West Bengal Industry : पश्चिम बंगाल के औद्योगिक और राजनीतिक गलियारों में इन दिनों देश की जानी-मानी डेयरी सहकारी संस्था ‘अमूल’ (Amul) के एक बड़े निवेश को लेकर सरगर्मियां काफी तेज हो गई हैं। सोशल मीडिया मंचों पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कई वरिष्ठ नेताओं ने यह दावा किया है कि अमूल राज्य में करीब करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से एक मेगा डेयरी परियोजना की शुरुआत करने की योजना बना रही है। इस सिलसिले में भाजपा विधायक गौरीशंकर घोष ने भी अपने सोशल मीडिया हैंडल से एक पोस्ट साझा की है। उनका कहना है कि इस बड़े निवेश के धरातल पर उतरने से राज्य के डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर को नई मजबूती मिलेगी और स्थानीय स्तर पर व्यापक रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
पूर्ण स्वामित्व वाले डेयरी प्रोसेसिंग प्लांट की स्थापना की संभावना
राजनीतिक हलकों में चल रहे दावों के मुताबिक, अमूल पश्चिम बंगाल में अपनी एक नई और पूरी तरह से स्वामित्व वाली अत्याधुनिक डेयरी प्रोसेसिंग यूनिट (संयंत्र) स्थापित करने पर विचार कर रही है। यदि यह कयास हकीकत में बदलते हैं, तो इसे पश्चिम बंगाल के पिछड़ते डेयरी क्षेत्र के लिए एक क्रांतिकारी और ऐतिहासिक कदम माना जाएगा। हालांकि, इस पूरे मामले पर गौर करने वाली बात यह भी है कि अभी तक न तो अमूल प्रबंधन की ओर से और न ही पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सरकार की तरफ से इस प्रस्तावित निवेश को लेकर कोई आधिकारिक बयान या औपचारिक घोषणा जारी की गई है।
उद्योग जगत को नई ऊर्जा और स्थानीय युवाओं को मिलेगा रोजगार
आर्थिक और औद्योगिक मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि करोड़ रुपये का यह भारी निवेश हकीकत का रूप लेता है, तो इससे राज्य की अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा मिलेगी। इस मेगा प्रोजेक्ट के जरिए न केवल हजारों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के साधन मिलेंगे, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले दुग्ध उत्पादक किसानों की आय में भी जबरदस्त इजाफा होने की उम्मीद है। इसके अलावा, राज्य के भीतर दूध के कुल उत्पादन, अत्याधुनिक कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं और मजबूत सप्लाई चेन नेटवर्क का एक बड़ा ढांचा तैयार हो सकेगा।
सरकार की निवेश नीतियों और अमूल की रुचि पर विशेषज्ञों की राय
राज्य के वरिष्ठ आर्थिक विश्लेषक अनिर्बन दत्ता का इस पूरे घटनाक्रम पर कहना है कि पश्चिम बंगाल सरकार पिछले कुछ समय से राज्य में नए उद्योगों को आकर्षित करने के लिए विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निवेश एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क में है। यह पूरी तरह संभव है कि सरकार की इसी मुहिम और बातचीत की प्रक्रिया से प्रभावित होकर अमूल ने बंगाल के बाजार में अपनी रुचि दिखाई हो। उनके अनुसार, पश्चिम बंगाल जैसी विशाल आबादी और भारी मांग वाले राज्य में डेयरी आधारित उद्योगों का इस स्तर पर विस्तार होना एक बेहद स्वागत योग्य और सराहनीय कदम साबित होगा।
भाजपा द्वारा औद्योगिक विकास के लिए चिन्हित किए गए पांच प्रमुख क्षेत्र
उल्लेखनीय है कि इस संभावित निवेश की खबरों के आने से कुछ समय पहले ही पश्चिम बंगाल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शामिक भट्टाचार्य ने देश की केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से एक शिष्टाचार मुलाकात की थी। इस उच्च स्तरीय बैठक के दौरान मुख्य रूप से बंगाल में बंद पड़े उद्योगों को पुनर्जीवित करने और नए निवेश को बढ़ावा देने के रोडमैप पर विस्तृत चर्चा हुई थी। भाजपा ने राज्य में नए औद्योगिक गलियारे विकसित करने के लिए सिंगूर, अशोकनगर, राणाघाट, पुरुलिया और झाड़ग्राम जैसे पांच प्रमुख क्षेत्रों की पहचान भी की है। अब अमूल के इस निवेश की खबर ने राज्य के आगामी राजनीतिक और विकास के विमर्श को और अधिक गरमा दिया है।
