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Imphal Violence : इंफाल में फिर भड़की हिंसा की आग, नागा समुदाय के शव मिलने के बाद भारी आगजनी

Imphal Violence

Imphal Violence : पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर की राजधानी इंफाल में एक बार फिर कानून-व्यवस्था बिगड़ गई है और हिंसा की नई लहर देखने को मिली है। बीती रात शहर के कई हिस्सों में हिंसक प्रदर्शन और सुरक्षाबलों के साथ तीखी झड़पें हुईं। इस ताजा तनाव की मुख्य वजह नागा समुदाय के लापता चल रहे 6 नागरिकों के शव बरामद होना है। जैसे ही मणिपुर पुलिस ने स्थानीय जनता को इन 6 लोगों के शव मिलने की आधिकारिक जानकारी दी, वैसे ही लोगों का आक्रोश सातवें आसमान पर पहुंच गया। उत्तेजित और गुस्से से भरी भीड़ तुरंत सड़कों पर उतर आई, जिसके बाद राजधानी इंफाल का माहौल बेहद तनावपूर्ण और अनियंत्रित हो गया।

अस्पताल के बाहर भारी बवाल

शव मिलने की खबर फैलते ही सैकड़ों स्थानीय लोग और पीड़ित समुदाय के समर्थक उस अस्पताल के बाहर इकट्ठा हो गए, जहां शवों को रखा गया था। वहां मौजूद भीड़ ने राज्य सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी शुरू कर दी। आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने अस्पताल की सुरक्षा के लिए लगाए गए भारी-भरकम बैरिकेड्स को उखाड़ फेंका और आगे बढ़ने की कोशिश की। बेकाबू भीड़ को तितर-बितर करने और स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए मुस्तैद पुलिसकर्मियों को आंसू गैस के गोले दागने पड़े और लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा। इस हंगामे के दौरान शहर में कई जगहों पर तोड़फोड़ और आगजनी की दर्दनाक घटनाएं भी दर्ज की गईं।

बंधक संकट का घटनाक्रम

इस पूरे हिंसक घटनाक्रम की शुरुआत बीते 13 मई को हुई थी, जब राज्य में सक्रिय कुछ अज्ञात सशस्त्र उग्रवादी समूहों (Armed Groups) ने कुल 20 नागरिकों को बंधक बना लिया था। इन बंधकों में 14 लोग कुकी समुदाय से और 6 लोग नागा समुदाय से ताल्लुक रखते थे। घटना के कुछ दिन बाद, उग्रवादियों ने एक नीति के तहत बंधक बनाए गए सभी 14 कुकी नागरिकों को बिना किसी नुकसान के सुरक्षित रिहा कर दिया था। इसके बाद प्रशासन को उम्मीद थी कि बाकी बचे लोगों को भी छोड़ दिया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और नागा बंधकों की जान ले ली गई।

सेनापति जिले से बरामद हुए शव

लगातार जारी खोज अभियान के बीच, कल दोपहर बंधक बनाए गए नागा समुदाय के उन सभी 6 लापता लोगों के शव राज्य के सेनापति जिले के सुदूर इलाके से बरामद किए गए। शवों की हालत देखकर यह साफ था कि उनकी बेरहमी से हत्या की गई है। इस खबर के पुख्ता होते ही घाटी में रह रहे नागा और अन्य स्थानीय समुदायों का गुस्सा भड़क उठा। अस्पताल के बाहर और शहर के मुख्य चौराहों पर देर रात तक प्रदर्शनकारियों और भारी मात्रा में तैनात सुरक्षाकर्मियों के बीच लगातार जोर-आजमाइश और हिंसक टकराव का दौर चलता रहा।

मुख्यमंत्री कोनराड संगमा की कड़ी निंदा

इस जघन्य और अमानवीय हत्याकांड पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के. संगमा ने बुधवार को एक कड़ा बयान जारी किया। उन्होंने मणिपुर में हुई नगा समुदाय के 6 लोगों की निर्मम हत्या की कड़े शब्दों में निंदा की। संगमा ने कहा कि इस कायरतापूर्ण और जघन्य वारदात के पीछे जो भी तत्व जिम्मेदार हैं, उन्हें बिना किसी देरी के न्याय के कटघरे में खड़ा कर सख्त से सख्त कानूनी सजा दी जानी चाहिए। उन्होंने इन हत्याओं को पूरी तरह से अस्वीकार्य और अमानवीय बताया।

शांति प्रयासों के बीच बड़ी साजिश

मणिपुर पुलिस के मुताबिक, मारे गए नागा नागरिकों को कांगपोकपी जिले के पास से हथियारबंद समूहों द्वारा अगवा किया गया था। एनपीपी अध्यक्ष संगमा ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि यह घटना उस समय और भी अधिक दर्दनाक और चिंताजनक हो जाती है, जब यूनाइटेड नगा काउंसिल (UNC) द्वारा राज्य में शांति, संवाद और आपसी सुलह का माहौल बनाने के गंभीर प्रयास किए जा रहे थे। शांति प्रयासों के बीच इस तरह की घटना का होना यह दर्शाता है कि कुछ असामाजिक तत्व राज्य में सामान्य स्थिति बहाल नहीं होने देना चाहते।

निर्दोषों की हत्या किसी भी कीमत पर जायज नहीं

मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी समाज या संघर्ष में निर्दोष नागरिकों की जान लेना पूरी तरह से गलत है और इसे किसी भी तर्क या आधार पर सही नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने शोक संतप्त परिवारों के प्रति गहरी सहानुभूति जताई। इसके साथ ही, उन्होंने मणिपुर के इस अत्यंत कठिन और संवेदनशील समय में सभी संबंधित पक्षों, समुदायों और आम नागरिकों से शांति तथा धैर्य बनाए रखने की भावुक अपील की, ताकि कानून अपना काम कर सके और दोषियों को सजा मिल सके।

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