Headline
Manjalpur Bypoll Result
Manjalpur Bypoll Result: BJP की बड़ी जीत, सतीश पटेल ने 30 हजार+ वोटों से मारी बाजी
RSS Gen Z Outreach
RSS Gen Z Outreach: 100+ शहरों में युवाओं से संवाद करेंगे मोहन भागवत, बड़ा अभियान तैयार
Brij Bhushan Singh Case
Brij Bhushan Singh Case: बृजभूषण शरण सिंह को बड़ी राहत, कोर्ट ने यौन उत्पीड़न मामले में किया बरी
CWG 2026
CWG 2026: भारत के 39 मेडल पर PM मोदी का संदेश, खिलाड़ियों की मेहनत को सलाम
US-Iran Talks
US-Iran Talks: ट्रंप बोले- समझौता हुआ तो बचेगी कई लोगों की जान, आज से शुरू होगी वार्ता
Vitamin C in Monsoon
Vitamin C in Monsoon: सर्दी-जुकाम से बचाएगा Vitamin C, मानसून में डॉक्टरों की ये सलाह जरूर मानें हर दिन
Sawan 2026
Sawan 2026: सावन में अगर दिखें ये सपने, तो समझिए भोलेनाथ की कृपा बरसने वाली है
NEET UG Counselling 2026
NEET UG Counselling 2026: काउंसलिंग डेट घोषित, 8 सितंबर से शुरू होगा नया मेडिकल सत्र
World Breastfeeding Week
World Breastfeeding Week: स्तनपान से मां और बच्चे दोनों को फायदे, जानें मिथक और सच

BJP Bengal Victory : ‘अंग-कलिंग’ के बाद अब बंगाल फतह, मोदी-शाह ने किया श्यामा प्रसाद मुखर्जी का अधूरा मिशन पूरा

BJP Bengal Victory

BJP Bengal Victory : “मैं श्यामा प्रसाद का बंगाल बनाऊंगा।” पिछले साल अगस्त में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दमदम के सेंट्रल जेल मैदान से यह हुंकार भरी थी, तब इसे एक राजनीतिक संकल्प माना गया था। लगभग आठ महीने बाद, मई 2026 की तपती दोपहर में जब मतगणना के रुझान परिणामों में बदले, तो यह साफ हो गया कि बंगाल की माटी में कमल पूरी तरह खिल चुका है। भाजपा की यह प्रचंड जीत न केवल सत्ता का परिवर्तन है, बल्कि भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के उस विजन की पुनर्स्थापना भी है, जिसे ‘भाजपा की नींव का पत्थर’ माना जाता है।

जनसंघ से भाजपा तक: एक वैचारिक यात्रा की पूर्णता

भारतीय जनसंघ की स्थापना 1951 में हुई थी, जो आज की भारतीय जनता पार्टी का वैचारिक आधार है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को ‘भाजपा का जनक’ कहा जाता है। उन्होंने एक ऐसे भारत की कल्पना की थी जहाँ ‘एक देश, एक झंडा और एक संविधान’ हो। मोदी-शाह की जोड़ी ने उनके इस सपने के एक बड़े हिस्से को 2019 में अनुच्छेद 370 हटाकर पहले ही पूरा कर दिया था। लेकिन, उनके अपने गृह राज्य पश्चिम बंगाल में विचारधारा की यह जीत अब जाकर मुकम्मल हुई है। पिछले वर्ष उनकी 125वीं जयंती मनाई गई थी, और अब बंगाल का यह जनादेश उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि के रूप में देखा जा रहा है।

कश्मीर के लिए बलिदान और कांग्रेस पर उठते सवाल

डॉ. मुखर्जी के जीवन का सबसे बड़ा संघर्ष कश्मीर को लेकर था। 11 मई 1953 को उन्होंने अनुच्छेद 370 और परमिट सिस्टम के विरोध में कश्मीर कूच किया था। वहां उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और 23 जून को रहस्यमयी परिस्थितियों में उनकी मृत्यु हो गई। आज भी एक बड़ी ‘कॉन्स्पिरसी थ्योरी’ यह कहती है कि उनकी मृत्यु के पीछे तत्कालीन कांग्रेस सरकार का हाथ था। हालाँकि यह रहस्य कभी नहीं सुलझा, लेकिन बंगाल की इस जीत ने उनके उस बलिदान को जनता के मानस पटल पर फिर से जीवित कर दिया है, जिसे दशकों तक भुलाने की कोशिश की गई थी।

नेहरू कैबिनेट से इस्तीफा और जनसंघ का उदय

1950 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की नीतियों से असहमत होकर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद ही जनसंघ का जन्म हुआ। मई 1952 के पहले लोकसभा चुनाव में वे दक्षिण कोलकाता सीट से भारी मतों से जीतकर संसद पहुंचे थे। बंगाल की राजनीति में भाजपा को अपना वजूद तलाशने में दशकों लग गए। 2016 में भाजपा के पास केवल तीन सीटें थीं, जो 2019 में 18 लोकसभा सीटों में बदलीं। 2021 में 77 सीटों के साथ मुख्य विपक्ष बनने के बाद, अब 2026 में अकेले पूर्ण बहुमत प्राप्त करना एक ऐतिहासिक घटनाक्रम है।

मिडिल क्लास और बदलाव की लहर: टीएमसी के दुर्ग का पतन

बंगाल में आई इस राजनीतिक बाढ़ के पीछे ‘फ्लोटिंग वोटर’, निम्न मध्यवर्ग और मध्यम वर्ग की बड़ी भूमिका रही है। तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय दबदबे और संगठनात्मक दबाव से तंग आकर जनता ने बदलाव को गले लगाया। यह जीत महज एक चुनावी आंकड़ा नहीं है, बल्कि उस बंगाल की वापसी है जिसकी नींव डॉ. मुखर्जी ने रखी थी। अंग और कलिंग के बाद अब बंगाल की यह जीत मोदी-शाह के नेतृत्व में उस सपने की पूर्णता है, जिसे डॉ. मुखर्जी ने सात दशक पहले देखा था। आज बंगाल का हर कोना उसी वैचारिक क्रांति का गवाह बन रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top
पहले सावन सोमवार की पूजा ऐसे करें सफल कहां से आया फ्रेंडशिप डे का विचार? तवे पर बार-बार चिपक रहा डोसा? नमक बरसात में क्यों पकड़ लेता है नमी? इन छोटे बदलावों से सिंपल ब्लाउज बनेगा डिजाइनर पीस