सोनभद्र| ओबरा क्षेत्र में पत्थर की गहरी खदानों के कारण भूजल स्तर में लगातार गिरावट देखी जा रही है, जिससे गर्मी के मौसम में पहले से जूझ रहे लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। क्षेत्र में अनेक घरों के बोरवेल अब पानी नहीं दे रहे हैं। यह केवल तापमान वृद्धि का प्रभाव नहीं, बल्कि खदानों की गहराई और अंधाधुंध खुदाई का परिणाम है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब गहरी खदानें खोदी जाती हैं, तो वे भूजल के प्राकृतिक स्रोतों को बाधित करती हैं। इससे जल पुनर्भरण की प्रक्रिया में रुकावट आती है, जिससे जल स्तर तेज़ी से गिरता है। साथ ही, खदानों से निकाले गए पानी का बहाव आसपास के क्षेत्रों के जल स्रोतों को भी प्रभावित करता है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अब ज़रूरत इस बात की है कि खनन गतिविधियों पर नियंत्रण लगाया जाए और जल संरक्षण के उपायों को प्राथमिकता दी जाए। वर्षा जल संचयन, वृक्षारोपण और खनन नीति में सुधार जैसे कदम भूजल स्तर को स्थिर करने में सहायक हो सकते हैं।
