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G7 Summit France : मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच फ्रांस में जुटेंगे G7 नेता, विशेष बैठक पर दुनिया की नजरें

G7 Summit France

G7 Summit France : फ्रांस की मेजबानी में आयोजित हो रहे जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान आगामी 16 जून को मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) के हालातों पर एक बेहद खास और विशेष बैठक का आयोजन होने जा रहा है। इस अहम सत्र के लिए मेजबान देश फ्रांस ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE), मिस्र (इजिप्ट), सऊदी अरब और कतर जैसे प्रमुख क्षेत्रीय देशों को विशेष रूप से आमंत्रित किया है। इस उच्च स्तरीय बैठक में इजरायल-हमास संघर्ष के साथ-साथ ईरान के बढ़ते प्रभाव और परमाणु कार्यक्रम के मुद्दे पर भी गंभीर बातचीत होगी। इस बार यह वैश्विक आयोजन फ्रांस के बेहद खूबसूरत शहर एविएन में लेक जिनेवा के सुरम्य किनारे ‘एवियन लेस बेन्स’ में 15 से 16 जून तक निर्धारित किया गया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से सीधे टकराव से बचेगा फ्रांस

इस वैश्विक समिट के मुख्य एजेंडे में मध्य पूर्व का संकट और पिछले लंबे समय से जारी यूक्रेन युद्ध शामिल रहने वाले हैं। हालांकि, फ्रांस के राजनयिकों ने इस बार सम्मेलन का पूरा एजेंडा इस प्रकार तैयार किया है, जिससे सभी सदस्य देशों के बीच एक मजबूत वैश्विक एकजुटता दिखाई दे। फ्रांस की कोशिश है कि कुछ संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ किसी भी तरह के सीधे टकराव या वैचारिक मतभेद से बचा जा सके। इस दो दिवसीय बैठक में फ्रांस, ब्रिटेन, कनाडा, जर्मनी, इटली, जापान और अमेरिका जैसे शक्तिशाली देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ-साथ यूरोपीय संघ (EU) के शीर्ष नेता भी मंथन करेंगे।

वेस्ट एशिया सत्र में भारत भी निभाएगा अहम भूमिका

न्यूज एजेंसी एएनआई (ANI) के मुताबिक, फ्रांसीसी राजनयिक सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है कि अगले हफ्ते होने जा रही जी7 समिट के वेस्ट एशिया (पश्चिम एशिया) से जुड़े विशेष सत्र में भारत और अमेरिका के शीर्ष नेताओं के साथ कतर, सऊदी अरब और यूएई के प्रतिनिधि भी एक साथ टेबल पर बैठेंगे। कूटनीतिक सूत्रों ने वैश्विक व्यापार के लिए समुद्री मार्गों की सुरक्षा यानी ‘फ्री नेविगेशन’ पर सबसे ज्यादा जोर दिया है। फ्रांस का मानना है कि भले ही हम सीधे तौर पर चल रहे युद्धों का हिस्सा नहीं हैं, लेकिन वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर इसका सीधा असर हम सभी देशों पर पड़ता है। फ्रांसीसी सूत्रों ने स्पष्ट किया कि भारत इस पूरे परिदृश्य में हमारे लिए सबसे अहम साझीदार है।

भारत-फ्रांस के बीच अटूट विश्वास

राजनयिक सूत्रों का कहना है कि भारत और फ्रांस के कूटनीतिक संबंध अब एक ऐसे भरोसे और गहरे विश्वास के स्तर पर पहुंच चुके हैं, जहां दोनों देश किसी भी जटिल वैश्विक मुद्दे पर खुलकर बात कर सकते हैं। यह कोई पारंपरिक ‘क्लाइंट-कस्टमर’ या खरीदार-विक्रेता वाला रिश्ता नहीं है, बल्कि पूरी तरह से बराबरी और आपसी सम्मान का साझा मंच है। फ्रांस ने भारत की जी20 (G20) अध्यक्षता की ऐतिहासिक सफलता की खुलकर सराहना की है। भारत ने इस जी7 सम्मेलन के सभी ट्रैक और बैठकों में उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया है। फ्रांस ने यह भी माना कि ब्रिक्स (BRICS) के सदस्य के तौर पर भारत का अपना स्वतंत्र एजेंडा है, जो दुनिया में संतुलन बनाने का काम करता है।

‘मेक इन इंडिया’ बनेगा रणनीतिक समझौतों का हिस्सा

फ्रांसीसी अधिकारियों ने साफ किया है कि भारत और फ्रांस के बीच होने वाले सभी आगामी रणनीतिक और रक्षा समझौतों में भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘मेक इन इंडिया’ को मुख्य प्राथमिकता के रूप में शामिल किया जाएगा। इसका सीधा मतलब यह है कि भविष्य में दोनों देशों के बीच केवल हथियारों या तकनीकों की खरीद-फरोख्त नहीं होगी, बल्कि भारत में ही तकनीकों के हस्तांतरण और स्थानीय विनिर्माण (लोकल मैन्युफैक्चरिंग) को बढ़ावा दिया जाएगा। फ्रांस का दृढ़ विश्वास है कि भारत अपनी समस्याओं का जो भी आत्मनिर्भर समाधान ढूंढेगा, वह आने वाले समय में पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल और मददगार साबित होगा।

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