Dhirendra Shastri News : उत्तराखंड के पवित्र तीर्थ स्थल बद्रीनाथ धाम में इन दिनों बागेश्वर धाम के प्रसिद्ध पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की भव्य कथा का आयोजन हो रहा है। इस धार्मिक आयोजन के दौरान बाबा केवल आध्यात्मिक प्रवचन ही नहीं दे रहे हैं, बल्कि वे देश की वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक स्थिति पर भी खुलकर अपनी बात रख रहे हैं। कथा के मंच से उन्होंने देश की राजनीति, युवाओं के भविष्य और आम जनता से जुड़े कई बेहद संवेदनशील और अहम मुद्दे उठाए हैं। इन मुद्दों में लगातार बढ़ती पेट्रोल-डीजल की खपत, ईंधन की आसमान छूती कीमतें और हाल ही में चर्चा में आई ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का जिक्र विशेष रूप से शामिल रहा।
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के गठन पर धीरेंद्र शास्त्री का तीखा कटाक्ष
देश में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को लेकर चल रही राजनीतिक चर्चाओं पर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने मंच से एक बड़ा और तीखा बयान दिया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि हमारा भारत देश भी वाकई बहुत गजब और अनोखा है। जिन छोटे-छोटे कॉकरोचों से आम लोग अक्सर डर जाया करते हैं, अब देश में उनके नाम पर भी राजनीतिक पार्टियां बनने लगी हैं। बागेश्वर बाबा ने आगे कहा कि इस तरह की अजीबोगरीब घटनाओं से यह साफ तौर पर सिद्ध होता है कि हमारे देश में बेरोजगारी का स्तर काफी बढ़ गया है।
देश में घटते स्किल डेवलपमेंट और युवाओं के भविष्य पर जताई चिंता
राजनीतिक दलों के अजीब नामों पर चुटकी लेने के साथ ही धीरेंद्र शास्त्री ने देश के विकास मॉडल पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि देश में इस तरह के राजनीतिक भटकाव से यह पता चलता है कि भारत के युवाओं का स्किल डेवलपमेंट (कौशल विकास) लगातार घट रहा है। सरकार और समाज को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज के समय में भारत के पढ़े-लिखे युवाओं के भविष्य की चिंता देश के नीति-निर्माताओं को सबसे पहले होनी चाहिए। यह एक ऐसा गंभीर विषय है, जिस पर हर जिम्मेदार नागरिक को सोचना ही होगा।
ईंधन बचाने की पीएम मोदी की अपील पर बागेश्वर बाबा की प्रतिक्रिया
देश में तेल की खपत को कम करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई विशेष अपील पर भी बागेश्वर बाबा ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कथा के दौरान कहा कि हमें हाल ही में यह अच्छी खबर मिली है कि डीजल और पेट्रोल के दामों में कुछ कटौती की गई है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने देशवासियों से आह्वान किया है कि वे डीजल-पेट्रोल का इस्तेमाल थोड़ा सीमित दायरे में करें और बहुत जरूरी होने पर ही वाहनों से यात्राएं करें। बाबा ने बताया कि वे पर्यावरण और देश हित में इस तरह के कदमों का पूरी तरह समर्थन करते हैं।
‘मैंने पूरे एक महीने में अपनी गाड़ी में एक लीटर तेल भी नहीं फूंका’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस ईंधन बचाओ मुहिम की तारीफ करते हुए धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपना एक दिलचस्प उदाहरण जनता के सामने रखा। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के इस आधिकारिक आह्वान से बहुत पहले ही उन्होंने अपने वाहनों का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर दिया था। बाबा ने मंच से कहा कि कोई भी व्यक्ति मुझसे इस बात को लिखित रूप में ले सकता है कि पिछले पूरे एक महीने के दौरान मैंने अपनी किसी भी गाड़ी में एक लीटर तेल भी खर्च नहीं किया है। उन्होंने जनता को भी सादगी अपनाने की प्रेरणा दी।
नेताओं के चार्टर्ड प्लेन और वीआईपी संस्कृति पर जताया कड़ा ऐतराज
ईंधन की बचत के मुद्दे पर बात करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने व्यवस्था के दोहरे रवैए पर गहरी नाराजगी भी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात से बहुत ज्यादा तकलीफ हुई है कि देश की आम और गरीब जनता से तो बार-बार प्रार्थना की जा रही है कि वे डीजल-पेट्रोल का इस्तेमाल कम करें, लेकिन वीआईपी लोगों पर कोई नियम लागू नहीं होता। बाबा ने कहा कि काश आम जनता की तरह देश के रसूखदार नेताओं के चार्टर्ड विमानों (चार्टर प्लेन) के उड़ने पर भी कुछ दिनों के लिए सख्त रोक लगाई जाती, तो देखने में बड़ा मजा आता। उन्होंने कहा कि तेल की सबसे ज्यादा बर्बादी तो इन्हीं राजनेताओं के हवाई दौरों में होती है।
देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए नेताओं की सैलरी रोकने का सुझाव
बागेश्वर धाम के महंत ने देश की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए सरकार को एक बेहद अनोखा और कड़ा सुझाव भी दे डाला। उन्होंने कहा कि ईंधन बचाने के अलावा देश में एक और जरूरी काम तुरंत होना चाहिए था। यदि देश के आर्थिक हालात सुधारने हैं और भारत के रुपये को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत बनाना है, तो कम से कम तीन महीने के लिए देश के सभी बड़े नेताओं की सैलरी (वेतन) को पूरी तरह रोक देना चाहिए था। उन्होंने सवालिया लहजे में पूछा कि क्या भारत के रुपये को मजबूत करने की पूरी जिम्मेदारी केवल देश की आम और मध्यमवर्गीय जनता की ही है? नेताओं को भी इसमें अपना योगदान देना चाहिए।
