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Bada Mangal 2026 : आज पांचवां बड़ा मंगल, जानिए हनुमान जी का व्रत रखने के जरूरी नियम

Bada Mangal 2026

Bada Mangal 2026 : सनातन धर्म में ज्येष्ठ मास के प्रत्येक मंगलवार को ‘बड़ा मंगल’ या ‘बुढ़वा मंगल’ के रूप में बेहद धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह पावन समय पवनपुत्र हनुमान जी की असीम कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। आज ज्येष्ठ मास का पांचवां और अंतिम बड़ा मंगल है, जो भक्तों के लिए बेहद खास है। यदि आप भी बजरंगबली को प्रसन्न करने और अपनी कुंडली में मौजूद अमंगलकारी मंगल ग्रह के दोषों को शांत करने के लिए मंगलवार का उपवास रखने का विचार कर रहे हैं, तो इसके लिए शास्त्रों में वर्णित विशेष नियमों को जानना और उनका पूरी निष्ठा से पालन करना अनिवार्य है। आइए जानते हैं इस व्रत से जुड़े महत्वपूर्ण नियम और विधियां।

व्रत की सही अवधि, शुभ शुरुआत और संकल्प का विधान

शास्त्रों के अनुसार, मंगलवार का व्रत रखने के लिए एक निश्चित अवधि और संकल्प की आवश्यकता होती है। सनातन परंपरा में यह माना जाता है कि यदि कोई भक्त इस व्रत की शुरुआत करना चाहता है, तो उसे लगातार 21 मंगलवार तक उपवास रखने का दृढ़ संकल्प लेना चाहिए। इस व्रत को शुरू करने के समय का भी विशेष महत्व है। किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष के पहले मंगलवार से या फिर ज्येष्ठ मास के बड़े मंगल के पवित्र अवसर से इस व्रत का आरंभ करना सबसे अधिक फलदायी और अत्यंत शुभ माना गया है। सही संकल्प से किया गया व्रत हमेशा सफल होता है।

मंगलवार व्रत के चमत्कारी लाभ: साहस, संतान और संकटों से मुक्ति

मंगलवार का नियमित उपवास करने से जातक के जीवन में मंगल ग्रह से संबंधित सभी शुभ फलों की प्राप्ति होने लगती है। चूंकि मंगलवार का दिन पूरी तरह संकटमोचन हनुमान जी को समर्पित है, इसलिए जो भी व्यक्ति इस दिन सच्चे मन से उपवास रखता है, उसे भगवान हनुमान की अपार कृपा मिलती है। इसके प्रभाव से मनुष्य के भीतर मान-सम्मान, शारीरिक शक्ति, अदम्य साहस और हर कार्य में सफलता प्राप्त करने का बल आता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, यह व्रत निःसंतान दंपत्तियों के लिए भी एक अचूक उपाय है, जिससे संतान सुख की प्राप्ति होती है। इसके अलावा, इस व्रत को करने से जीवन से भूत-प्रेत, नकारात्मक ऊर्जा और तामसिक शक्तियों का साया हमेशा के लिए दूर हो जाता है।

प्रातः काल की विशेष पूजा विधि: दिशा, भोग और पाठ के नियम

मंगलवार के व्रत के दिन सुबह की पूजा का विशेष विधान है। व्रत रखने वाले श्रद्धालु को सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाना चाहिए और स्वच्छ लाल या पीले रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद घर के उत्तर-पूर्व कोने (ईशान कोण) में एक साफ चौकी रखकर उस पर हनुमान जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। बजरंगबली को सिंदूर और चमेली का तेल अथवा शुद्ध घी मिलाकर चोला चढ़ाएं। उन्हें बूंदी के लड्डू, चना या बेसन के लड्डू का भोग लगाएं। इसके बाद भगवान के समक्ष घी का दीपक जलाकर पूरी श्रद्धा के साथ हनुमान चालीसा, बजरंग बाण या सुंदरकांड का पाठ करें।

खान-पान में परहेज: नमक की मनाही और दान के कड़े नियम

मंगलवार के व्रत में खान-पान को लेकर बहुत ही कड़े नियम बनाए गए हैं, जिनका पालन करना हर व्रती के लिए आवश्यक है। इस व्रत में नमक का सेवन पूरी तरह से वर्जित माना गया है। पूरे दिन में केवल एक बार ही शाम के समय भोजन करने का नियम है, जिसमें पूरी तरह से मीठा भोजन जैसे सूजी का हलवा, पूरी या मीठी रोटी ही खाई जाती है। एक बेहद महत्वपूर्ण नियम यह भी है कि यदि आप व्रत के दिन बेसन के लड्डू या कोई अन्य मीठी सामग्री हनुमान जी को अर्पित कर मंदिर में या गरीबों में बांट रहे हैं, तो उस प्रसाद को आपको स्वयं ग्रहण नहीं करना चाहिए।

शाम की आरती के बाद व्रत का पारण और समापन की सही विधि

मंगलवार के व्रत का पारण (व्रत खोलना) हमेशा सूर्यास्त के बाद ही किया जाता है। दिनभर फलाहार या निराहार रहने के बाद, शाम के समय हनुमान जी की दोबारा विधिवत पूजा और आरती संपन्न की जाती है। आरती पूरी होने के बाद बजरंगबली को फिर से मीठा भोग लगाया जाता है। इसके बाद, भगवान को चढ़ाए गए उसी मीठे प्रसाद या घर में बने शुद्ध मीठे भोजन को ग्रहण करके व्रती को अपना उपवास खोलना चाहिए। इस प्रकार श्रद्धापूर्वक नियमबद्ध तरीके से किया गया व्रत हनुमान जी की हर मनोकामना पूरी करने वाला सिद्ध होता है।

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