैसले से ठीक पहले, उन्होंने बीती 2 जून को देश के गृह मंत्री अमित शाह से एक बेहद महत्वपूर्ण मुलाकात भी की थी।

सूत्रों का दावा है कि अन्नामलाई भाजपा नेतृत्व के साथ बिना किसी कड़वाहट या टकराव के, एक सम्मानजनक विदाई चाहते थे। इस गोपनीय बैठक के दौरान उन्होंने शाह के सामने तमिलनाडु भाजपा की जमीनी हकीकत, अंदरूनी गुटबाजी और अपनी व्यक्तिगत चिंताओं को बहुत ही बेबाकी से साझा किया था। चूंकि अन्नामलाई को राज्य में एक युवा, ऊर्जावान और आक्रामक चेहरे के रूप में देखा जाता है, इसलिए उनका यह अगला कदम न केवल भाजपा बल्कि पूरे तमिलनाडु के आगामी राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह से उलट-पुलट कर सकता है।

AIADMK के साथ पार्टी गठबंधन पर तीखा मतभेद

अन्नामलाई की भाजपा से गहरी नाराजगी के पीछे कई बड़े कारण हैं, जिनमें सबसे प्रमुख अन्नाद्रमुक (AIADMK) के साथ पार्टी का गठबंधन है। वे शुरुआत से ही राज्य में AIADMK के साथ किसी भी तरह के समझौते के सख्त खिलाफ रहे हैं। साल 2024 के लोकसभा चुनावों में उनके दबाव के कारण भाजपा ने अकेले चुनाव लड़ा था और AIADMK राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) से बाहर रही थी। उस चुनाव में भाजपा ने 23 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे और पार्टी को करीब 11.24 प्रतिशत का एक अच्छा वोट शेयर भी मिला। लेकिन विडंबना यह रही कि भाजपा राज्य में खाता खोलने में नाकाम रही, यहां तक कि कोयंबटूर जैसी हाई-प्रोफाइल सीट से खुद अन्नामलाई को भी शिकस्त का सामना करना पड़ा।

प्रदेश अध्यक्ष पद से अचानक हटाया जाना

के. अन्नामलाई ने साल 2021 से लेकर 2025 तक तमिलनाडु भाजपा के अध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएं दी थीं। उनके आक्रामक तेवरों और कड़ी मेहनत की बदौलत ही राज्य में भाजपा की लोकप्रियता और जमीनी पकड़ काफी मजबूत हुई, जिससे वे एक बड़े नेता बनकर उभरे। हालांकि, अप्रैल 2025 में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने AIADMK के साथ दोबारा रिश्ते सुधारने की कवायद में अन्नामलाई को पद से हटाकर नैनार नागेंद्रन को नया अध्यक्ष नियुक्त कर दिया। राजनीतिक अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, AIADMK के महासचिव एडप्पाडी के. पलानीस्वामी ने भाजपा के सामने गठबंधन की पहली शर्त ही यह रखी थी कि अन्नामलाई को पद से हटाया जाए। पलानीस्वामी पूर्व में अन्नामलाई द्वारा AIADMK के खिलाफ की गई तीखी बयानबाजी और आलोचनाओं से बेहद खफा थे, जिसने दोनों दलों के रिश्तों में खटास ला दी थी।

2026 के विधानसभा चुनावों में लगातार उपेक्षा

साल 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के प्रचार और रणनीतिक तैयारियों के दौरान भी अन्नामलाई के भीतर का असंतोष साफ तौर पर देखा गया। खबरों के मुताबिक, पार्टी के तमाम अहम और नीतिगत फैसले लेने वाली कमेटियों से उन्हें पूरी तरह से साइडलाइन कर दिया गया था। शीर्ष नेतृत्व द्वारा की जा रही इस अनदेखी से वे इस कदर आहत और नाराज थे कि उन्होंने आगामी विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार के तौर पर उतरने से भी साफ तौर पर मना कर दिया था।

केंद्र की नीतिगत योजनाओं पर वैचारिक मतभेद

पार्टी के अंदरूनी मामलों के अलावा, के. अन्नामलाई ने भाजपा की कुछ केंद्रीय नीतियों के खिलाफ भी खुलकर स्टैंड लिया था। उदाहरण के तौर पर, उन्होंने तमिलनाडु के सरकारी स्कूलों में केंद्र सरकार द्वारा ‘त्रि-भाषा नीति’ को लागू करने की टाइमिंग पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को पत्र लिखकर इस अधिसूचना को तुरंत रद्द करने की मांग की थी। इससे यह स्पष्ट संदेश गया कि राज्य के हितों और जनभावनाओं से जुड़े मुद्दों पर वे अपनी ही पार्टी की सरकार के खिलाफ जाने से भी पीछे नहीं हटेंगे।

चुनावी और सांगठनिक रणनीति पर गहरा टकराव

अंततः, सीटों के बंटवारे, उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया और चुनावी प्रबंधन को लेकर भाजपा के केंद्रीय आलाकमान और अन्नामलाई के बीच वैचारिक मतभेद लगातार बढ़ते चले गए। गठबंधन के मैनेजमेंट को लेकर पार्टी की नीतियां अन्नामलाई को रास नहीं आ रही थीं, जिसके कारण दोनों पक्षों के बीच की खाई लगातार चौड़ी होती गई और अंततः इसका परिणाम उनके इस्तीफे के रूप में सामने आया।

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