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Vinesh Chandel Bail : विनेश चंदेल को बड़ी राहत, मनी लॉन्ड्रिंग केस में कोर्ट ने दी जमानत, जानें शर्तें

Vinesh Chandel Bail

Vinesh Chandel Bail : इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) के निदेशक और सह-संस्थापक विनेश चंदेल के लिए राहत की खबर सामने आई है। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग (धन शोधन) के एक गंभीर मामले में जमानत दे दी है। इस कानूनी प्रक्रिया की सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने चंदेल की जमानत याचिका का विरोध नहीं किया। सामान्यतः पीएमएलए (PMLA) मामलों में ईडी का रुख काफी सख्त होता है, लेकिन इस मामले में एजेंसी के नरम रुख के कारण विनेश चंदेल की रिहाई का रास्ता आसान हो गया। कोर्ट ने इस बात को रिकॉर्ड पर लिया कि आरोपी ने जांच प्रक्रिया में अब तक पूरा सहयोग किया है।

Vinesh Chandel Bail  : जांच में सहयोग बना जमानत का आधार: कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी

कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि विनेश चंदेल की रिहाई के पीछे जांच एजेंसी के सकारात्मक बयान की बड़ी भूमिका है। जांच अधिकारी ने कोर्ट को सूचित किया कि चंदेल ने न केवल जांच में सहयोग किया, बल्कि स्वेच्छा से कई महत्वपूर्ण जानकारियां भी साझा की हैं। पश्चिम बंगाल में मतदान प्रक्रिया संपन्न होने के ठीक अगले दिन मिली यह जमानत राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बनी हुई है। न्यायाधीश ने माना कि चूंकि आरोपी एजेंसी के साथ तालमेल बिठाकर चल रहा है, इसलिए उसे हिरासत में रखने की आवश्यकता फिलहाल नहीं है।

Vinesh Chandel Bail  : कड़ी शर्तों के साथ रिहाई: सबूतों और गवाहों पर रहेगी नजर

भले ही विनेश चंदेल को जमानत मिल गई है, लेकिन कोर्ट ने उनकी आजादी को कुछ सख्त शर्तों के साथ बांधा है। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि चंदेल केस से जुड़े किसी भी सबूत के साथ छेड़छाड़ नहीं करेंगे और न ही किसी गवाह को प्रभावित करने की कोशिश करेंगे। इसके अलावा, उन्हें जांच एजेंसी द्वारा बुलाए जाने पर अनिवार्य रूप से पेश होना होगा। इन शर्तों का उल्लंघन करने पर उनकी जमानत रद्द की जा सकती है। यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि बाहर रहने के दौरान वह न्यायिक प्रक्रिया में कोई बाधा उत्पन्न न कर सकें।

आधी रात को हुई थी गिरफ्तारी के बाद पेशी: करोड़ों के हेरफेर का आरोप

विनेश चंदेल की गिरफ्तारी और उसके बाद की कानूनी कार्यवाही काफी नाटकीय रही थी। 13 अप्रैल को गिरफ्तार करने के बाद ईडी ने उन्हें 14 अप्रैल की आधी रात को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शेफाली बरनाला टंडन के आवास पर पेश किया था। यह अदालती कार्यवाही सुबह 3:30 बजे तक चली थी, जिसके बाद उन्हें 10 दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया गया था। उस समय कोर्ट ने माना था कि चंदेल करोड़ों रुपये की ‘आपराधिक कमाई’ (Proceeds of Crime) के सृजन, हेराफेरी और उसे छिपाने की गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं।

हवाला चैनल और डेटा डिलीट करने के गंभीर आरोप

प्रवर्तन निदेशालय की जांच के अनुसार, ‘मैसर्स इंडियन पीएसी कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड’ के कामकाज में कई अनियमितताएं पाई गई थीं। एजेंसी का आरोप था कि चंदेल कंपनी द्वारा जुटाए गए धन के हस्तांतरण के लिए हवाला चैनलों और बैंकिंग प्रणाली के बाहर अनौपचारिक माध्यमों का उपयोग कर रहे थे। एक और गंभीर आरोप यह था कि जनवरी में कोलकाता स्थित आई-पैक परिसर में छापेमारी के तुरंत बाद, चंदेल ने अपने कर्मचारियों को संवेदनशील ईमेल और वित्तीय डेटा डिलीट करने के निर्देश दिए थे। उन्होंने पूछताछ के दौरान स्वीकार किया था कि रिकॉर्ड नष्ट करने के निर्देश उनके द्वारा ही जारी किए गए थे।

पेशेवर पृष्ठभूमि और आई-पैक में भूमिका

विनेश चंदेल भोपाल स्थित प्रतिष्ठित राष्ट्रीय विधि संस्थान विश्वविद्यालय (NLIU) से कानून स्नातक हैं। वह आई-पैक (I-PAC) में 33 प्रतिशत के बड़े शेयरधारक और सह-संस्थापक हैं। आई-पैक भारत की एक प्रमुख राजनीतिक परामर्शदात्री संस्था है, जो कई बड़े चुनावों में रणनीतिक भूमिका निभाती रही है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के ऐन पहले उनकी गिरफ्तारी ने काफी सुर्खियां बटोरी थीं, लेकिन अब जांच में सहयोग के आधार पर मिली जमानत ने उन्हें कानूनी राहत प्रदान की है। फिलहाल, ईडी इस मामले में हवाला कड़ियों को जोड़ने के लिए आगे की जांच जारी रखेगी।

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