Fujairah Attack PM Modi : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (5 मई) को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के फुजैरा शहर पर हुए कायराना ड्रोन और मिसाइल हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है। इस हमले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता इसलिए बढ़ा दी है क्योंकि इसमें तीन भारतीय नागरिक गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि निर्दोष नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने यूएई के प्रति भारत की एकजुटता प्रकट करते हुए शांति की अपील की है। वैश्विक मंच पर भारत ने हमेशा आतंक और हिंसा के खिलाफ शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाई है, और यह बयान उसी प्रतिबद्धता को दोहराता है।
Fujairah Attack PM Modi : कूटनीति और शांतिपूर्ण समाधान पर भारत का विशेष जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से वैश्विक समुदाय को संदेश दिया कि हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि भारत, संयुक्त अरब अमीरात के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। पीएम मोदी ने क्षेत्रीय स्थिरता को बनाए रखने के लिए बातचीत और कूटनीति के महत्व पर बल दिया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय पक्षों से आग्रह किया कि सभी विवादित मुद्दों का समाधान शांतिपूर्ण चर्चा के जरिए निकाला जाना चाहिए। भारत का मानना है कि मध्य पूर्व में शांति न केवल वहां रहने वाले भारतीयों के लिए, बल्कि पूरी दुनिया की आर्थिक स्थिरता के लिए अनिवार्य है।
Fujairah Attack PM Modi : होर्मुज जलडमरूमध्य: वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में ‘होर्मुज स्ट्रेट’ (Hormuz Strait) के सामरिक महत्व का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस संकरे जलमार्ग से सुरक्षित और निर्बाध आवागमन सुनिश्चित करना क्षेत्रीय शांति और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। गौरतलब है कि दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस का परिवहन इसी मार्ग से होता है। यदि इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है, तो इसका सीधा असर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ता है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत जहाजों की आवाजाही में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था सुचारू रूप से चलती रहे।
अमेरिका-ईरान तनाव और तेल की कीमतों में उछाल का संकट
फुजैरा पर यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर वार्ता में गतिरोध बना हुआ है। इस संघर्ष के कारण समुद्री व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। कई देशों के सामने ऊर्जा संकट खड़ा हो गया है, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। भारत, जो अपनी तेल जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है, इस स्थिति पर करीब से नजर रख रहा है। क्षेत्रीय अस्थिरता सीधे तौर पर वैश्विक विकास दर को प्रभावित कर रही है।
यूएई की सैन्य तैयारी: ईरान के हवाई हमलों को किया नाकाम
यूएई के रक्षा मंत्रालय ने सोमवार (4 मई) को एक आधिकारिक बयान जारी कर इस हमले की भयावहता की जानकारी दी। मंत्रालय के अनुसार, उनके उन्नत वायु रक्षा तंत्र ने ईरान की ओर से दागी गई 12 बैलिस्टिक मिसाइलों, तीन क्रूज मिसाइलों और चार आत्मघाती ड्रोन को हवा में ही सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया। यूएई ने इस हमले के लिए सीधे तौर पर ईरान को जिम्मेदार ठहराया है। रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि वे किसी भी बाहरी खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह सुसज्जित और तैयार हैं। देश की संप्रभुता और सुरक्षा को चुनौती देने वाले किसी भी प्रयास का सेना मजबूती से मुकाबला करेगी।
भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा और भविष्य की चुनौतियां
यूएई में रहने वाले लाखों भारतीयों की सुरक्षा भारत सरकार के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस हमले में तीन भारतीयों के घायल होने की खबर ने प्रवासी समुदाय में चिंता पैदा कर दी है। भारतीय विदेश मंत्रालय यूएई के अधिकारियों के साथ निरंतर संपर्क में है ताकि घायल नागरिकों को सर्वोत्तम चिकित्सा सहायता मिल सके। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस बढ़ते तनाव को कम करने के लिए क्या कदम उठाता है। शांतिपूर्ण वार्ता ही एकमात्र रास्ता है जिससे इस महत्वपूर्ण व्यापारिक क्षेत्र को युद्ध की आग से बचाया जा सकता है।
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