RBI Repo Rate : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार (5 जून 2026) को चालू वित्त वर्ष की अपनी महत्वपूर्ण मौद्रिक नीति समीक्षा के नतीजों का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। रिजर्व बैंक के नए गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने आम जनता और कर्जदारों को एक बार फिर बड़ी राहत प्रदान की है। केंद्रीय बैंक ने नीतिगत ब्याज दरों यानी रेपो रेट (Repo Rate) में कोई भी बदलाव न करते हुए इसे 5.25 प्रतिशत के पुराने स्तर पर ही स्थिर रखने का सर्वसम्मत निर्णय लिया है। आरबीआई के इस बड़े और राहत भरे फैसले का सीधा और सकारात्मक मतलब यह है कि वर्तमान में चल रहे आपके होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की मासिक किस्तें (EMI) फिलहाल स्थिर रहेंगी और उनमें किसी भी प्रकार की बढ़ोतरी नहीं होगी।
वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था के बुनियादी पहलू बेहद मजबूत
मौद्रिक नीति के फैसलों की घोषणा करते हुए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि पिछले कुछ समय से दुनिया भर के आर्थिक परिदृश्य में काफी ज्यादा उतार-चढ़ाव और अस्थिरता देखने को मिली है। वैश्विक स्तर पर मुख्य व्यापारिक समुद्री रास्तों में व्यवधान आने के कारण अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन (आपूर्ति श्रृंखला) बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे बाजारों में अनिश्चितता बढ़ी है। इसके बावजूद, गवर्नर ने देश को आश्वस्त करते हुए कहा, “मैं शुरुआत में ही इस बात पर विशेष जोर देना चाहता हूं कि वैश्विक स्तर पर मची इस भारी उथल-पुथल के बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था के सभी बुनियादी पहलू पिछली तिमाहियों की तुलना में बहुत ज्यादा मजबूत, टिकाऊ और बेहतर स्थिति में हैं। हमें पूरा भरोसा है कि हमारी मजबूत नीतियां इन बाहरी झटकों का सामना बेहद कम नुकसान के साथ करने में पूरी तरह सक्षम हैं।”
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संकट
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने दुनिया के मौजूदा हालातों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में लगातार जारी गंभीर भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था पर अनिश्चितता के काले बादल गहरे होते जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और ऊर्जा की कीमतों में आ रही तेज बढ़ोतरी के साथ-साथ ग्लोबल लॉजिस्टिक्स में आ रही रुकावटें सीधे तौर पर दुनिया भर की आर्थिक गतिविधियों को मंद कर रही हैं। गवर्नर ने सचेत किया कि ऐसी चुनौतीपूर्ण स्थिति में दुनिया की बड़ी और विकसित अर्थव्यवस्थाओं के प्रमुख केंद्रीय बैंक अपनी मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए आने वाले दिनों में ब्याज दरों को और अधिक बढ़ाने जैसा कड़ा कदम उठा सकते हैं।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दम पर शेयर बाजार में बूम, पर बॉन्ड मार्केट अब भी सतर्क
वैश्विक वित्तीय बाजारों की मौजूदा स्थिति का विश्लेषण करते हुए आरबीआई गवर्नर ने एक महत्वपूर्ण अंतर को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक को लेकर बनी अत्यधिक सकारात्मकता और उम्मीदों के दम पर शेयर बाजार तो लगातार रिकॉर्ड ऊंचाई की तरफ तेजी से भाग रहे हैं, लेकिन इसके ठीक उलट सरकारी बॉन्ड मार्केट (Bond Market) में भारी सतर्कता और मंदी का माहौल बना हुआ है। बॉन्ड मार्केट के निवेशक वैश्विक स्तर पर महंगाई के दोबारा सिर उठाने के डर और विभिन्न देशों पर बढ़ते भारी सार्वजनिक कर्ज के बोझ को लेकर काफी ज्यादा आशंकित हैं। इसके अलावा, सुरक्षित निवेश के विकल्पों (जैसे सोना या डॉलर) की मांग आसमान छूने के कारण विदेशी मुद्रा बाजार (Forex Market) में भारी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, जिससे कई उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं की घरेलू करेंसी पर दबाव साफ नजर आ रहा है।
साल 2025 में मिली थी ब्याज दरों से बड़ी राहत, अब लगातार तीसरी बार दरें स्थिर
यदि हम अतीत के आंकड़ों पर नजर डालें तो भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछले साल यानी 2025 में आम आदमी और उद्योगों को भारी राहत देते हुए विभिन्न चरणों में नीतिगत ब्याज दरों में कुल 125 बेसिस पॉइंट (1.25%) की एक बड़ी और ऐतिहासिक कटौती की थी। इस कटौती से लोन काफी सस्ते हो गए थे, लेकिन अब वैश्विक आर्थिक समीकरण पूरी तरह बदल चुके हैं। भू-राजनीतिक संकट और महंगाई के जोखिम को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने इस साल बेहद सतर्क रुख अपनाया है। यही वजह है कि इससे पहले हुई फरवरी 2026 और अप्रैल 2026 की द्विमासिक समीक्षा बैठकों में भी रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों को यथावत रखा था, और अब जून की इस बैठक में भी लगातार तीसरी बार दरों को स्थिर रखकर ‘वेट एंड वॉच’ की नीति अपनाई गई है।
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