Rajya Sabha Election 2026: देश में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को गति देते हुए चुनाव आयोग ने सोमवार को एक बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने देश की 27 राज्यसभा सीटों और 3 महत्वपूर्ण राज्यों की विधान परिषदों की खाली हो रही सीटों के लिए औपचारिक रूप से अधिसूचना (नोटिफिकेशन) जारी कर दी है। इस घोषणा के साथ ही संबंधित राज्यों में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। चुनाव आयोग द्वारा तय किए गए कार्यक्रम के अनुसार, इन सभी महत्वपूर्ण सीटों के लिए मतदान 18 जून को आयोजित किया जाएगा। मतदान की प्रक्रिया सुबह 8 बजे से शुरू होकर शाम 4 बजे तक चलेगी, जिससे सभी जन प्रतिनिधियों को अपने मताधिकार का प्रयोग करने का पर्याप्त समय मिल सके।
उसी दिन शाम को शुरू होगी मतगणना, परिणाम भी होंगे साफ
चुनाव आयोग ने निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए मतदान और मतगणना की तारीख एक ही रखी है। 18 जून को शाम 4 बजे मतदान समाप्त होने के ठीक एक घंटे बाद, यानी शाम 5 बजे से मतों की गिनती का काम शुरू कर दिया जाएगा। इस प्रक्रिया से चुनाव के परिणाम उसी रात तक स्पष्ट होने की पूरी संभावना है। राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है, क्योंकि इन सीटों के परिणाम राज्यों के साथ-साथ केंद्र की राजनीति में भी संख्या बल के लिहाज से बेहद असरदार साबित हो सकते हैं।
नामांकन से लेकर नाम वापसी तक का पूरा टाइमटेबल
चुनाव आयोग द्वारा जारी विस्तृत चुनावी कार्यक्रम के मुताबिक, उम्मीदवार 1 जून सुबह 11 बजे से अपना नामांकन पत्र दाखिल कर सकते हैं। नामांकन पत्र जमा करने की अंतिम तिथि 8 जून को दोपहर 3 बजे तक निर्धारित की गई है। इसके अगले दिन, यानी 9 जून को सभी जमा किए गए नामांकन पत्रों की बारीकी से जांच की जाएगी। जो उम्मीदवार किसी कारणवश अपना नाम वापस लेना चाहते हैं, वे 11 जून तक अपनी उम्मीदवारी वापस ले सकते हैं। इसके बाद 18 जून को मतदान और मतगणना का काम पूरा किया जाएगा।
कुल 24 सीटों पर द्विवार्षिक चुनाव और 3 सीटों पर उपचुनाव
इस पूरी चुनावी प्रक्रिया के पीछे की वजह स्पष्ट करते हुए चुनाव आयोग ने बताया कि राज्यसभा के भीतर कुल 10 अलग-अलग राज्यों की 24 सीटों पर नियमित द्विवार्षिक चुनाव कराए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और ओडिशा जैसे राज्यों में विभिन्न कारणों से खाली हुई राज्यसभा की 3 सीटों के लिए उपचुनाव भी इसी तारीख को कराए जाएंगे। वहीं अगर राज्य विधान परिषदों की बात करें, तो बिहार में विधान परिषद की कुल 9 सीटों पर द्विवार्षिक चुनाव होने हैं, जबकि वहां की 1 खाली सीट के लिए उपचुनाव की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
कर्नाटक की 4 राज्यसभा और 7 विधान परिषद सीटों पर टिकी नजरें
इस चुनावी अधिसूचना में दक्षिण भारत के प्रमुख राज्य कर्नाटक पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। कर्नाटक की कुल 4 राज्यसभा सीटों और विधान परिषद (एमएलसी) की 7 सीटों पर चुनाव के लिए सोमवार को बिगुल फूंक दिया गया है। राज्य के सत्ताधारी और विपक्षी दलों के लिए यह चुनाव साख का सवाल बन चुका है। यहां के सभी विधायक राजधानी बेंगलुरु स्थित ‘विधान सौध’ (विधानसभा भवन) परिसर में जाकर 18 जून को होने वाले इस मतदान में हिस्सा लेंगे और नए सदस्यों का चुनाव करेंगे।
कई दिग्गज नेताओं का कार्यकाल जून महीने में हो रहा है समाप्त
कर्नाटक में चुनाव कराए जाने की मुख्य वजह यह है कि आगामी 25 जून को यहां के 4 राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इन निवर्तमान सांसदों में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, जनता दल (सेक्युलर) के वरिष्ठ नेता व पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा, और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के इरन्ना कडाडी व नारायण कोरगप्पा शामिल हैं। इन दिग्गजों के हटने से खाली हो रही सीटों को भरने के लिए यह चुनाव बेहद जरूरी हो गया था।
विधान परिषद के 7 सदस्यों का कार्यकाल भी 30 जून को खत्म
राज्यसभा के साथ-साथ कर्नाटक विधान परिषद की 7 सीटों के लिए भी सियासी बिसात बिछ चुकी है। विधायकों के कोटे से चुने गए इन 7 परिषद सदस्यों का कार्यकाल आगामी 30 जून को खत्म होने जा रहा है। सेवानिवृत्त होने वाले सदस्यों में कांग्रेस के कद्दावर नेता बीके हरिप्रसाद, गोविंद राजू, नसीर अहमद और तिप्पन्नप्पा शामिल हैं। वहीं भाजपा की तरफ से एन नागराजू (एमटीबी), प्रताप सिम्हा नायक के. और सुनील वल्ल्यापुर का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है, जिसके चलते इन सभी खाली सीटों पर नए चेहरों को भेजने की तैयारी शुरू हो गई है।
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