Trinamoolisation Of BJP : पश्चिम बंगाल में जारी भीषण राजनीतिक उठापटक और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मची ऐतिहासिक बगावत के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने एक बहुत बड़ा और नीतिगत फैसला लिया है। पश्चिम बंगाल बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए पूरी स्थिति साफ कर दी है। उन्होंने दोटूक शब्दों में एलान किया है कि टीएमसी के किसी भी बागी या असंतुष्ट विधायक को भारतीय जनता पार्टी में कतई शामिल नहीं किया जाएगा। भट्टाचार्य ने कड़े लहजे में कहा कि किसी भी परिस्थिति में ‘बीजेपी का तृणमूलकरण’ (तृणमूलाइजेशन) नहीं होने दिया जाएगा। पार्टी अपनी वैचारिक शुद्धता और सिद्धांतों से कोई समझौता नहीं करेगी।
जनता ने टीएमसी के खिलाफ दिया जनादेश, बाहरी नेताओं के बिना जीतीं दो सौ सात सीटें
बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष ने राज्य में पार्टी की मजबूत स्थिति का हवाला देते हुए कहा, “तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के लिए हमारे दरवाजे अब हमेशा के लिए पूरी तरह बंद हो चुके हैं। हमने इस बार के चुनावों में बिना किसी बाहरी दल के नेता को शामिल किए, अपने दम पर 207 शानदार सीटें हासिल की हैं। बंगाल की जनता ने टीएमसी के भ्रष्ट नेताओं और उनकी कार्यशैली के खिलाफ अपना स्पष्ट मतदान किया है। इस बार हमारी पूरी राजनीतिक रणनीति बुनियादी और निचले जमीनी स्तर से शुरू हुई थी, जिसे जनता का अपार समर्थन मिला। ऐसे में टीएमसी के दागी और विवादित लोगों को हम अपनी साफ-सुथरी पार्टी में शामिल करके कार्यकर्ताओं का मनोबल कभी नहीं गिराएंगे।”
ममता बनर्जी की बैठक में पहुंचे केवल बीस विधायक, पार्टी में दोफाड़ होने की नौबत
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में चुनावी हार के बाद सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस इस समय अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है और पार्टी के दो गुटों में पूरी तरह विभाजित होने की नौबत आ गई है। पार्टी के भीतर असंतोष का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जब सभी विधायकों की एक बेहद महत्वपूर्ण आपातकालीन मीटिंग बुलाई, तो टीएमसी के कुल 80 विधायकों में से केवल 20 विधायक ही वहां पहुंचे। विधायकों की इस बेहद कम संख्या को देखते हुए शीर्ष नेतृत्व को आनन-फानन में वह मीटिंग ही कैंसिल (रद्द) करनी पड़ी। हालांकि, उस समय डैमेज कंट्रोल के तहत पार्टी द्वारा यह अजीब दलील दी गई कि उनके विधायक अभिषेक बनर्जी पर हुए कथित हमले के विरोध में प्रदर्शन कर रहे जमीनी कार्यकर्ताओं को पुलिसिया कार्रवाई से बचाने में व्यस्त थे।
रितब्रता बनर्जी और संदीपन साहा निष्कासित, बागी गुट बना रहा है नई रणनीति
टीएमसी के भीतर यह बगावत तब और ज्यादा गहरा गई जब पार्टी ने कड़ा रुख अपनाते हुए अपने दो प्रमुख बागी विधायकों—रितब्रता बनर्जी और संदीपन साहा को दल-विरोधी गतिविधियों के आरोप में पार्टी से निष्कासित कर दिया। दिलचस्प बात यह है कि ममता बनर्जी की आधिकारिक बैठक से दूरी बनाने वाले कई अन्य विधायकों ने गुपचुप तरीके से बागी नेता रितब्रता बनर्जी से मुलाकात कर उनके प्रति अपना समर्थन जताया। सूत्रों के मुताबिक, कोलकाता के एक बड़े होटल में छह कद्दावर विधायकों की एक गुप्त बैठक भी हुई, जिसमें दोनों निष्कासित विधायक भी मौजूद थे। अब बागी खेमे की तैयारी यह है कि यदि 40 से अधिक विधायक उनके साथ आ जाते हैं, तो वे एक अलग आधिकारिक बैठक बुलाकर अपना नया टीएमसी विधायक दल का नेता चुनेंगे और विधानसभा अध्यक्ष के सामने असली टीएमसी होने का दावा पेश करेंगे।
विधायकों के जाली हस्ताक्षर मामले में फंसे अभिषेक बनर्जी, सीआईडी ने भेजा दूसरा समन
इस पूरी सियासी मर्डर मिस्ट्री की मुख्य जड़ विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) को सौंपी गई वह आधिकारिक चिट्ठी है, जिसमें शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विधायक दल का नेता चुनने की बात कही गई थी। बागी विधायकों का आरोप है कि इस पत्र में लगभग 13 विधायकों के हस्ताक्षर किसी और ने फर्जी तरीके से किए हैं। तीन विधायकों ने सीआईडी (CID) के सामने आधिकारिक बयान दर्ज कराया है कि पत्र पर मौजूद साइन उनके हैं ही नहीं। चूंकि यह विवादास्पद पत्र और हस्ताक्षर वाला पन्ना खुद अभिषेक बनर्जी ने स्पीकर को लिखा और भेजा था, इसलिए सीआईडी की जांच की आंच उन तक पहुंच गई है। सीआईडी ने पूछताछ के लिए अभिषेक बनर्जी को तलब किया था, लेकिन वे पेश नहीं हुए और समय की मांग की। इसके बाद जांच एजेंसी ने कड़ा रुख अपनाते हुए अब उन्हें आगामी 8 जून को दोबारा हाजिर होने का नया समन जारी किया है।
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