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G-7 Border Outpost : कच्छ के हरामी नाला पहुंचे अमित शाह, सर क्रीक में पेट्रोलिंग के पीछे क्या है बड़ा प्लान?

G-7 Border Outpost

G-7 Border Outpost : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुजरात के भुज प्रवास के दौरान भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा (IB) पर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया। उन्होंने अत्यंत रणनीतिक और संवेदनशील क्षेत्र में स्थित ‘बॉर्डर आउटपोस्ट G-7’ का आधिकारिक तौर पर उद्घाटन किया। इस सीमा चौकी की शुरुआत को भारत की पश्चिमी सीमा की सुरक्षा व्यवस्था में एक मील का पत्थर माना जा रहा है। उद्घाटन समारोह के दौरान गृह मंत्री ने सुरक्षा तैयारियों का जायजा लिया और देश की संप्रभुता की रक्षा में जुटे जवानों की हौसलाअफजाई की।

हरामी नाला क्षेत्र में अभेद्य सुरक्षा ग्रिड, कठिन भौगोलिक चुनौतियों पर पाई विजय

अपने संबोधन में अमित शाह ने विशेष रूप से ‘हरामी नाला’ क्षेत्र का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह इलाका अपनी अनूठी भौगोलिक बनावट और दलदली भूमि के कारण हमेशा से सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील और कमजोर माना जाता रहा है। इस दुर्गम क्षेत्र में एक मजबूत सुरक्षा ग्रिड तैयार करना बेहद जटिल था। घुसपैठ और तस्करी जैसी गतिविधियों को रोकने के लिए सरकार ने कई बड़ी तकनीकी और भौगोलिक चुनौतियों को सफलतापूर्वक पार किया है। अब यह पूरा इलाका एक अभेद्य सुरक्षा नेटवर्क से लैस हो चुका है।

बीएसएफ जवानों के बीच पहुंचे गृह मंत्री, ‘हाई टी’ पर साझा किए अनमोल पल

इस खास मौके पर अमित शाह ने सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जांबाज जवानों के साथ सीधा संवाद स्थापित किया। उन्होंने न केवल परिसर में पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए नीम का एक पौधा लगाया, बल्कि जवानों के साथ ‘हाई टी’ (High Tea) कार्यक्रम में भी शामिल हुए। इस अनौपचारिक मुलाकात ने सीमा पर मुस्तैद जवानों के मनोबल को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया। इस गरिमामयी कार्यक्रम में गृह मंत्री के साथ गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और राज्य के गृह मंत्री हर्ष संघवी भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

₹175 करोड़ की लागत से तैयार बुनियादी ढांचा, G-7 और G-13 परियोजनाएं समर्पित

सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने भारी निवेश किया है। अमित शाह ने जानकारी दी कि इस अत्याधुनिक G-7 केंद्र का निर्माण लगभग 175 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि G-7 और G-13 जैसी दूरदर्शी परियोजनाएं देश की सीमाओं को पूरी तरह सुरक्षित और अभेद्य बनाने के उद्देश्य से राष्ट्र को समर्पित की गई हैं। इससे हमारे जवानों को आधुनिक सुविधाएं और बेहतर निगरानी क्षमता मिलेगी।

गृह मंत्री ने खुद की प्रतिदिन मॉनिटरिंग, जमीन को 3.75 मीटर तक किया ऊंचा

अमित शाह ने अपने पुराने अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि जब उन्होंने पहली बार गृह मंत्री के रूप में बीएसएफ की समीक्षा बैठक ली थी, तभी हरामी नाला की संवेदनशीलता को रेखांकित कर लिया गया था। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से काम शुरू हुआ। दलदली और पानी वाले क्षेत्र में टावर खड़े करना आसान नहीं था, इसलिए सीमा चौकियों के आसपास की जमीन को करीब 3.75 मीटर तक ऊंचा उठाया गया ताकि सुरक्षा व्यवस्था प्रभावी ढंग से काम कर सके। इस परियोजना की महत्ता को देखते हुए शाह ने स्वयं लगातार तीन महीनों तक रोजाना इसकी प्रगति की कड़ाई से निगरानी की थी।

पश्चिम बंगाल की सीमा बाड़बंदी का जिक्र, सुरक्षा में ढिलाई पर पिछली सरकारों को घेरा

गुजरात सीमा की सफलता की कहानी सुनाते हुए गृह मंत्री ने देश के पूर्वी हिस्से यानी पश्चिम बंगाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा व्यवस्था में अधूरी सीमा बाड़बंदी (Fencing) हमेशा से एक बहुत बड़ी कमजोरी रही है, जिसे पहले नजरअंदाज किया गया। शाह ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अनुकूल माहौल और प्रयासों के कारण अब सीमा पर फेंसिंग के लिए जरूरी भूमि के आवंटन की प्रक्रिया में तेजी आई है, जिससे वहां भी राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी।

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